फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Mantra, idol and rosary never diminish: Gyananand Maharaj

मंत्र, मूर्ति और माला कभी क्षीण नहीं होती : ज्ञानानंद महाराज

Sat, 22 Nov 2025 01:34 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:34 AM IST
विज्ञापन
Mantra, idol and rosary never diminish: Gyananand Maharaj
मोरना। भानु पीठाधीश्वर शंकराचार्य ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि मंत्र, मूर्ति और माला कभी क्षीण नहीं होती। उन्होंने जोर दिया कि इनका संरक्षण कर आम लोगों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। प्रकृति के नियम का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई चीज क्षीण होती है तो कोई बढ़ती है। शंकराचार्य ने कहा कि शास्त्र कहते हैं कि सबसे पहले घरों में अग्नि रखी जाती थी लेकिन आज घरों में अग्नि संभाली नहीं जा रही है, जिसके कारण पवित्रता नष्ट हो रही है।
विज्ञापन

शुकतीर्थ दंडी आश्रम में आयोजित ब्रह्मलीन स्वामी गुरुदत्त महाराज के चौथे निर्वाण समारोह में संत समाज ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। पीठाधीश्वर ने आगे कहा कि साहित्य, संगीत और शास्त्र का स्वरूप आवश्यक है। ब्राह्मण वेश में तिलक न होने पर लोग सेवा भाव नहीं रखेंगे, इसलिए दर्शन देने के लिए तिलक लगाने का स्वभाव जरूर बनाना चाहिए। उन्होंने पुष्प का उदाहरण देते हुए कहा कि पुष्प में सुगंध होती है लेकिन वह दिखाई नहीं देती, और वह फूल-फूल नहीं जिसमें सुगंध न हो। ऐसे फूलों को देवताओं को अर्पण नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा भोजन भिक्षा के लिए नहीं, बल्कि शिक्षित और संस्कारी बनने के लिए करना चाहिए।
विज्ञापन

दंडी स्वामी गिरीश नरवर महाराज ने कहा कि जिन महात्माओं के निर्वाण दिवस के आदर्शों पर हम चल नहीं सके, उन लोगों को कथा निर्माण महोत्सव में भाग लेने का दिखावा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज समाज में भिक्षा करने का भी धर्म नहीं रहा। किसी की त्रुटि बहुत जल्द दिख जाती है, अपनी नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

कानपुर से पधारे स्वामी वेदप्रकाश शुक्ल ने कहा कि वाणी और व्यवहार एक समान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, मोह के बाण हमारे जीवन को कसक रहे हैं। कथा व्यास सर्वेश ने कहा कि गुरुदत्त महाराज को संस्कृत के श्लोक प्रिय थे। भगवान की कृपा निरंतर हमारे जीवन पर बरस रही है और शास्त्र का सूक्ष्म चिंतन करने पर प्रभु कृपा दिखाई देती है।

संचालन आचार्य दिवाकर नरवर ने किया। आश्रम परमाध्यक्ष स्वामी स्वरूपानंद महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल, सुभाष शर्मा, प्रेम शंकर मिश्रा, अजय कृष्ण, राजकुमार शर्मा, मनोहर शर्मा, सुभाष शर्मा गोविंद और विनोद शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed