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आम उत्पादकों के सामने खड़ा हो रहा बिक्री का संकट
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आम उत्पादकों के सामने आ रहा बिक्री का संकट
मुजफ्फरनगर। जिले में आम की बागवानी करने वाले किसानों के सामने इस बार फसल की बिक्री का संकट बढ़ता जा रहा है। कच्चे आम की कीमतों में आई भारी गिरावट ने पके आम की कीमतों को लेकर मंदी का संकेत दे दिया है। हालात यह है कि कुछ बाग ठेकेदार किसानों के बाग बीच में ही छोड़कर भागने के लिए तैयार हैं।
कोरोना महामारी के चलते पहले ही यह आभास हो गया है कि आम का उत्पादन इस साल नुकसान में जाएगा। पुरकाजी में कई पीढ़ियों से आम की खेती कर रहे सलमान जमा का कहना है कि कोरोना महामारी का असर आम की खेती पर दिखना शुरू हो गया है। कच्चा आम दस रुपए किलो का ही बिक रहा है। बाग ठेकेदार आम की बिक्री को लेकर अभी से डरे हुए है। आंधी का नुकसान झेलने के बाद अब बाजार में रेट को लेकर तनाव में हैं। सलमान का कहना है कि आम को लेकर ऐसी स्थिति पहली बार देखने को मिल रही है।
नसीरपुर में बाग बहार के मालिक चंदन चौहान कहते हैं कि इस बार फसल का बाजार में उठान नहीं है। किसानों के भारी घाटे को देखते हुए इस बार आम की खरीद सरकार को करनी चाहिए। सरकार आम उत्पादकों को अनुुदान की भी योजना निकाल सकती है। आम का उत्पादन इस बार इतना ज्यादा है कि सरकार आम खरीदकर विटामिन सी की पूर्ति के लिए जनता में वितरित कर सकती है।
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बघरा में आम की खेती करने वाले मिलन सैनी कहते है कि लंबे समय से वह एक ही ठेकेदार को अपना बाग देते है। ऐसे में ठेकेदार को नुकसान होता है तो वह किसान को ही झेलना पड़ता है। बाग के फल के पैसे ठेकेदार फसल बेचकर ही देता है। ऐसे में किसान को एडजस्ट करना पड़ता है। गांव काजीखेडा के किसान विदित मलिक कहते है कि उन्होंने अपने बाग का ठेका गांव के ही ठेकेदार को दिया है। वह छोड़कर तो नहीं जाएगा, लेकिन जब बड़ा नुकसान होगा तो किसान के घर पर ही आकर बैठेगा। ऐसे में किसान को ही नुकसान उठाना पड़ता है। बड़ी संख्या में ठेकेदार बाग छोड़कर जा चुके हैं। नंगला बुजुर्ग में आम की खेती करने वाले विकास कादियान कहते हैं कि क्षेत्र में बाग मालिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एक तो यहां बंदर बड़ी संख्या में है जो सीधे नुकसान पहुंचाते हैं। दूसरे बाजार में दाम नहीं है। तीसरे इस बार मंडी भी कम खुल रही है। जिस तरह बाजार में मलिहाबाद की दशहरी 20 रुपये किलो पर आ गया है, इसे देखते हुए यहां आम के साथ अच्छा होने वाला नहीं है। निश्चित रूप से आम की खेती इस वर्ष लाभ में नहीं है।
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जिले में 8400 हेक्टेयर में है आम
मुजफ्फरनगर। जिला उद्यान अधिकारी अरुण सिंह ने बताया कि जनपद में आम के बाग का क्षेत्रफल आठ हजार चार सौ हेक्टेयर है। इसे बढ़ाने के लिए काम चल रहा है। इस बार आम की फसल अच्छी है। कोरोना के चलते कुछ मंडियों में बिक्री नहीं हो पा रही है। फिलहाल को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि आम की खेती नुकसान में रह सकती है, लेकिन उत्पादन ज्यादा होने के कारण अधिक नुकसान नहीं होगा।
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मुजफ्फरनगर। जिले में आम की बागवानी करने वाले किसानों के सामने इस बार फसल की बिक्री का संकट बढ़ता जा रहा है। कच्चे आम की कीमतों में आई भारी गिरावट ने पके आम की कीमतों को लेकर मंदी का संकेत दे दिया है। हालात यह है कि कुछ बाग ठेकेदार किसानों के बाग बीच में ही छोड़कर भागने के लिए तैयार हैं।
कोरोना महामारी के चलते पहले ही यह आभास हो गया है कि आम का उत्पादन इस साल नुकसान में जाएगा। पुरकाजी में कई पीढ़ियों से आम की खेती कर रहे सलमान जमा का कहना है कि कोरोना महामारी का असर आम की खेती पर दिखना शुरू हो गया है। कच्चा आम दस रुपए किलो का ही बिक रहा है। बाग ठेकेदार आम की बिक्री को लेकर अभी से डरे हुए है। आंधी का नुकसान झेलने के बाद अब बाजार में रेट को लेकर तनाव में हैं। सलमान का कहना है कि आम को लेकर ऐसी स्थिति पहली बार देखने को मिल रही है।
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नसीरपुर में बाग बहार के मालिक चंदन चौहान कहते हैं कि इस बार फसल का बाजार में उठान नहीं है। किसानों के भारी घाटे को देखते हुए इस बार आम की खरीद सरकार को करनी चाहिए। सरकार आम उत्पादकों को अनुुदान की भी योजना निकाल सकती है। आम का उत्पादन इस बार इतना ज्यादा है कि सरकार आम खरीदकर विटामिन सी की पूर्ति के लिए जनता में वितरित कर सकती है।
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बघरा में आम की खेती करने वाले मिलन सैनी कहते है कि लंबे समय से वह एक ही ठेकेदार को अपना बाग देते है। ऐसे में ठेकेदार को नुकसान होता है तो वह किसान को ही झेलना पड़ता है। बाग के फल के पैसे ठेकेदार फसल बेचकर ही देता है। ऐसे में किसान को एडजस्ट करना पड़ता है। गांव काजीखेडा के किसान विदित मलिक कहते है कि उन्होंने अपने बाग का ठेका गांव के ही ठेकेदार को दिया है। वह छोड़कर तो नहीं जाएगा, लेकिन जब बड़ा नुकसान होगा तो किसान के घर पर ही आकर बैठेगा। ऐसे में किसान को ही नुकसान उठाना पड़ता है। बड़ी संख्या में ठेकेदार बाग छोड़कर जा चुके हैं। नंगला बुजुर्ग में आम की खेती करने वाले विकास कादियान कहते हैं कि क्षेत्र में बाग मालिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एक तो यहां बंदर बड़ी संख्या में है जो सीधे नुकसान पहुंचाते हैं। दूसरे बाजार में दाम नहीं है। तीसरे इस बार मंडी भी कम खुल रही है। जिस तरह बाजार में मलिहाबाद की दशहरी 20 रुपये किलो पर आ गया है, इसे देखते हुए यहां आम के साथ अच्छा होने वाला नहीं है। निश्चित रूप से आम की खेती इस वर्ष लाभ में नहीं है।
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जिले में 8400 हेक्टेयर में है आम
मुजफ्फरनगर। जिला उद्यान अधिकारी अरुण सिंह ने बताया कि जनपद में आम के बाग का क्षेत्रफल आठ हजार चार सौ हेक्टेयर है। इसे बढ़ाने के लिए काम चल रहा है। इस बार आम की फसल अच्छी है। कोरोना के चलते कुछ मंडियों में बिक्री नहीं हो पा रही है। फिलहाल को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि आम की खेती नुकसान में रह सकती है, लेकिन उत्पादन ज्यादा होने के कारण अधिक नुकसान नहीं होगा।