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कुपोषण के शिकार बच्चों ने जीवन जीने की आस नहीं छोड़ी
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कुपोषण के शिकार बच्चों को इलाज का इंतजार
मोरना। विकास खंड क्षेत्र के गांव खुशीपुरा के कुपोषण के शिकार युवा और बच्चों की कष्टों को सहने की आदत सी हो गई है। शासन प्रशासन की बेरुखी को दरकिनार कर ग्रामीणों की रोजाना गांव में विकास और स्वास्थ्य अधिकारियों की राह देखते हुए सोते जागते व रातों में करवटें बदलते हुए कटती है। वहीं, मोरना स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. अर्जुन सिंह ने सोमवार को गांव में टीम भेजे जाने की बात कही है।
केंद्रीय सरकार कुपोषण की बीमारी को खत्म करने के लिए विज्ञापनों और योजनाओं पर अरबों रुपयों को खर्च करने दावा भले ही करती हो। वहीं, शासन प्रशासन के उच्चाधिकारी भी कुपोषण की बीमारी जड़ से खत्म करने की बात कहें, तो यह कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अधिकारी तो प्रदेश सरकार को योजना और पैसा भेजती है, लेकिन जिले के अधिकारी इन योजनाओं को ग्रामीण अंचलों के गांव की गलियों में कुपोषण स्वास्थ्य संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन करने के आदेश देकर अपनी इतिश्री कर लेेते हैं। धरातल पर आते-आते यह योजनाएं विकास खंड कार्यालय परिसरों के दफ्तरों में योजनाओं की फाइलों में दम तोड़ देती है। कुपोषण फैलता है माताओं को पूर्ण आहार नहीं मिलने से। गर्भवती महिलाओं के पूर्ण आहार की जिम्मेदारी सरकार ने आशाओं को दे रखी है। गांव खुशीपुरा निवासी महिलाओं ने बताया कि आशाओं का गांव में आए हुए कई महीने बीत जाते हैं। पोषक आहार की बात तो छोड़िए अधिकारी भी गांव में आना पसंद नहीं करते। गांव के पानी, मिटटी और ऑक्सीजन की जांच हर हाल में होनी चाहिए। हम लोग भी सरकार को टैक्स देते हैं, तो हमारे अधिकारों का हनन क्यों हो रहा है, यह हमारा सरकार से सवाल है। इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
गांव खुशीपुरा में कुपोषण से पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के लिए आज स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव में भेजा जाएगा। स्वास्थ्य जांच के बाद बीमार बच्चों के इलाज की पूरी व्यवस्था कराई जाएगी।- डा. अर्जुन सिंह, मोरना स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी।
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मोरना। विकास खंड क्षेत्र के गांव खुशीपुरा के कुपोषण के शिकार युवा और बच्चों की कष्टों को सहने की आदत सी हो गई है। शासन प्रशासन की बेरुखी को दरकिनार कर ग्रामीणों की रोजाना गांव में विकास और स्वास्थ्य अधिकारियों की राह देखते हुए सोते जागते व रातों में करवटें बदलते हुए कटती है। वहीं, मोरना स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. अर्जुन सिंह ने सोमवार को गांव में टीम भेजे जाने की बात कही है।
केंद्रीय सरकार कुपोषण की बीमारी को खत्म करने के लिए विज्ञापनों और योजनाओं पर अरबों रुपयों को खर्च करने दावा भले ही करती हो। वहीं, शासन प्रशासन के उच्चाधिकारी भी कुपोषण की बीमारी जड़ से खत्म करने की बात कहें, तो यह कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अधिकारी तो प्रदेश सरकार को योजना और पैसा भेजती है, लेकिन जिले के अधिकारी इन योजनाओं को ग्रामीण अंचलों के गांव की गलियों में कुपोषण स्वास्थ्य संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन करने के आदेश देकर अपनी इतिश्री कर लेेते हैं। धरातल पर आते-आते यह योजनाएं विकास खंड कार्यालय परिसरों के दफ्तरों में योजनाओं की फाइलों में दम तोड़ देती है। कुपोषण फैलता है माताओं को पूर्ण आहार नहीं मिलने से। गर्भवती महिलाओं के पूर्ण आहार की जिम्मेदारी सरकार ने आशाओं को दे रखी है। गांव खुशीपुरा निवासी महिलाओं ने बताया कि आशाओं का गांव में आए हुए कई महीने बीत जाते हैं। पोषक आहार की बात तो छोड़िए अधिकारी भी गांव में आना पसंद नहीं करते। गांव के पानी, मिटटी और ऑक्सीजन की जांच हर हाल में होनी चाहिए। हम लोग भी सरकार को टैक्स देते हैं, तो हमारे अधिकारों का हनन क्यों हो रहा है, यह हमारा सरकार से सवाल है। इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
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गांव खुशीपुरा में कुपोषण से पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के लिए आज स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव में भेजा जाएगा। स्वास्थ्य जांच के बाद बीमार बच्चों के इलाज की पूरी व्यवस्था कराई जाएगी।- डा. अर्जुन सिंह, मोरना स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी।
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