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Muzaffarnagar News: महाराज से ठगी का खुलासा, सात गिरफ्तार

Fri, 20 Mar 2026 12:50 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:50 AM IST
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Maharaj's fraud exposed, seven arrested
भोपा पुलिस ने पकड़े ठगी के आरोपी फोटो संवाद
मुजफ्फरनगर। शुकतीर्थ निर्मोही अखाड़े के महाराज विष्णु दास से उनके आश्रम में रहने वाले हासिम ने ही अपने साथियों के साथ मिलकर गोशाला के लिए जमीन दिलाने के नाम पर साढ़े 28 लाख रुपये ठगे थे। भोपा पुलिस ने पीसीएस की तैयारी कर हरे आरोपी प्रवीण सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर 22 लाख रुपये बरामद कर लिए।
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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों को बताया कि संत की ओर से शिकायत मिली थी कि षड्यंत्र रचकर कूट रचित दस्तावेज तैयार कर गोशाला के लिए जमीन दिलाने के नाम पर 28 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई है। रुपये वापस मांगने पर महाराज को धमकी दी।
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पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों को पकड़ा है। टीम को 25 हजार का इनाम दिया जा रहा है। उधर प्रेसवार्ता में पहुंचे महाराज ने पुलिस को आभार जताया। कहा कि आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। पुलिस ने 22 लाख रुपये, एक मॉनिटर, एक सीपीयू, एक प्रिंटर, एक कीबोर्ड व एक माउस, दो फर्जी आधार कार्ड बरामद किया है। इस दौरान पुलिस अधीक्षक देहात आदित्य बंसल, सीओ देवव्रत वाजपेयी भी मौजूद रहे।
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n आरोपियों ने निभाई अलग-अलग भूमिका : आरोपियों ने पुलिस को बताया कि विष्णुदास महाराज के निर्मोही अखाड़े में आठ साल से हासिम का आना-जाना था। कुछ समय महाराज ने हाथरस में अपनी जमीन बेचना उसे बताया था। कहा कि वह इस रुपये से गोशाला बनाएंगे। इससे हासिम के मन में लालच आ गया। उसने महाराज के रुपये ठगने के लिए अपने साथियों के मिलकर योजना तैयार की। 42 बीघा जमीन बताते हुए उसका फर्जी मालिक सीकरी निवासी नजीर को बनाया। उसका फर्जी आधार कार्ड हरिद्वार थाना भगवानपुर के गांव किशनपुर निवासी कादिर से उसके कंप्यूटर से बनवाया। उस पर गादला निवासी सुखविंदर का फोटो लगा दिया। रवीश को रितेश के नाम से हल्का लेखपाल बनाया। उसका भी फर्जी आधार कार्ड बनवाया। जमीन दिखाने के दौरान उसने जमीन की फर्जी तरीके से पैमाइश की। इसके बाद नजीर को महाराज से मिलवाया। सीकरी के जंगल में 42 बीघा जमीन में 4500 पॉपुलर के पेड़ लगे होना बताते हुए जमीन का सौदा 31 लाख रुपये में तय कर लिया। विश्वास दिलाने के लिए नजीर का आधार कार्ड भी महाराज को दिखाया गया। जमीन मालिक के रूप में सुखविंदर को महाराज से मिलवाया गया था। महाराज से रुपये ठगने के लिए फर्जी इकरारनामा बनवाया और 28 लाख 50 हजार रुपये उसी समय ले लिए। आरोपियों ने ठगी करने के लिए रवीश ने फर्जी तरीके से मोबाइल सिम लिए थे। उनके नंबर महाराज को दिए थे। ठगी करने के बाद यह सिम तोड़कर फेंक दिए थे। ताकि उनसे संपर्क न हो सके।
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