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Muzaffarnagar News: किसानों की आवाज बुलंद कर दिल में बनाई जगह

Fri, 12 Dec 2025 01:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Dec 2025 01:11 AM IST
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Made a place in the heart by raising the voice of farmers
मुजफ्फरनगर। अमर उजाला उत्कर्ष के 39 साल। मेरठ संस्करण की शुरूआत से ही पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ गहरा जुड़ाव हुआ। किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों की समस्याओं को मुद्दा बनाया और अमर उजाला ने अन्नदाता की आवाज बुलंद की।
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साल 1978 में दिल्ली के कंझावला से किसान आंदोलन को आवाज मिलनी शुरू हुई। 1986 में भाकियू के पुराने पदाधिकारियों ने किसान समस्याओं के समाधान के लिए पश्चिम उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों की बैठक हुई। बिजली की समस्या पर सितंबर 1986 में जनता इंटर कॉलेज बड़ौत में बैठक हुई। 17 अक्तूबर 1986 को सिसौली के देवी मंदिर, वर्तमान किसान भवन पर पंचायत हुई, जिसमें चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को अध्यक्ष बनाया गया। इसी दौरान 12 दिसंबर 1986 को अमर उजाला के मेरठ संस्करण की शुरुआत हुई। अमर उजाला ने किसानों की आवाज को बुलंद कर दिल में जगह बनाई। भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव ओमपाल मलिक कहते हैं कि किसानों ने हमेशा अमर उजाला को अपने परिवार का हिस्सा माना।
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इन आंदोलनों में उठी आवाज पहुंचाई लखनऊ-दिल्ली



- करमूखेड़ी आंदोलन : एक मार्च 1987 को करमूखेड़ी में महापंचायत, पुलिस की फायरिंग में दो किसानों का बलिदान। यहीं से भाकियू को सुर्खियां मिली।

- मेरठ कमिश्नरी का घेराव : भाकियू ने 27 जनवरी से 19 फरवरी 1988 तक तक लंबा धरना प्रदर्शन किया। टिकैत की पहली बार गिरफ्तारी के प्रयास असफल रहे।



- रजबपुर सत्याग्रह : रजबपुर में पांच किसानों की मौत के बाद भाकियू ने छह मार्च 1988 से 23 जून 1988 तक सत्याग्रह किया। जेल भरो आंदोलन किया।

- वोट क्लब का धरना : किसानों के मुद्दे पर 25 से 31 अक्तूबर 1988 तक दिल्ली के वोट क्लब पर धरना दिया। देशभर के किसानों का सैलाब उमड़ा।



- अलीगढ़ के खैर का आंदोलन : खैर में किसानों के मुद्दे पर भाकियू ने बड़ी पंचायत की। गेहूं और अन्य फसलों का मुद्दा उठाया।

- नईमा अपहरण कांड : तीन अगस्त 1989 से 10 अक्तूबर 1989 तक भोपा में आंदोलन। सीकरी की नईमा की बरामदगी के लिए हुआ था आंदोलन।



किसानों के दिल में बसा है अमर उजाला : टिकैत

भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि अमर उजाला और किसानों ने सफर मेरठ से साथ-साथ शुरू हुआ। कमिश्नरी के आंदोलन में अमर उजाला ने किसानों की आवाज सबसे प्रमुखता से उठाई। किसानों के लिए पेपर पढ़ने का मतलब अमर उजाला ही होता था। भाकियू की शुरुआत से लेकर अब तक अन्नदाता की आवाज उठाने का कार्य किया।
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किसानों के संघर्ष में हमेशा साथ दिया : भाकियू अध्यक्ष

भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि अमर उजाला ने हमेशा किसानों के संघर्ष में साथ दिया और अन्नदाता की आवाज को कभी नहीं दबने दिया। कलम की ताकत से किसानों की मेहनत को सींचने का काम किया है।
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