{"_id":"5914b7574f1c1b21658509b1","slug":"lucknow-team-will-investigate","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ की टीम करेगी जांच, एनएचआरएम में पूर्व सीएमओ समेत 11 दोषी ठहराए गए ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ की टीम करेगी जांच, एनएचआरएम में पूर्व सीएमओ समेत 11 दोषी ठहराए गए
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 12 May 2017 12:41 AM IST
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वास्थ्य विभाग में एनएचआरएम घोटाले में पूर्व सीएमओ समेत 11 दोषी लोगों पर आरोप सिद्ध करने के लिए लखनऊ से जांच होगी। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामले में कई बड़े अफसरों को विभाग ने क्लीनचिट देने की तैयारी में लगा हुआ है। इस प्रकरण में कई ऐसे चिकित्सकों का भी हाथ है, जो विभाग में कई साल से एक ही कुर्सी पर विराजमान हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के तहत गांव-गांव टीकाकरण के लिए मोबाइल वैन चलाई गई। इन वैन को लगाने के लिए पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार और चिकित्सकों ने मिलकर 27 वाहन लगाए, जिनमें 10 के जिले में पंजीकरण नहीं मिले तो कई पुराने थे। कुल मिलाकर इस मामले में करीब 15 लाख रुपये का गबन हुआ है। प्रकरण की जांच तत्कालीन डीएम डीके सिंह ने सीडीओ अंकित कुमार अग्रवाल, एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत आदि से कराई गई तो घोटाले की पोल खुली।
इस मामले में पूर्व सीएमओ समेत 11 चिकित्सक, कर्मचारी शामिल मिले। इसकी रिपोर्ट तत्कालीन डीएम ने लखनऊ भेज दी। कुछ लोगों ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़े कर कई लोगों को बचाए जाने की शिकायत की है। इस पर लखनऊ से स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर खुद ही प्रकरण की जांच करेंगे। दोषियों पर आरोप सिद्ध करने के लिए जांच बैठाई गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
विज्ञापन
क्योंकि जांच की आंच जिले में फिर से पहुंचेगी, जिसमें कइयों के फंसने का अंदेशा है। विभाग का एकाउंट विभाग, कर्मचारी इसमें संदेह के घेरे में है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि घोटाले में अब लखनऊ स्तर से ही जांच हो रही है। दोषियों की जो रिपोर्ट गई है, आला अधिकारी उस पर दोष सिद्ध करने के लिए जांच करा रहे हैं। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई होगी।
दो बाबू हो चुके हैं सस्पेंड
मुजफ्फरनगर। घोटाले से पर्दा उठा तो लखनऊ से दो बाबू बालेश्वर और ब्रजभूषण चौहान को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, सीडीओ टीम की जांच में फंसे लोगों को विभाग ने पूर्ववत की तरह ही पटल पर तैनात कर रखा है। इन पर कार्रवाई करने से विभाग ने हाथ पीछे खींच रखे हैं।
विज्ञापन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के तहत गांव-गांव टीकाकरण के लिए मोबाइल वैन चलाई गई। इन वैन को लगाने के लिए पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार और चिकित्सकों ने मिलकर 27 वाहन लगाए, जिनमें 10 के जिले में पंजीकरण नहीं मिले तो कई पुराने थे। कुल मिलाकर इस मामले में करीब 15 लाख रुपये का गबन हुआ है। प्रकरण की जांच तत्कालीन डीएम डीके सिंह ने सीडीओ अंकित कुमार अग्रवाल, एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत आदि से कराई गई तो घोटाले की पोल खुली।
विज्ञापन
इस मामले में पूर्व सीएमओ समेत 11 चिकित्सक, कर्मचारी शामिल मिले। इसकी रिपोर्ट तत्कालीन डीएम ने लखनऊ भेज दी। कुछ लोगों ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़े कर कई लोगों को बचाए जाने की शिकायत की है। इस पर लखनऊ से स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर खुद ही प्रकरण की जांच करेंगे। दोषियों पर आरोप सिद्ध करने के लिए जांच बैठाई गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
विज्ञापन
क्योंकि जांच की आंच जिले में फिर से पहुंचेगी, जिसमें कइयों के फंसने का अंदेशा है। विभाग का एकाउंट विभाग, कर्मचारी इसमें संदेह के घेरे में है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि घोटाले में अब लखनऊ स्तर से ही जांच हो रही है। दोषियों की जो रिपोर्ट गई है, आला अधिकारी उस पर दोष सिद्ध करने के लिए जांच करा रहे हैं। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई होगी।
दो बाबू हो चुके हैं सस्पेंड
मुजफ्फरनगर। घोटाले से पर्दा उठा तो लखनऊ से दो बाबू बालेश्वर और ब्रजभूषण चौहान को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, सीडीओ टीम की जांच में फंसे लोगों को विभाग ने पूर्ववत की तरह ही पटल पर तैनात कर रखा है। इन पर कार्रवाई करने से विभाग ने हाथ पीछे खींच रखे हैं।