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धरती और स्वर्ग के निर्माता थे विश्वकर्मा
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शहर की इंदिरा कालोनी में भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर पूजन करते श्रद्धालु।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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धरती और स्वर्ग के निर्माता थे विश्वकर्मा
मुजफ्फरनगर। शिल्प कला एवं विज्ञान के प्रवर्तक भगवान विश्वकर्मा की जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋग्वेद में विश्वकर्मा जी को धरती और स्वर्ग का निर्माता कहा गया है।
संतोष विहार में वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर वेद मंत्रोच्चार से यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर आदिदेव विश्वकर्मा की जयंती मनाई गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वेदों में विश्वकर्मा की महिमा विद्यमान है। महर्षि अंगिरा द्वारा रचित अथर्ववेद के उपवेद अर्थवेद में सारे शिल्प ज्ञान-विज्ञान का वर्णन है। विश्वकर्मा ऋषि ने मानव कल्याण के लिए शिल्प विज्ञान का आविष्कार किया था। पदार्थों का संस्कार करने के कारण विश्वकर्मा संस्कृति के प्रथम आविष्कारक कहलाए। विश्वकर्मा समाज के युवा तकनीकी शिक्षा में आगे बढ़कर राष्ट्र सेवा करे। इंदिरा कॉलोनी स्थित विश्वकर्मा मंदिर धर्मशाला में यज्ञ में आहुतियां दी गई। यज्ञ ब्रह्म पंडित अरविंद रहे। रविदत्त धीमान ने कहा कि माघ शुक्ल त्रयोदशी को विश्वकर्मा जयंती पूरे भारत में मनाई जाती है। संसार की रचनात्मक भौतिक उपलब्धियां भगवान विश्वकर्मा की देन है। विश्वकर्मा मंदिर समिति के अध्यक्ष सरदार बलविंद्र सिंह ने कहा कि देश की कृषि एवं औद्योगिक क्रांति में शिल्प कला का योगदान श्रेष्ठ है। मास्टर निर्मल सिंह, सेवाराम धीमान ने भगवान विश्वकर्मा की महिमा बताई। कालूराम धीमान, विजेंद्र धीमान, राजेश, सतीश कुमार, जनार्धन विश्वकर्मा, आनंद, प्रवीण उर्फ बिट्टू, मास्टर, महेंद्र धीमान, सत्य प्रकाश, रमेश चंद, ओम प्रकाश धीमान, शुभम, सुभाष धीमान, महेंद्र दत्त आदि मौजूद रहे। संचालन नरेंद्र श्रृंगी ने किया।
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मुजफ्फरनगर। शिल्प कला एवं विज्ञान के प्रवर्तक भगवान विश्वकर्मा की जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋग्वेद में विश्वकर्मा जी को धरती और स्वर्ग का निर्माता कहा गया है।
संतोष विहार में वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर वेद मंत्रोच्चार से यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर आदिदेव विश्वकर्मा की जयंती मनाई गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वेदों में विश्वकर्मा की महिमा विद्यमान है। महर्षि अंगिरा द्वारा रचित अथर्ववेद के उपवेद अर्थवेद में सारे शिल्प ज्ञान-विज्ञान का वर्णन है। विश्वकर्मा ऋषि ने मानव कल्याण के लिए शिल्प विज्ञान का आविष्कार किया था। पदार्थों का संस्कार करने के कारण विश्वकर्मा संस्कृति के प्रथम आविष्कारक कहलाए। विश्वकर्मा समाज के युवा तकनीकी शिक्षा में आगे बढ़कर राष्ट्र सेवा करे। इंदिरा कॉलोनी स्थित विश्वकर्मा मंदिर धर्मशाला में यज्ञ में आहुतियां दी गई। यज्ञ ब्रह्म पंडित अरविंद रहे। रविदत्त धीमान ने कहा कि माघ शुक्ल त्रयोदशी को विश्वकर्मा जयंती पूरे भारत में मनाई जाती है। संसार की रचनात्मक भौतिक उपलब्धियां भगवान विश्वकर्मा की देन है। विश्वकर्मा मंदिर समिति के अध्यक्ष सरदार बलविंद्र सिंह ने कहा कि देश की कृषि एवं औद्योगिक क्रांति में शिल्प कला का योगदान श्रेष्ठ है। मास्टर निर्मल सिंह, सेवाराम धीमान ने भगवान विश्वकर्मा की महिमा बताई। कालूराम धीमान, विजेंद्र धीमान, राजेश, सतीश कुमार, जनार्धन विश्वकर्मा, आनंद, प्रवीण उर्फ बिट्टू, मास्टर, महेंद्र धीमान, सत्य प्रकाश, रमेश चंद, ओम प्रकाश धीमान, शुभम, सुभाष धीमान, महेंद्र दत्त आदि मौजूद रहे। संचालन नरेंद्र श्रृंगी ने किया।
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