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भाभी की हत्या में आरोपी दो ननदों को उम्रकैद
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मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के हुसैनपुर गांव में दहेज के लिए विवाहिता को जलाकर मार डालने के मामले में आरोपी दो ननदों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि चार देवर और एक देवरानी को 10-10 साल की सजा सुनाई गई। चर्चित प्रकरण की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट-एक के न्यायाधीश सुमित पंवार ने की।
डीजीसी राजीव शर्मा और एडीजीसी वीरेंद्र नागर ने बताया कि हुसैनपुर में दहेज की मांग पूरी ने होने पर महिला गुलिस्तां को जिंदा जला दिया गया था। गंभीर हालत में झुलस जाने के कारण परिजन मेरठ अस्पताल में लेकर पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई थी। मृत्यु से पहले अपने बयान में आरोपियों के नाम बताए थे, जबकि अपने शौहर को यह बताते हुए नामजद नहीं किया था कि उसने उसे बचाने की कोशिश की थी।
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट-एक के न्यायाधीश सुमित पंवार ने की। आरोपी सायरा व सन्नी पुत्री शरीफ को आजीवन कारावास और चार-चार हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
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जबकि मृतका के देवर रिजवान, महताब, नौशाद ,अहसान और देवरानी ताहिरा को 10-10 वर्ष की सजा और चार-चार रुपये का जुर्माना किया गया है।
गवाह हुए पक्षद्रोही, बयान पर हुई सजा
आरोपियों में मृतक की सास की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। इसके अलावा मौके के सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए, लेकिन पीड़िता के मृत्यु पूर्व बयानों को प्रमुख आधार माना गया और परिवार के सात सदस्यों को सजा सुनाई गई।
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डीजीसी राजीव शर्मा और एडीजीसी वीरेंद्र नागर ने बताया कि हुसैनपुर में दहेज की मांग पूरी ने होने पर महिला गुलिस्तां को जिंदा जला दिया गया था। गंभीर हालत में झुलस जाने के कारण परिजन मेरठ अस्पताल में लेकर पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई थी। मृत्यु से पहले अपने बयान में आरोपियों के नाम बताए थे, जबकि अपने शौहर को यह बताते हुए नामजद नहीं किया था कि उसने उसे बचाने की कोशिश की थी।
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मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट-एक के न्यायाधीश सुमित पंवार ने की। आरोपी सायरा व सन्नी पुत्री शरीफ को आजीवन कारावास और चार-चार हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
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जबकि मृतका के देवर रिजवान, महताब, नौशाद ,अहसान और देवरानी ताहिरा को 10-10 वर्ष की सजा और चार-चार रुपये का जुर्माना किया गया है।
गवाह हुए पक्षद्रोही, बयान पर हुई सजा
आरोपियों में मृतक की सास की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। इसके अलावा मौके के सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए, लेकिन पीड़िता के मृत्यु पूर्व बयानों को प्रमुख आधार माना गया और परिवार के सात सदस्यों को सजा सुनाई गई।