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अभिशाप नहीं बीमारी है कुष्ठ

Thu, 30 Jan 2020 12:10 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2020 12:10 AM IST
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Leprosy is not a disease, but a curse
मुजफ्फरनगर। कुष्ठ कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक बीमारी है और इसका उपचार संभव है। बेहतर उपचार मिलने लगा तो कुष्ठ रोगियों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। वर्तमान में जिले में 46 कुष्ठ रोगी अपने घरों पर रहकर ही उपचार करा रहे हैं।
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पहले कुष्ठ रोग पीड़ितों को उनके घर एवं समाज के लोग अपने बीच रखना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जिले में 46 कुष्ठ रोगी अपनों के ही बीच रह रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में कुष्ठ उन्मूलन का कार्य देख रहे प्रदीप कुमार शर्मा बताते हैं कि सन 1991-92 में जिले में लगभग 300 कुष्ठ रोगी थे। पांच साल पहले तक इनकी संख्या 120 तक आ गई थी और अब मात्र 46 हैं। सरकार ने दस हजार आबादी पर एक कुष्ठ रोगी होने का लक्ष्य निर्धारित कर रहा है, लेकिन जिले में यह आंकड़ा मात्र 0.015 का है।
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छह माह या एक साल तक चलता है उपचार
कुष्ठ रोग का पुख्ता इलाज है। मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) से छह माह या एक साल का उपचार होता है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर पांच निशान या एक नस प्रभावित है तो उसका छह माह तथा इससे ज्यादा असर होने पर एक साल का उपचार चलता है। वर्तमान में 14 केस छह माह तथा 29 केस एक साल उपचार वाले चल रहे हैं।
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मिलती है 2500 रुपये पेंशन
कुष्ठ रोगियों को 2500 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिलती है। उपचार के लिए दवा नि:शुल्क दी जाती है। कुष्ठ आश्रम में रहने वाले रोगियों को साल में एक बार जूते मिलते हैं।

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इस तरह फैलता है कुष्ठ रोग
कुष्ठ रोग जीवाणु माइक्रो वैक्टीरिया लैप्री द्वारा फैलता है। यह 98 प्रतिशत संक्रमित रोगी के खांसने व छींकने से निकलने वाले कीटाणुओं के नए व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करने तथा दो प्रतिशत संक्रमित रोगी के साथ लंबे समय तक त्वचा संपर्क में रहने से फैलता है।
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कुष्ठ रोग के लक्षण
- शरीर पर हल्के रंग, लाल रंग अथवा पूर्ण रूप से सुन्न कोई दाग धब्बा या चकत्ता।
- कोहनी के पीछे अथवा घुटने के पीछे वाली नस का मोटा होना या इसके साथ दर्द होना।
- हाथों अथवा पैरों की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी महसूस होना।
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