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खांड और राब के अच्छे दाम नहीं मिलने से घाटे में खांडसारी उद्योग

Sat, 21 Nov 2020 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Nov 2020 11:48 PM IST
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Khandasari industry in losses due to lack of good prices
गांव सिकंदरपुर में क्रेशर में तैयार राब। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
अच्छे दाम नहीं मिलने से घाटे में खांडसारी उद्योग
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मुजफ्फरनगर। जिले में खांडसारी उद्योग रफ्तार पकड़ने से पहले ही दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। बाजार में राब और खांड के अच्छे दाम नहीं मिलने से खांडसारी उद्योग चलाने वाले घाटे में हैं। यही कारण है कि 105 लाइसेंस होने के बाद भी जिले में केवल 24 उद्योग ही चल पाए। खांडसारी उद्योग यहां 30 साल से बंद था। इस कारोबार से जुड़े लोगों को उम्मीद जगी थी कि खांडसारी उद्योग से फायदा होगा, लेकिन घाटे ने उद्योग के दम निकाल दिए हैं।
जिले में गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ने से चीनी और गुड़ उद्योग के साथ खांडसारी उद्योग में भी जान आने की उम्मीद बढ़ी थी। 30 साल पहले खांडसारी उद्योग अपने चरम पर था और मिलों से ज्यादा गन्ना क्रशर पर जाता था। सरकार की पॉलिसी के चलते खांडसारी उद्योग पूरी तरह बर्बाद हो गया था। जो लोग इस उद्योग से जुड़े थे वे बड़े घाटे में चले गए थे। किसान पूरी तरह चीनी मिलों पर निर्भर हो गया था। केवल दस प्रतिशत गन्ना ही कोल्हुओं पर जाने लगा। तीन दशक बाद सरकार ने खांडसारी उद्योग को बढ़ावा देने की बात की। जिले में 72 लाइसेंस पुराने चले आ रहे हैं और 33 नए लाइसेंस लिए गए हैं। इनमें से केवल 24 ही अपने क्रशर चला रहे हैं। आठ पुराने लाइसेंस के और 16 नए लाइसेंस लेने वाले इसमें शामिल हैं।
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सत्र के शुरूआत में गन्ना मंदा मिलने से क्रशर संचालकों को कुछ लाभ रहा, लेकिन चीनी मिलों के चलते ही गन्ने के दाम बढ़ गए। बाजार में खांड का मूल्य 2200 से 2400 तक क्विंटल पर आ गया। ऐसे हालात में अधिकतम क्रशर चलाने वाले घाटे में पहुंच गए हैं।
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रतनपुरी क्षेत्र में दो क्रशरों के लाइसेंस जारी हुए थे, लेकिन अभी तक एक ही क्रशर पर पेराई आरंभ हुई है। जबकि दूसरे क्रशर का निर्माण अंतिम चरण में है। सिकंदरपुर निवासी क्रशर मालिक महेंद्र सैनी ने बताया कि उनके क्रशर पर केवल राब बनाई जाती है। जो खतौली के व्यापारियों के माध्यम से गुजरात, राजस्थान, बंगाल आदि राज्यों को सप्लाई की जाती है। फिलहाल क्रशर में उन्हें काफी नुकसान है। बाजार में राब का मूल्य 2250 रुपये प्रति क्विंटल है। गन्ना यहां 250 से कम नहीं मिल पा रहा है। बिजली का एक माह का बिल करीब दो लाख रुपये आता है। क्रशर बंद होने की स्थिति में भी 50 हजार रुपये माह का बिजली का बिल देना ही पड़ता है। प्रतिदिन 20 हजार का नुकसान आ रहा है। नुकसान के चलते कुछ दिन के लिए क्रशर बंद करना पड़ा है।
छपार क्षेत्र के गांव परेई में पश्चिम का सबसे बड़ा गन्ना क्रशर है। पांच हजार क्विंटल गन्ने की क्षमता वाले इस क्रशर में दो हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हो पा रही है। क्रशर के डायरेक्टर हरेंद्र सिंह ने बताया की अभी खांड नहीं बना रहे हैं। सिर्फ राब बना कर बंगाल, गुजरात आदि प्रदेशों में बेची जा रही है। उन्हें राब के दाम 2450 रुपये तक मिल रहे हैं। अभी तक वह घाटे में नहीं है, लेकिन अधिक मुनाफा नहीं है। जिले में अन्य स्थानों पर क्रेशर संचालकों ने वर्तमान में घाटे की बात कही है।
अब तक बन चुकी 11 हजार क्विंटल राब
मुजफ्फरनगर। जिले के क्रशर अब तक दो लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुके हैं। इन क्रशर में 11 हजार क्विंटल राब, 200 क्विंटल खांड, नौ हजार क्विंटल गुड़ बना है। सहायक चीनी आयुक्त कार्यालय के अतुल कुमार ने बताया कि क्रशर अपनी पूरी पेराई क्षमता पर नहीं चल पा रहे हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित हो
मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर सोसायटी के अशोक बालियान ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर खांड और गुड़ का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग की है। यदि क्रशर संचालकों के उत्पाद के अच्छे दाम नहीं मिलेंगे तो इस उद्योग को हम खड़ा नहीं कर पाएंगे।
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