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Muzaffarnagar News: साठ साल से एक नाव में डांवाडोल खादर की जिंदगी
Mon, 05 Aug 2024 12:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 05 Aug 2024 12:16 AM IST
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पुरकाजी। सोलानी नदी के खादर में बसें 21 गांव के लोगों की जिंदगी पिछले 60 साल से एक नांव में डांवाडोल है। रतनपुरी और रामनगर के बीच 100 मीटर लोहे का पुल बनवाने की जद्दोजहद में लोग फंसे हैं। उत्तराखंड में बरसात होते ही यहां लोगों की धड़कनें बढ़ जाती है। शिवालिक की पहाड़ियों से आने वाला पाने से राहत के नाम पर प्रशासन सोलानी नदी में नाव उतार देता है।
खादर क्षेत्र में सोलानी नदी बरसात के दिनों में उफान पर आ जाती है। गांव शेरपुर, बढ़ीवाला, भैंसली वाला, रतनपुरी, रामनगर, रजगल्लापुर, शेरपुर नगला, चांचक, धूम्मनपुरी, भदोला, पांचली, आयक़ी, चमरावाला, जिंदा वाला गांव के रास्तों और जंगलों में भर जाता है। किसानों की फसलें बर्बाद हो जाने के साथ ही ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो जाता है।
रतनपुरी और रामनगर के बीच पुल बन जाए तो ग्रामीण सीधे बढ़ीवाला पहुंच जाएंगे। नदी में पानी आते ही ग्रामीणों को 14 किमी का चक्कर लगाकर आयकी होते हुए बढ़ीवाला पहुंचना पड़ता है। राजू प्रजापति, साधु राम, गुलशन कुमार, यादराम राम प्रजापति, बिजेंद्र सिंह, रामकुमार का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी में करीब 16 फीट भर जाता है। प्रशासन पानी बढ़ने पर नाव लगा देता है। किसानों का खेत पर जाना मुश्किल हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
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खादर क्षेत्र में सोलानी नदी बरसात के दिनों में उफान पर आ जाती है। गांव शेरपुर, बढ़ीवाला, भैंसली वाला, रतनपुरी, रामनगर, रजगल्लापुर, शेरपुर नगला, चांचक, धूम्मनपुरी, भदोला, पांचली, आयक़ी, चमरावाला, जिंदा वाला गांव के रास्तों और जंगलों में भर जाता है। किसानों की फसलें बर्बाद हो जाने के साथ ही ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो जाता है।
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रतनपुरी और रामनगर के बीच पुल बन जाए तो ग्रामीण सीधे बढ़ीवाला पहुंच जाएंगे। नदी में पानी आते ही ग्रामीणों को 14 किमी का चक्कर लगाकर आयकी होते हुए बढ़ीवाला पहुंचना पड़ता है। राजू प्रजापति, साधु राम, गुलशन कुमार, यादराम राम प्रजापति, बिजेंद्र सिंह, रामकुमार का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी में करीब 16 फीट भर जाता है। प्रशासन पानी बढ़ने पर नाव लगा देता है। किसानों का खेत पर जाना मुश्किल हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
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