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रात के अंधेरे में लड़ी थी कारगिल की जंग
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कारगिल युद्ध लड़ चुके पूर्व सैनिक दिनेश कुमार। साथ में पत्नी गीता एवं बेटा विशांत।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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रात के अंधेरे में लड़ी थी कारगिल की जंग
मुजफ्फरनगर। कारगिल युद्ध में राजपूताना राइफल्स की वीरता बेमिसाल रही है। दिन में रेकी होती थी और रात में जंग, तोलोलिंग पर दुश्मनों के दांत खट्टे कर मां भारती के वीरों ने तिरंगा फहरा दिया था। कारगिल युद्ध के साक्षी फौजी दिनेश कुमार आज भी देशभक्ति के जज्बे से भरे हैं। 11 जून, 1999 को यूनिट के बिग्रेड कमांडर एम.बी. रविंद्रचंद्रन के नेतृत्व में दो-राजपूताना राइफल्स को द्रास सेक्टर में तोलोलिंग पर चढ़ाई का आदेश मिला था। उस दौरान हमारी बटालियन कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थी। दिन में प्लानिंग बनती थी और रात के अंधेरे में दुश्मनों के ठिकानों पर हमला होता था। कंधों पर शस्त्र तथा अन्य सामानों के साथ रस्सियों के सहारे पहाड़ की चढ़ाई करते थे। रोशनी देखते ही दुश्मन फायर करता था। बोफोर्स और आरटलरी गन से गोले बरसा कर हमें कवरिंग दी जाती थी। 12 जून की रात कंपनी कमांडर विवेक गुप्ता की अगुवाई में सेक्शन ने चढ़ाई प्रारंभ की, जिसमें कुल 12 सैनिक थे। लांस नायक वचन सिंह निडरता और बहादुरी से एमएलजी ऑटोमैटिक के साथ मोर्चा लिए थे। एक साथ 30 गोलियां दाग रहे थे। घबराए पाक दुश्मन ने स्नाइपर रायफल से अटैक किए, जिसमें गोली उनके सिर में लगी और वे शहीद हो गए। पूरी रात लड़ाई चलती रही, जिसमें नायक चमन सिंह, लांस नायक सुरेंद्र सिंह व सत्यपाल सिंह, यशवीर सिंह जैसे वीरों को हमने खो दिया था।
बघरा ब्लाक के गांव मुकंदपुर के किसान मेंबर सिंह और मोहरकौर के घर जन्में दिनेश कुमार ने कल्याणकारी इंटर कालेज से दसवीं तथा लालूखेड़ी के किसान इंटर कालेज से बाहरवीं की। वर्ष 1988 में वे मेरठ में हुई भर्ती में चयनित हुए। शहीद वचन सिंह और उनकी भर्ती एक साथ हुई थी। दो साल बाद उनकी शादी शामली के गांव लांक निवासी मास्टर महिपाल सिंह की बेटी गीता रानी से हो गई। परिवार में एक बेटा विशांत कुमार है, जो बीटेक कर गुरुग्राम में जॉब करता है। वर्ष 2005 में सेना से रिटायर्ड हो चुके दिनेश शहर में आदर्श कालोनी के करीब सरस्वती विहार में रहते है। रोहना की एसबीआई शाखा में सुरक्षा कर्मी है। कारगिल युद्ध का पराक्रम उनकी रगों में बहता है। कहते है कि तोलोलिंग के अलावा त्रिटिप्पल चोटी को भी फतेह किया था। देहरादून के मेजर विवेक गुप्ता ने भी प्राणों की आहुति दे दी थी। राजपूताना राइफल्स-टू के 18 जवान, दो जेसीओ तथा चार अफसर इस जंग में मातृभूमि पर बलिदान हो गए थे। जिंदगी की अंतिम सांस तक साथियों की शहादत भूल नहीं पाऊंगा।
सीने हो गए छलनी, मगर पीछे नहीं हटे कदम
मुजफ्फरनगर। राजपूताना राइफल्स-टू की वीरता और बलिदान में नायक ऋषिपाल सिंह का देशप्रेम अमिट है। उनका जन्म शाहपुर क्षेत्र के गांव कुटबी निवासी किसान मनसुख के घर हुआ। बचपन से आर्मी में जाने का जज्बा था। कारगिल युद्ध की बातें उनके जेहन में ज्यों की त्यों बसी है। बताते हैं कि 18 हजार फीट की ऊंचाई पर पहाड़ के दुर्गम रास्तों से चोटी पर बनी दुश्मन की बंकर तक पहुंचना कठिनाइयों भरा था। सूखे खाद्य पदार्थों से जंग में भूख मिटाई। उनकी बटालियन में नए आए लांस नायक वचन सिंह से उन्होंने अपनी बहन कामेश बाला का विवाह किया था। उनकी शहादत को याद कर भावुक हो जाते हैं। युद्ध में बहनोई वचन सिंह की यूनिट सबसे आगे थी। सीने गोलियों से छलनी हो गए, मगर भारत के सैनिकों ने कदम पीछे नहीं हटाए। उन्होंने बेटों डिंपल और चंचल को सेना में भेजकर देशभक्ति का समर्पण दिखाया। वर्ष 2000 में सेवानिवृत्त होकर कुटबी लौट आए। फिलहाल ऋषिपाल सिंह शहर के गांधी कालोनी एसबीआई में सुरक्षाकर्मी है। वचन सिंह कालोनी में उनका आशियाना है।
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मुजफ्फरनगर। कारगिल युद्ध में राजपूताना राइफल्स की वीरता बेमिसाल रही है। दिन में रेकी होती थी और रात में जंग, तोलोलिंग पर दुश्मनों के दांत खट्टे कर मां भारती के वीरों ने तिरंगा फहरा दिया था। कारगिल युद्ध के साक्षी फौजी दिनेश कुमार आज भी देशभक्ति के जज्बे से भरे हैं। 11 जून, 1999 को यूनिट के बिग्रेड कमांडर एम.बी. रविंद्रचंद्रन के नेतृत्व में दो-राजपूताना राइफल्स को द्रास सेक्टर में तोलोलिंग पर चढ़ाई का आदेश मिला था। उस दौरान हमारी बटालियन कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थी। दिन में प्लानिंग बनती थी और रात के अंधेरे में दुश्मनों के ठिकानों पर हमला होता था। कंधों पर शस्त्र तथा अन्य सामानों के साथ रस्सियों के सहारे पहाड़ की चढ़ाई करते थे। रोशनी देखते ही दुश्मन फायर करता था। बोफोर्स और आरटलरी गन से गोले बरसा कर हमें कवरिंग दी जाती थी। 12 जून की रात कंपनी कमांडर विवेक गुप्ता की अगुवाई में सेक्शन ने चढ़ाई प्रारंभ की, जिसमें कुल 12 सैनिक थे। लांस नायक वचन सिंह निडरता और बहादुरी से एमएलजी ऑटोमैटिक के साथ मोर्चा लिए थे। एक साथ 30 गोलियां दाग रहे थे। घबराए पाक दुश्मन ने स्नाइपर रायफल से अटैक किए, जिसमें गोली उनके सिर में लगी और वे शहीद हो गए। पूरी रात लड़ाई चलती रही, जिसमें नायक चमन सिंह, लांस नायक सुरेंद्र सिंह व सत्यपाल सिंह, यशवीर सिंह जैसे वीरों को हमने खो दिया था।
बघरा ब्लाक के गांव मुकंदपुर के किसान मेंबर सिंह और मोहरकौर के घर जन्में दिनेश कुमार ने कल्याणकारी इंटर कालेज से दसवीं तथा लालूखेड़ी के किसान इंटर कालेज से बाहरवीं की। वर्ष 1988 में वे मेरठ में हुई भर्ती में चयनित हुए। शहीद वचन सिंह और उनकी भर्ती एक साथ हुई थी। दो साल बाद उनकी शादी शामली के गांव लांक निवासी मास्टर महिपाल सिंह की बेटी गीता रानी से हो गई। परिवार में एक बेटा विशांत कुमार है, जो बीटेक कर गुरुग्राम में जॉब करता है। वर्ष 2005 में सेना से रिटायर्ड हो चुके दिनेश शहर में आदर्श कालोनी के करीब सरस्वती विहार में रहते है। रोहना की एसबीआई शाखा में सुरक्षा कर्मी है। कारगिल युद्ध का पराक्रम उनकी रगों में बहता है। कहते है कि तोलोलिंग के अलावा त्रिटिप्पल चोटी को भी फतेह किया था। देहरादून के मेजर विवेक गुप्ता ने भी प्राणों की आहुति दे दी थी। राजपूताना राइफल्स-टू के 18 जवान, दो जेसीओ तथा चार अफसर इस जंग में मातृभूमि पर बलिदान हो गए थे। जिंदगी की अंतिम सांस तक साथियों की शहादत भूल नहीं पाऊंगा।
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सीने हो गए छलनी, मगर पीछे नहीं हटे कदम
मुजफ्फरनगर। राजपूताना राइफल्स-टू की वीरता और बलिदान में नायक ऋषिपाल सिंह का देशप्रेम अमिट है। उनका जन्म शाहपुर क्षेत्र के गांव कुटबी निवासी किसान मनसुख के घर हुआ। बचपन से आर्मी में जाने का जज्बा था। कारगिल युद्ध की बातें उनके जेहन में ज्यों की त्यों बसी है। बताते हैं कि 18 हजार फीट की ऊंचाई पर पहाड़ के दुर्गम रास्तों से चोटी पर बनी दुश्मन की बंकर तक पहुंचना कठिनाइयों भरा था। सूखे खाद्य पदार्थों से जंग में भूख मिटाई। उनकी बटालियन में नए आए लांस नायक वचन सिंह से उन्होंने अपनी बहन कामेश बाला का विवाह किया था। उनकी शहादत को याद कर भावुक हो जाते हैं। युद्ध में बहनोई वचन सिंह की यूनिट सबसे आगे थी। सीने गोलियों से छलनी हो गए, मगर भारत के सैनिकों ने कदम पीछे नहीं हटाए। उन्होंने बेटों डिंपल और चंचल को सेना में भेजकर देशभक्ति का समर्पण दिखाया। वर्ष 2000 में सेवानिवृत्त होकर कुटबी लौट आए। फिलहाल ऋषिपाल सिंह शहर के गांधी कालोनी एसबीआई में सुरक्षाकर्मी है। वचन सिंह कालोनी में उनका आशियाना है।
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