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मुद्दा : आवारा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए दिन-रात पहरेदारी
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मुजफ्फरनगर। मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ चुनावी मुद्दे और आमजन की परेशानियां भी रफ्तार पकड़ रही हैं। खेतों में फसलों को चट कर रहे आवारा पशुओं से किसान सबसे अधिक परेशान हैं। किसानों का कहना है कि दिन-रात खेतों में बैठकर पहरेदारी करनी पड़ रही है। रात की ठंड में भी किसान अपने घर नहीं सो सकता। फसलों के दाम की लड़ाई है, लेकिन फसलों की पैदावार और सुरक्षा ही बड़ा मुद्दा बन गई है। आवारा पशु इन दिनों गेहूं की फसल को चट कर रहे हैं, जिससे किसान परेशान हैं।
गेहूं की फसल बर्बाद कर रहे किसान
छपार निवासी श्रवण कुमार त्यागी का कहना है कि गोवंशीय पशुओं से किसान परेशान हैं। पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। अब दलहनी फसलें ही पैदा नहीं कर सकते। गेहूं की फसल भी बर्बाद कर दी है। सरकार उनका कोई ओर इंतजाम करें या किसान के नुकसान का मुआवजा दें।
बेसहारा पशुओं का इंतजाम जरूरी
नंगला कबीर निवासी किसान अंशुल पंवार मोनू ने कहा कि गांव में आवारा पशुओं के कारण फसल बर्बाद हो रही है। पशु किसानों पर हमला कर रहे हैं। सरकार ने जो इंतजाम किए वह पर्याप्त नहीं है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। इसके लिए कोई योजना बनाई जानी चाहिए।
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किसानों पर हमला कर रहे हैं पशु
शाहपुर क्षेत्र के गांव रसूलपुर जाटान के किसान प्रदीप आर्य का कहना है कि वर्तमान में किसानों के सामने आवारा पशुओं की सबसे बड़ी समस्या है। आवारा पशु जहां एक और किसानों की फसल को बर्बाद कर रहे हैं, वहीं किसानों पर हमला भी करते हैं, जिससे किसान घायल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आवारा पशुओं को लेकर कोई ठोस योजना बनाकर किसानों को इनसे निजात दिलाएं।
पहरा देने को मजबूर हो गए किसान
रतनपुरी निवासी प्रगतिशील किसान सुभाषचंद सोम का कहना है कि पशुओं ने किसानों की नींद तक हराम कर रखी है। किसानों को रात-रात भर अपने खेतों पर पहरे देकर अपनी गेहूं और सरसों की फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। किसान एसडीएम से भी उक्त आवारा पशुओं से निजात दिलाने की गुहार लगा चुके हैं। सरकार इन आवारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए प्रत्येक गांव में गोशाला का निर्माण कराए और गोवंश पालन के लिए प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था करें।
किसान को दिन और रात चैन नहीं
फुगाना गांव के किसान चौधरी मुकेश मलिक का कहना है कि, सड़क व खेतों में घूम रहे आवारा पशुओं के कारण खेती बर्बाद हो रही है। सरसों व गेहूं की फसल को बहुत नुकसान हो रहा है। किसानों को रात दिन अपने खेतों में पहरा देना पड़ता है। इतना पहरा तो बदमाशों का भी नहीं देना पड़ता था। जितना पशुओं का देना पड़ रहा है। सरकार किसानों की इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। किसानों के सामने आवारा पशुओं की समस्या गंभीर है, जिसका समाधान करने में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
धरातल पर हो किसानों की समस्या का समाधान
भोपा के गांव बेहड़ा थ्रू निवासी किसान चंद्रवीर राठी का कहना है कि आवारा पशु काफी संख्या बढ़ रहे हैं, जिस कारण हरी-भरी फसलों को तहस-नहस कर किसान को बड़ी हानि पहुंचा रहे हैं। किसानों को तो पहले ही उनकी फसलों के वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं। आवारा पशु जहां किसानों पर हमला करते हैं, वहीं उनके कारण सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ रही है। सरकारें भाषणों में तो किसानों की हित की बात करती है, लेकिन धरातल पर कुछ और नजर आता है।
आवारा पशुओं से किसानों को मिले निजात
जानसठ के गांव वाजिदपुर कवाली निवासी किसान अंकुर काकरान का कहना है कि आवारा पशु किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। आवारा पशुओं ने कई किसानों को हमला करके घायल भी किया है। इन आवारा पशुओं से किसान परेशान हैं।
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गेहूं की फसल बर्बाद कर रहे किसान
छपार निवासी श्रवण कुमार त्यागी का कहना है कि गोवंशीय पशुओं से किसान परेशान हैं। पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। अब दलहनी फसलें ही पैदा नहीं कर सकते। गेहूं की फसल भी बर्बाद कर दी है। सरकार उनका कोई ओर इंतजाम करें या किसान के नुकसान का मुआवजा दें।
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बेसहारा पशुओं का इंतजाम जरूरी
नंगला कबीर निवासी किसान अंशुल पंवार मोनू ने कहा कि गांव में आवारा पशुओं के कारण फसल बर्बाद हो रही है। पशु किसानों पर हमला कर रहे हैं। सरकार ने जो इंतजाम किए वह पर्याप्त नहीं है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। इसके लिए कोई योजना बनाई जानी चाहिए।
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किसानों पर हमला कर रहे हैं पशु
शाहपुर क्षेत्र के गांव रसूलपुर जाटान के किसान प्रदीप आर्य का कहना है कि वर्तमान में किसानों के सामने आवारा पशुओं की सबसे बड़ी समस्या है। आवारा पशु जहां एक और किसानों की फसल को बर्बाद कर रहे हैं, वहीं किसानों पर हमला भी करते हैं, जिससे किसान घायल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आवारा पशुओं को लेकर कोई ठोस योजना बनाकर किसानों को इनसे निजात दिलाएं।
पहरा देने को मजबूर हो गए किसान
रतनपुरी निवासी प्रगतिशील किसान सुभाषचंद सोम का कहना है कि पशुओं ने किसानों की नींद तक हराम कर रखी है। किसानों को रात-रात भर अपने खेतों पर पहरे देकर अपनी गेहूं और सरसों की फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। किसान एसडीएम से भी उक्त आवारा पशुओं से निजात दिलाने की गुहार लगा चुके हैं। सरकार इन आवारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए प्रत्येक गांव में गोशाला का निर्माण कराए और गोवंश पालन के लिए प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था करें।
किसान को दिन और रात चैन नहीं
फुगाना गांव के किसान चौधरी मुकेश मलिक का कहना है कि, सड़क व खेतों में घूम रहे आवारा पशुओं के कारण खेती बर्बाद हो रही है। सरसों व गेहूं की फसल को बहुत नुकसान हो रहा है। किसानों को रात दिन अपने खेतों में पहरा देना पड़ता है। इतना पहरा तो बदमाशों का भी नहीं देना पड़ता था। जितना पशुओं का देना पड़ रहा है। सरकार किसानों की इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। किसानों के सामने आवारा पशुओं की समस्या गंभीर है, जिसका समाधान करने में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
धरातल पर हो किसानों की समस्या का समाधान
भोपा के गांव बेहड़ा थ्रू निवासी किसान चंद्रवीर राठी का कहना है कि आवारा पशु काफी संख्या बढ़ रहे हैं, जिस कारण हरी-भरी फसलों को तहस-नहस कर किसान को बड़ी हानि पहुंचा रहे हैं। किसानों को तो पहले ही उनकी फसलों के वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं। आवारा पशु जहां किसानों पर हमला करते हैं, वहीं उनके कारण सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ रही है। सरकारें भाषणों में तो किसानों की हित की बात करती है, लेकिन धरातल पर कुछ और नजर आता है।
आवारा पशुओं से किसानों को मिले निजात
जानसठ के गांव वाजिदपुर कवाली निवासी किसान अंकुर काकरान का कहना है कि आवारा पशु किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। आवारा पशुओं ने कई किसानों को हमला करके घायल भी किया है। इन आवारा पशुओं से किसान परेशान हैं।