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इस्लाम ने हमेशा अमन का संदेश दिया : फारुकी
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देवबंद (सहारनपुर)। विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना अलीम फारुकी ने इस्लामी तालीम पर रोशनी डालते हुए कहा कि इस्लाम मजहब ने हमेशा अमन की तालीम, सही रास्तों पर चलने और दूसरों की मदद करने का संदेश दिया है। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वह अच्छे आचरण और व्यवहार के साथ इसका प्रचार प्रसार करें।
ईदगाह मार्ग स्थित शेखुल हिंद हाल में इस्लामिक एकेडमी एंड रिसर्च सेंटर की ओर से आयोजित तहाफ्फुज नामूस कांफ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मौलाना अलीम फारुकी ने मुसलमानों से पैगंबर मोहम्मद साहब और सहाबा (मोहम्मद साहब को देखने वाले) के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहाबा हमारे व नबी-ए-करीम के बीच पुल की तरह है। इसलिए हमें मोहम्मद साहब और उनके सहाबा की कद्र करनी चाहिए। उनके खिलाफ एक शब्द भी कहना सरासर हराम है। प्रचारक मौलाना इरफान कासमी ने कहा कि सभी मुसलमानों को चाहिए कि वह दीनी तालीम पर अमल करें और उसका प्रचार प्रसार करें। ताकि इस्लाम की सही तस्वीर को दुनिया के सामने लाया जा सके। अध्यक्षता कर रहे दारुल उलूम के उस्ताद मुफ्ती मोहम्मद राशिद आजमी ने कहा कि इस्लामी तालीम का सबसे बड़ा इदारा दारुल उलूम 150 वर्षों से नबी-ए-करीम और सहाबा की दी हुई तालीम को फैलाने का काम कर रहा है। कार्यक्रम में 15 दिनों से चल रही इस्लामिक क्विज के परिणामों की घोषणा भी की गई। जिसमें दारुल उलूम के छात्र मौलवी मो. मोईन ने प्रथम, जबकि आकिल, शाहिद, नदीम, मसरूर आदि छात्र द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहे। सभी छात्रों को नकद धनराशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई। संचालन मौलाना मरगूबुर्रहमान ने किया। इस मौके पर कारी नासिरुद्दीन, मौलाना शमशीर, अख्तर कासमी, सलीम किदवई, अमीनुलहक, अब्दुल्ला समेत भारी संख्या में मदरसा छात्र मौजूद रहे।
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ईदगाह मार्ग स्थित शेखुल हिंद हाल में इस्लामिक एकेडमी एंड रिसर्च सेंटर की ओर से आयोजित तहाफ्फुज नामूस कांफ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मौलाना अलीम फारुकी ने मुसलमानों से पैगंबर मोहम्मद साहब और सहाबा (मोहम्मद साहब को देखने वाले) के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहाबा हमारे व नबी-ए-करीम के बीच पुल की तरह है। इसलिए हमें मोहम्मद साहब और उनके सहाबा की कद्र करनी चाहिए। उनके खिलाफ एक शब्द भी कहना सरासर हराम है। प्रचारक मौलाना इरफान कासमी ने कहा कि सभी मुसलमानों को चाहिए कि वह दीनी तालीम पर अमल करें और उसका प्रचार प्रसार करें। ताकि इस्लाम की सही तस्वीर को दुनिया के सामने लाया जा सके। अध्यक्षता कर रहे दारुल उलूम के उस्ताद मुफ्ती मोहम्मद राशिद आजमी ने कहा कि इस्लामी तालीम का सबसे बड़ा इदारा दारुल उलूम 150 वर्षों से नबी-ए-करीम और सहाबा की दी हुई तालीम को फैलाने का काम कर रहा है। कार्यक्रम में 15 दिनों से चल रही इस्लामिक क्विज के परिणामों की घोषणा भी की गई। जिसमें दारुल उलूम के छात्र मौलवी मो. मोईन ने प्रथम, जबकि आकिल, शाहिद, नदीम, मसरूर आदि छात्र द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहे। सभी छात्रों को नकद धनराशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई। संचालन मौलाना मरगूबुर्रहमान ने किया। इस मौके पर कारी नासिरुद्दीन, मौलाना शमशीर, अख्तर कासमी, सलीम किदवई, अमीनुलहक, अब्दुल्ला समेत भारी संख्या में मदरसा छात्र मौजूद रहे।

शेखुल हिंद हाल में इस्लामिक कांफ्रेंस में बोलते दारूल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना अलीम फ- फोटो : DEVBAND
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