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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   International De-addiction Day: How to get rid of drugs in just one thousand rupees

मात्र एक हजार रुपये में कैसे होगी नशा मुक्ति

Fri, 25 Jun 2021 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jun 2021 11:54 PM IST
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International De-addiction Day: How to get rid of drugs in just one thousand rupees
मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार लोगों को नशे की लत से दूर रखने के लिए कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल भर में इस जिले के मद्य निषेद्य विभाग को सिर्फ एक हजार रुपये खर्च के लिए दिए गए। इसके विपरीत जिले से एक साल में शासन को नशे के कारोबार से 402.90 करोड़ का राजस्व मिला। पिछले साल कोरोना के चलते लॉकडाउन हटाने के बाद सबसे पहले खुलीं शराब की दुकानों पर लगी लंबी-लंबी कतारों से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है कि सरकार भी नशे के कारोबार से होने वाली आमदनी से इतनी आसानी से मुंह मोड़ने वाली नहीं है।
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नशे के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया जाता है। लोगों को नशा मुक्ति के लिए जागरूक करने के लिए बकायदा मद्य निषेध विभाग का गठन किया गया है, लेकिन इस विभाग के पास अपना न तो कोई दफ्तर है और न ही कोई स्टाफ।
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एक ही अफसर को पांच-पांच जिले का प्रभार सौंप दिया गया है लेकिन आने-जाने के लिए उनके पास कोई सरकारी वाहन तक नहीं है। विभाग को नशा मुक्ति के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए जिला स्तर पर गठित एक समिति फंड मुहैया कराती है। इस समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी और कोषाध्यक्ष जिला आबकारी अधिकारी होते हैं। नशे के प्रति लोगों को जागरूक करने को मद्य निषेध विभाग को प्रतिवर्ष मात्र एक हजार रुपये की राशि अवमुक्त की जाती है, वो भी डीएम की अनुशंसा से।
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वहीं जनपद मुजफ्फरनगर को वर्ष 2020-2021 में नशे के कारोबार से राजस्व प्राप्ति के लिए 478.02 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला था, जिसके सापेक्ष, आबकारी विभाग को 402.90 करोड़ रुपये का राजस्व केवल शराब-बीयर की बिक्री से मिला वहीं इस वित्तीय वर्ष के शुरुआत दो माह, अप्रैल-मई में ही 87.30 करोड़ का राजस्व मिला। मुजफ्फरनगर का अतिरिक्त प्रभार देखने वाले सहारनपुर के जिला मद्य निषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी आलोक कुमार का कहना है कि उनके पास पांच जनपदों का अतिरिक्त प्रभार है। विभाग को शासन से हर साल मात्र एक हजार रुपये एक जनपद के लिए मिलते हैं, जिनका व्यय वॉल पेंटिंग, बैनर-होर्डिंग्स लगाने के साथ ही जन जागरूकता के लिए गोष्ठियां कराने, स्कूल-कॉलेज में संगोष्ठी कराने, स्लाइड शो कराने आदि में करना होता है। महज एक हजार रुपये में इन सब खर्चों के साथ ही आने-जाने का खर्च भी कैसे निकाला जा सकता है ? ऐसे में सब कुछ अपनी जेब से ही खर्च करना होता है। संवाद
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