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कार्यशाला में उद्यान के बारे में दी जानकारी
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कार्यशाला में उद्यान के बारे में दी जानकारी
मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज में चल रही कार्यशाला में डा मनोज धीमान ने उद्यान एवं रखरखाव तथा डा रोहताश सिंह ने हरित ऊर्जा एवं रिपेयर मेंटीनेंस विषय पर पावर पाइंट प्रस्तुति के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि डॉ पूनम शर्मा रही।
डा मनोज धीमान ने पावर पाइंट प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि शैक्षिक संस्थानों में गुणवत्ता की संस्कृति को बढ़ावा देना आज की महती आवश्यकता है। संस्थान में सुंदर बगीचे, पेड़, पौधे एवं अलग-अलग प्रकार के फूलों से एक हरित ऊर्जा विकसित होती है जिससे शिक्षण संस्थानों में आने वाले विद्यार्थियों को शुद्ध वातावरण तो प्राप्त होता ही है। साथ ही मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। किसी भी संस्थान को सुंदर बनाने में उद्यान के रखरखाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि लॉन और गार्डन किसी भी संस्थान का मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है। जिसे देखने के बाद मन में प्रफुल्लता उत्पन्न होती है। हम प्रकृति से समन्वय बनाए रखते हैं तो बदले में प्रकृति भी हमें श्वांस लेने के लिए शुद्ध वायु एवं आनन्दमय वातावरण प्रदान करती है। डा रोहताश सिंह ने सौर ऊर्जा प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। प्राचार्या डा.प्रेरणा मित्तल, निदेशक डा आदित्य गौतम, डा रविंद्र प्रताप सिंह, डा आलोक गुप्ता, पंकज शर्मा, डॉ विनीत शर्मा, रवि गौतम, डा सौरभ जैन आदि वेबिनार में उपस्थित रहे।
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मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज में चल रही कार्यशाला में डा मनोज धीमान ने उद्यान एवं रखरखाव तथा डा रोहताश सिंह ने हरित ऊर्जा एवं रिपेयर मेंटीनेंस विषय पर पावर पाइंट प्रस्तुति के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि डॉ पूनम शर्मा रही।
डा मनोज धीमान ने पावर पाइंट प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि शैक्षिक संस्थानों में गुणवत्ता की संस्कृति को बढ़ावा देना आज की महती आवश्यकता है। संस्थान में सुंदर बगीचे, पेड़, पौधे एवं अलग-अलग प्रकार के फूलों से एक हरित ऊर्जा विकसित होती है जिससे शिक्षण संस्थानों में आने वाले विद्यार्थियों को शुद्ध वातावरण तो प्राप्त होता ही है। साथ ही मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। किसी भी संस्थान को सुंदर बनाने में उद्यान के रखरखाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि लॉन और गार्डन किसी भी संस्थान का मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है। जिसे देखने के बाद मन में प्रफुल्लता उत्पन्न होती है। हम प्रकृति से समन्वय बनाए रखते हैं तो बदले में प्रकृति भी हमें श्वांस लेने के लिए शुद्ध वायु एवं आनन्दमय वातावरण प्रदान करती है। डा रोहताश सिंह ने सौर ऊर्जा प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। प्राचार्या डा.प्रेरणा मित्तल, निदेशक डा आदित्य गौतम, डा रविंद्र प्रताप सिंह, डा आलोक गुप्ता, पंकज शर्मा, डॉ विनीत शर्मा, रवि गौतम, डा सौरभ जैन आदि वेबिनार में उपस्थित रहे।
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