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पीएनजी नहीं तो पारंपरिक ईंधन की मिलनी चाहिए छूट
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मेरठ रोड पर आई आई ए के कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की बैठक में उद्यमियों ने प्रदूषण विभाग के अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखी। उद्यमियों ने कहा कि प्रदूषण विभाग उद्योगों को गाइड करने का काम करें। जब तक पीएनजी की उपलब्धता नहीं है, तब तक पारंपरिक ईंधन से उद्यम चलाने की छूट मिलनी चाहिए। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अंकित सिंह ने समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया।
आईआईए के सह सचिव अमित जैन ने कहा कि पॉल्यूशन विभाग को प्रशासक के बजाए मददकर्ता की भूमिका निभानी चाहिए, जिसमें कि वह उद्योगों को गाइड करें कि वह कैसे परिवर्तन करके पर्यावरण को सुधारने में सहभागी हो सकते है। किसी उद्योग का वेस्ट दूसरे उद्योगों के लिए रॉ मैटेरियल हो सकता है, ऐसे उद्योगों को भी चिन्हित किया जाना चाहिए।
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अंकित सिंह ने कहा कि मुजफ्फरनगर के उद्योगों का पर्यावरण के मानको को पूरा करने में बहुत सहयोग रहता है। संस्थाओं द्वारा धरातल पर जो समस्याएं उठाई जाती है उसे सीएक्यूआई में भी उठानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कुपला इंडस्ट्रीज को कोयले से उत्पादन करने की छूट दे दी गई है, क्योंकि उन्होंने अपनी समस्याओं को उठाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुजफ्फरनगर के उद्योगों को विभाग द्वारा पूर्ण सहयोग किया जाएगा।
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आईआईए के निवर्तमान राष्ट्रीय महासचिव अश्वनी खंडेलवाल ने कहा कि पीएनजी की उपलब्धता न होने पर उद्योगों पर उसे कैसे थोपा जा सकता है। जब तक उपलब्धता नहीं है तब तक पारंपरिक इंधन का इस्तेमाल करने की छूट उद्योगों को मिलनी चाहिए। फेडरेशन के सचिव मनीष अग्रवाल ने कहा कि पारंपरिक इंधन से पीएनजी पर परिवर्तन के लिए ना तो अभी तकनीकी उपलब्ध है ओर अगर है भी तो बहुत महंगी है।
प्रदेश संयोजक लघु उद्योग प्रकोष्ठ भाजपा कुश पुरी ने कहा कि पर्यावरण नियम पूरे देश में एक समान लागू होना चाहिए। एनसीआर के नाम पर पहले दिल्ली से उद्योगों को उजाड़ा गया और अब जो उद्योग दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में लगे हुए है, उन्हें एनसीआर के नाम पर वहां से भी हटाए जाने का प्रयास हो रहा है।
आईआईए चैप्टर चेयरमैन विपुल भटनागर ने कहा कि आम धारणा यह है कि सारा प्रदूषण उद्योग द्वारा ही किया जा रहा है, जबकि पर्यावरण को सुधारने के लिए सबसे अधिक यदि कोई कार्य कर रहा है, तो वह सिर्फ उद्योग है। उद्योगों का प्रदूषण, कुल प्रदूषण का सिर्फ 11 प्रतिशत है परंतु आम आदमी, शासन प्रशासन से लेकर कोर्ट तक सिर्फ उद्योगों के लिए ही गाइडलाइन जारी करते है। जबकि 89 प्रतिशत प्रदूषण करने वालों के लिए न कोई नियम ना ही कोई बात होती है। कार्यक्रम में पवन गोयल, जगमोहन गोयल, अंकुर गर्ग, भारत अग्रवाल, सुमित अग्रवाल, सुधीर गोयल, सागर वत्स, शरद जैन, पंकज मोहन गर्ग, संजीव मित्तल, सत्य प्रकाश, विजय सिंघल, विवेक गोयल, अनुज कुच्छल, यशपाल सिंह आदि उद्यमी उपस्थित रहे।
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आईआईए के सह सचिव अमित जैन ने कहा कि पॉल्यूशन विभाग को प्रशासक के बजाए मददकर्ता की भूमिका निभानी चाहिए, जिसमें कि वह उद्योगों को गाइड करें कि वह कैसे परिवर्तन करके पर्यावरण को सुधारने में सहभागी हो सकते है। किसी उद्योग का वेस्ट दूसरे उद्योगों के लिए रॉ मैटेरियल हो सकता है, ऐसे उद्योगों को भी चिन्हित किया जाना चाहिए।
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क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अंकित सिंह ने कहा कि मुजफ्फरनगर के उद्योगों का पर्यावरण के मानको को पूरा करने में बहुत सहयोग रहता है। संस्थाओं द्वारा धरातल पर जो समस्याएं उठाई जाती है उसे सीएक्यूआई में भी उठानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कुपला इंडस्ट्रीज को कोयले से उत्पादन करने की छूट दे दी गई है, क्योंकि उन्होंने अपनी समस्याओं को उठाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुजफ्फरनगर के उद्योगों को विभाग द्वारा पूर्ण सहयोग किया जाएगा।
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आईआईए के निवर्तमान राष्ट्रीय महासचिव अश्वनी खंडेलवाल ने कहा कि पीएनजी की उपलब्धता न होने पर उद्योगों पर उसे कैसे थोपा जा सकता है। जब तक उपलब्धता नहीं है तब तक पारंपरिक इंधन का इस्तेमाल करने की छूट उद्योगों को मिलनी चाहिए। फेडरेशन के सचिव मनीष अग्रवाल ने कहा कि पारंपरिक इंधन से पीएनजी पर परिवर्तन के लिए ना तो अभी तकनीकी उपलब्ध है ओर अगर है भी तो बहुत महंगी है।
प्रदेश संयोजक लघु उद्योग प्रकोष्ठ भाजपा कुश पुरी ने कहा कि पर्यावरण नियम पूरे देश में एक समान लागू होना चाहिए। एनसीआर के नाम पर पहले दिल्ली से उद्योगों को उजाड़ा गया और अब जो उद्योग दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में लगे हुए है, उन्हें एनसीआर के नाम पर वहां से भी हटाए जाने का प्रयास हो रहा है।
आईआईए चैप्टर चेयरमैन विपुल भटनागर ने कहा कि आम धारणा यह है कि सारा प्रदूषण उद्योग द्वारा ही किया जा रहा है, जबकि पर्यावरण को सुधारने के लिए सबसे अधिक यदि कोई कार्य कर रहा है, तो वह सिर्फ उद्योग है। उद्योगों का प्रदूषण, कुल प्रदूषण का सिर्फ 11 प्रतिशत है परंतु आम आदमी, शासन प्रशासन से लेकर कोर्ट तक सिर्फ उद्योगों के लिए ही गाइडलाइन जारी करते है। जबकि 89 प्रतिशत प्रदूषण करने वालों के लिए न कोई नियम ना ही कोई बात होती है। कार्यक्रम में पवन गोयल, जगमोहन गोयल, अंकुर गर्ग, भारत अग्रवाल, सुमित अग्रवाल, सुधीर गोयल, सागर वत्स, शरद जैन, पंकज मोहन गर्ग, संजीव मित्तल, सत्य प्रकाश, विजय सिंघल, विवेक गोयल, अनुज कुच्छल, यशपाल सिंह आदि उद्यमी उपस्थित रहे।