{"_id":"699df92b78b0ef551202a857","slug":"holi-is-incomplete-without-friends-a-unique-holi-is-celebrated-for-15-days-muzaffarnagar-news-c-29-1-mng1004-165846-2026-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar News: सखियों के बिना होली है अधूरी, 15 दिन बाद तक मनाई जाती है अनोखी होली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar News: सखियों के बिना होली है अधूरी, 15 दिन बाद तक मनाई जाती है अनोखी होली
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। सर्कुलर रोड स्थित गन्ना शोध संस्थान परिसर में रहने वाली महिलाएं अलग अलग जिलों से हैं। नौकरी के सिलसिले में कोई पति और बच्चों के साथ तो कोई अपनी नौकरी के कारण यहां के क्वार्टर में रह रही हैं। होली की छुटिट्यों में सभी अपने मूल निवास स्थानों पर जाकर होली का आनंद लेते है। यहां के क्वार्टर में रहने वाली महिलाएं एक दूसरे के साथ होली मनाने के लिए लौटने के बाद होली मिलन का सिलसिला शुरू करती हैं जोकि 15 दिन तक चलता है। महिलाओं का कहना है कि सभी लंबे समय से यहां रह रही हैं। सहेलियों जैसा व्यवहार है। इसलिए एक दूजे के संग होली मनाए बिना अधूरा सा लगता है। इसलिए लगभग 25 सालों से यहां यही परंपरा चल रही है।
-- छुट्टी से आते ही शुरू होती है होली
सुनीता मलिक सोलंकी बताती हैं कि नौकरी के दौरान से ही यहां की महिलाओं के साथ होली मनाती रही हूं। अधिकांश छुट्टी पर अपने गांव या शहरों में चले जाते थे तो साथ होली मनाने की कसक रहती थी। इसके बाद सभी महिलाओं ने तय कर लिया था कि छुट्टी से लौटते ही होली मनाएगे। लगभग 25 साल से यहीं सिलसिला चल रहा है।
-- प्रतिदिन के एक के घर होता है होली मिलन
सुचित्रा ने बताया कि पहले गन्ना शोध संस्थान परिसर के क्वार्टर में ही रहते थे लेकिन अब पुरुषार्थी कॉलोनी में रह रहे है। गन्ना शोध संस्थान की पुरानी सखियों के साथ हर साल होली मनाने का कार्यक्रम चलता है। प्रतिदिन एक के घर डयूटी के बाद होली मिलन का कार्यक्रम रखा जाता है। गपशप के साथ स्वादिष्ट पकवान त्योहार का आनंद दोगुना कर देते हैं।
विज्ञापन
-- अलग अलग संस्कृतियों को जाने का मिलता है अवसर
उमेश शर्मा ने बताया कि इस दौरान अलग अलग संस्कृतियों और परंपराओं को जानने का अवसर भी मिलता है। सभी घर से लौटने के बाद अपने यहां के पारंपरिक व्यंजनों से मुंह मीठा कराते हैं। सभी अपने होली खेलने के तरीकों और रीति रिवाजों को साझा करते हैं। त्योहार की रौनक 15 दिन तक चलती रहती है।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। सर्कुलर रोड स्थित गन्ना शोध संस्थान परिसर में रहने वाली महिलाएं अलग अलग जिलों से हैं। नौकरी के सिलसिले में कोई पति और बच्चों के साथ तो कोई अपनी नौकरी के कारण यहां के क्वार्टर में रह रही हैं। होली की छुटिट्यों में सभी अपने मूल निवास स्थानों पर जाकर होली का आनंद लेते है। यहां के क्वार्टर में रहने वाली महिलाएं एक दूसरे के साथ होली मनाने के लिए लौटने के बाद होली मिलन का सिलसिला शुरू करती हैं जोकि 15 दिन तक चलता है। महिलाओं का कहना है कि सभी लंबे समय से यहां रह रही हैं। सहेलियों जैसा व्यवहार है। इसलिए एक दूजे के संग होली मनाए बिना अधूरा सा लगता है। इसलिए लगभग 25 सालों से यहां यही परंपरा चल रही है।
सुनीता मलिक सोलंकी बताती हैं कि नौकरी के दौरान से ही यहां की महिलाओं के साथ होली मनाती रही हूं। अधिकांश छुट्टी पर अपने गांव या शहरों में चले जाते थे तो साथ होली मनाने की कसक रहती थी। इसके बाद सभी महिलाओं ने तय कर लिया था कि छुट्टी से लौटते ही होली मनाएगे। लगभग 25 साल से यहीं सिलसिला चल रहा है।
विज्ञापन
सुचित्रा ने बताया कि पहले गन्ना शोध संस्थान परिसर के क्वार्टर में ही रहते थे लेकिन अब पुरुषार्थी कॉलोनी में रह रहे है। गन्ना शोध संस्थान की पुरानी सखियों के साथ हर साल होली मनाने का कार्यक्रम चलता है। प्रतिदिन एक के घर डयूटी के बाद होली मिलन का कार्यक्रम रखा जाता है। गपशप के साथ स्वादिष्ट पकवान त्योहार का आनंद दोगुना कर देते हैं।
विज्ञापन
उमेश शर्मा ने बताया कि इस दौरान अलग अलग संस्कृतियों और परंपराओं को जानने का अवसर भी मिलता है। सभी घर से लौटने के बाद अपने यहां के पारंपरिक व्यंजनों से मुंह मीठा कराते हैं। सभी अपने होली खेलने के तरीकों और रीति रिवाजों को साझा करते हैं। त्योहार की रौनक 15 दिन तक चलती रहती है।