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Muzaffarnagar News: फिर उफान पर हिंडन, कसौली-बुड्ढाखेड़ा का कटा संपर्क
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हिंडन नदी में बाढ़ के कारण कसौली और बुड्ढ़ाखेड़ा के बीच पानी के बहाव में फिर टूटा मार्ग
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किसानों के चेहरे मुरझाए, 10 दिन बाद दोबारा बढ़ गया जलस्तर
नहर पटरी मार्ग टूट जाने से लालखेड़ी और नानौता (सहारनपुर) का आवागमन बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल/बुढ़ाना। हिंडन नदी में एक बार पानी बढ़ गया। सड़क पर नदी का पानी चलने के कारण बुड्ढाखेड़ा-कसौली मार्ग पर दुपहिया वाहनों को निकलना बंद हो गया। नदी किनारे दर्जन भर गांवों के किसानों बची फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो गई है। पीड़ित किसान मुआवजे को लेकर असमंजस में है। उधर, लालूखेड़ी के पास नहर पटरी मार्ग टूट जाने से लालखेड़ी और नानौता (सहारनपुर) का आवागमन बंद हो गया।
हिंडन नदी में आई बाढ़ के कारण फसलों की तबाही का मंजर 45 सालों बाद किसानों ने देखा है। गांव बुड्ढाखेड़ा, छिमाऊ, कसौली, दूधली, न्यामू, मुथरा, सिकंदरपुर, अकबरगढ़, अरनायच, नंगला राई, कुल्हेड़ी, पीपलशाह आदि गांवों की 15 हजार से ज्यादा भूमि का रकबा नदी किनारे है। किसान और सब्जी उत्पादक पूरे साल आजीविका के लिए मेहनत और लागत लगाकर फसलों को रोपित करते है। मगर, बाढ़ ने इस मेहनत पर पानी फेर दिया है।
कसौली के पूर्व प्रधान सुखपाल सिंह और मामचंद पुंडीर का कहना है कि खेतों में भरा पानी देखकर ग्रामीण मायूस है। अभी कोई टीम नुकसान का आंकलन करने नहीं पहुंची। फसलें चौपट हो चुकी है। खेतों में चारा बचा नहीं है। ज्वार का महंगा बीज और ईख में कीटनाशक से खेतों में बीज रोपित किया था। हिंडन में आए बाढ़ के पानी में उनके अरमान डूबो दिए थे। 10 प्रतिशत घास आदि बचा था, वह भी अब खत्म हो गया।
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पानी में बह गई मिट्टी से बनाई गई सड़क
छिमाऊ के सतीश कुमार, मुकेश गर्ग, नीरज राणा, रोहताश कश्यप का कहना है कि चरथावल की तरफ जाने के लिए रास्ते पर मिट्टी डलवाकर रास्ते से बाइक और साइकिल आदि निकलनी शुरू हो गई थी। मगर, शुक्रवार शाम को पानी बढ़ा तो यह मिट्टी बह गई और रास्ता बंद हो गया। वाहनों को मुसीबत झेलनी पड़ी।
नुकसान का आंकलन किया जाए
सिकंदरपुर के सुमत, अकबरगढ़ के मुनेंद्र, नंगला राई के मतलूब, आसिफ आदि कहते है कि नदी किनारे खेतों में घास खत्म हो गया। दाेबारा पानी बढ़ने से बचे बची उम्मीदों पर पानी फिर गया। पशुओं में बीमारी की चपेट में आने लगे है। प्रशासन की टीम को रूचि लेकर मौके का मुआयना कर नुकसान का आंकलन किया जाए। दूधली के पूर्व प्रधान रविंद्र पुंडीर और न्यामू के कुलदीप त्यागी का कहना है कि धान की फसल पूरी तरह खराब हो गई।
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नहर पटरी मार्ग टूट जाने से लालखेड़ी और नानौता (सहारनपुर) का आवागमन बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल/बुढ़ाना। हिंडन नदी में एक बार पानी बढ़ गया। सड़क पर नदी का पानी चलने के कारण बुड्ढाखेड़ा-कसौली मार्ग पर दुपहिया वाहनों को निकलना बंद हो गया। नदी किनारे दर्जन भर गांवों के किसानों बची फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो गई है। पीड़ित किसान मुआवजे को लेकर असमंजस में है। उधर, लालूखेड़ी के पास नहर पटरी मार्ग टूट जाने से लालखेड़ी और नानौता (सहारनपुर) का आवागमन बंद हो गया।
हिंडन नदी में आई बाढ़ के कारण फसलों की तबाही का मंजर 45 सालों बाद किसानों ने देखा है। गांव बुड्ढाखेड़ा, छिमाऊ, कसौली, दूधली, न्यामू, मुथरा, सिकंदरपुर, अकबरगढ़, अरनायच, नंगला राई, कुल्हेड़ी, पीपलशाह आदि गांवों की 15 हजार से ज्यादा भूमि का रकबा नदी किनारे है। किसान और सब्जी उत्पादक पूरे साल आजीविका के लिए मेहनत और लागत लगाकर फसलों को रोपित करते है। मगर, बाढ़ ने इस मेहनत पर पानी फेर दिया है।
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कसौली के पूर्व प्रधान सुखपाल सिंह और मामचंद पुंडीर का कहना है कि खेतों में भरा पानी देखकर ग्रामीण मायूस है। अभी कोई टीम नुकसान का आंकलन करने नहीं पहुंची। फसलें चौपट हो चुकी है। खेतों में चारा बचा नहीं है। ज्वार का महंगा बीज और ईख में कीटनाशक से खेतों में बीज रोपित किया था। हिंडन में आए बाढ़ के पानी में उनके अरमान डूबो दिए थे। 10 प्रतिशत घास आदि बचा था, वह भी अब खत्म हो गया।
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पानी में बह गई मिट्टी से बनाई गई सड़क
छिमाऊ के सतीश कुमार, मुकेश गर्ग, नीरज राणा, रोहताश कश्यप का कहना है कि चरथावल की तरफ जाने के लिए रास्ते पर मिट्टी डलवाकर रास्ते से बाइक और साइकिल आदि निकलनी शुरू हो गई थी। मगर, शुक्रवार शाम को पानी बढ़ा तो यह मिट्टी बह गई और रास्ता बंद हो गया। वाहनों को मुसीबत झेलनी पड़ी।
नुकसान का आंकलन किया जाए
सिकंदरपुर के सुमत, अकबरगढ़ के मुनेंद्र, नंगला राई के मतलूब, आसिफ आदि कहते है कि नदी किनारे खेतों में घास खत्म हो गया। दाेबारा पानी बढ़ने से बचे बची उम्मीदों पर पानी फिर गया। पशुओं में बीमारी की चपेट में आने लगे है। प्रशासन की टीम को रूचि लेकर मौके का मुआयना कर नुकसान का आंकलन किया जाए। दूधली के पूर्व प्रधान रविंद्र पुंडीर और न्यामू के कुलदीप त्यागी का कहना है कि धान की फसल पूरी तरह खराब हो गई।