फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Halima of Shahpur

मुफलिसी ने कुंद कर दी हलीमा के जज्बे की धार 

Tue, 03 May 2016 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 03 May 2016 12:31 AM IST
विज्ञापन
Halima of Shahpur
बीए एलएलबी की परीक्षा में पैर से लिखाई करती हलीमा। - फोटो : अमर उजाला
प्रतिभा की धनी हलीमा के सपनों के आड़े आर्थिक तंगी आ गई है। बीएएलएलबी की फीस जमा ना कर पाने से उसकी पढ़ाई छूटने के कगार पर है। गरीब परिवार में जन्मी हलीमा को कुदरत ने हाथ नहीं दिए, लेकिन उसका पढ़ाई का जज्बा कम नहीं हुआ। पैरों से घर के काम झाड़ू  लगाना, नल से पानी खींचना, कपड़ों पर प्रेस करना, कपड़े धोने के साथ, पढ़ाई में  पैरों से इबारत लिखने की ठानी। 
विज्ञापन


पढ़ने की प्रतिज्ञा करते हुए हलीमा ने प्राइमरी तक की  शिक्षा गांव के सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में दुत्कार जैसे माहौल में पूरी  कर शाहपुर के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में कक्षा छह से कक्षा आठ तक पढ़ाई  पूरी की। इंटर तक की पढ़ाई शाहपुर के ही राष्ट्रीय इंटर कॉलेज से पूरी करने के बाद बघरा के स्वामी कल्याण देव डिग्री कॉलेज में बीए में प्रवेश लिया, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते एक वर्ष पूरा करने पर छोड़नी पड़ी।
विज्ञापन


पढ़ाई के जज्बे ने उसे बैठने नहीं दिया तो पिता मोमीन से गुजारिश कर श्रीराम कॉलेज में बीएएलएलबी में प्रवेश लिया। इस लाचार को क्या पता था कि अधर में ही उसके सर से पिता का साया छूट जाएगा। नवंबर 2015 पिता मोमिन की मौत ही  गई। कड़े संघर्षों से गुजरते हुए रास्ते में आने वाली बाधाओं से लड़ते हुए हलीमा ने अपना हौसला नहीं खोया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अपने संकल्प को पाने के लिए वह आगे  बढ़ती रही। पिता के इंतकाल ने हलीमा को झकझोर कर रख दिया। पिता की मौत के सदमे से उबर कर उसने फिर कदम बढ़ाए और मुजफ्फरनगर के  श्रीराम कॉलेज में बीए एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने को कमर कसी, लेकिन कॉलेज की फीस जमा नहीं कर पा रही। घर में फाकाकशी की नौबत है, ऊपर से पढ़ाई का खर्च। दो जून को  बीएएलएलबी प्रथम वर्ष की दो जून को शुरू होने वाली परीक्षा भी शायद ही दे  पाए।


अध्यापक बनना चाहती है हलीमा
मुजफ्फरनगर। पढ़-लिखकर अध्यापक बनने का ख्वाब लिए शाहपुर के गांव कसेरवा की दिव्यांग हलीमा समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में कई बार सुर्खियों में रही। पांच माह पूर्व पिता मोमीन की मौत से हलीमा के सपने बिखर गए। बड़ा भाई शादीशुदा होने के चलते अलग रहता है। महंगाई के दौर में मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करने में रहता है। मां शहीदा भी पसोपेश में है कि अन्य भाई बहनों को पाले या हलीमा को पढ़ाए। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed