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सरकारी शिक्षा बेहाल, भोजन माता कर रहीं कक्षाओं की देखभाल
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नगर के कम्पोजिट विद्यालय में कक्षा में बैठे विद्यार्थी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी है। बच्चों के सापेक्ष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। ऐसे भी स्कूल हैं, जहां शिक्षकों की कमी के कारण भोजन माताओं को कक्षाओं की देखभाल की जिम्मेदारी दे दी जाती है। वह बच्चों को पढ़ाई तो नहीं करा पाती, लेकिन छुट्टी की घंटी बजने तक शांत बैठाए रखती है।
सरकार का 30 बच्चों पर एक शिक्षक का दावा शहरी क्षेत्र में खोखला साबित हो रहा है। सरवट के कंपोजिट विद्यालय में 840 बच्चे हैं। इनके सापेक्ष सिर्फ पांच शिक्षक यहां तैनात है। आठ कक्षाओं में पांच में टीचर जाते हैं तो तीन लगातार खाली चलती है। किदवईनगर के प्राथमिक विद्यालय में 675 बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक सहित तीन टीचर पर है। प्राथमिक विद्यालय किदवईनगर में भोजन माताओं को कक्षाओं में देखभाल की जिम्मेदारी देने की मजबूरी है।
अन्य परिषदीय स्कूलों में भी ऐसे ही हालात
शहर में 24 परिषदीय स्कूल हैं, इनमें चार उच्च प्राथमिक, 20 प्राथमिक विद्यालय है। इन स्कूलों में 4703 बच्चे हैं, जबकि 30 शिक्षक और 26 शिक्षा मित्र इन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। शहर के कुछ स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों की अच्छी खासी तादाद है।
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केस-एक : शहर में सबसे ज्यादा 840 बच्चे कंपोजिट विद्यालय सरवट में है। यहां प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय एक साथ चल रहा है। इस विद्यालय में तीन शिक्षिका और दो शिक्षा मित्र तैनात है। एक साथ पांचों शिक्षक कक्षा में जाएं तो भी तीन कक्षाएं खाली रह जाती है। इन कक्षाओं में बच्चों को बिना टीचर के ही पढ़ना पड़ता है।
केस-दो : प्राथमिक विद्यालय किदवईनगर है। इस स्कूल में एक प्रधानाध्यापक हिना और दो शिक्षा मित्र हैं। बच्चों की संख्या 675 है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि कक्षा पांच के 136 बच्चे यहां से गए हैं। पिछले साल संख्या 740 थी। पूर्वी प्राथमिक विद्यालय झांसी की रानी पर 180 बच्चों में दो टीचर हैं। अधिकांश विद्यालयों में यही हालात हैं।
दिलशाद पर तीन, जावेद पर दो स्कूलों का चार्ज
शहरी क्षेत्र की हालत यह है कि एक शिक्षक पर कई-कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापक का चार्ज है। नुमाइश कैंप के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक जावेद पर खालापार के पूर्वी प्राथमिक विद्यालय का चार्ज भी है। कंपोजिट विद्यालय सरवट का चार्ज प्रधानाध्यापक दिलशाद के पास है। प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुरी और गंगारामपुरा का चार्ज भी दिलशाद के ही पास है।
जो शिक्षक हैं, उन्हीं से पढ़ाई की व्यवस्था कराई जा रही है। शहरी क्षेत्र में शिक्षकों की संख्या को लेकर शासन स्तर से ही निर्णय होता है - ज्योति प्रसाद तिवारी, नगर शिक्षा अधिकारी
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मुजफ्फरनगर। शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी है। बच्चों के सापेक्ष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। ऐसे भी स्कूल हैं, जहां शिक्षकों की कमी के कारण भोजन माताओं को कक्षाओं की देखभाल की जिम्मेदारी दे दी जाती है। वह बच्चों को पढ़ाई तो नहीं करा पाती, लेकिन छुट्टी की घंटी बजने तक शांत बैठाए रखती है।
सरकार का 30 बच्चों पर एक शिक्षक का दावा शहरी क्षेत्र में खोखला साबित हो रहा है। सरवट के कंपोजिट विद्यालय में 840 बच्चे हैं। इनके सापेक्ष सिर्फ पांच शिक्षक यहां तैनात है। आठ कक्षाओं में पांच में टीचर जाते हैं तो तीन लगातार खाली चलती है। किदवईनगर के प्राथमिक विद्यालय में 675 बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक सहित तीन टीचर पर है। प्राथमिक विद्यालय किदवईनगर में भोजन माताओं को कक्षाओं में देखभाल की जिम्मेदारी देने की मजबूरी है।
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अन्य परिषदीय स्कूलों में भी ऐसे ही हालात
शहर में 24 परिषदीय स्कूल हैं, इनमें चार उच्च प्राथमिक, 20 प्राथमिक विद्यालय है। इन स्कूलों में 4703 बच्चे हैं, जबकि 30 शिक्षक और 26 शिक्षा मित्र इन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। शहर के कुछ स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों की अच्छी खासी तादाद है।
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केस-एक : शहर में सबसे ज्यादा 840 बच्चे कंपोजिट विद्यालय सरवट में है। यहां प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय एक साथ चल रहा है। इस विद्यालय में तीन शिक्षिका और दो शिक्षा मित्र तैनात है। एक साथ पांचों शिक्षक कक्षा में जाएं तो भी तीन कक्षाएं खाली रह जाती है। इन कक्षाओं में बच्चों को बिना टीचर के ही पढ़ना पड़ता है।
केस-दो : प्राथमिक विद्यालय किदवईनगर है। इस स्कूल में एक प्रधानाध्यापक हिना और दो शिक्षा मित्र हैं। बच्चों की संख्या 675 है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि कक्षा पांच के 136 बच्चे यहां से गए हैं। पिछले साल संख्या 740 थी। पूर्वी प्राथमिक विद्यालय झांसी की रानी पर 180 बच्चों में दो टीचर हैं। अधिकांश विद्यालयों में यही हालात हैं।
दिलशाद पर तीन, जावेद पर दो स्कूलों का चार्ज
शहरी क्षेत्र की हालत यह है कि एक शिक्षक पर कई-कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापक का चार्ज है। नुमाइश कैंप के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक जावेद पर खालापार के पूर्वी प्राथमिक विद्यालय का चार्ज भी है। कंपोजिट विद्यालय सरवट का चार्ज प्रधानाध्यापक दिलशाद के पास है। प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुरी और गंगारामपुरा का चार्ज भी दिलशाद के ही पास है।
जो शिक्षक हैं, उन्हीं से पढ़ाई की व्यवस्था कराई जा रही है। शहरी क्षेत्र में शिक्षकों की संख्या को लेकर शासन स्तर से ही निर्णय होता है - ज्योति प्रसाद तिवारी, नगर शिक्षा अधिकारी