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सीवर, सड़कों से मोहताज है नई आबादी
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मुजफ्फरनगर के विश्वकर्मा चौक के पास बसी नई कालोनी की मुख्य सडक टूटी हुई।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। शहर की विस्तारित आबादी में सीवर, सड़क और बिजली की समस्या से आम जनता जूझ रही है। शहर के बराबर की आबादी वाले इन इलाकों में सुविधाओं का टोटा है। क्षेत्र गांव में आते हैं, जहां विकास के इतने बजट नहीं है।
शहर से सटे इलाकों सरवट, शांतिनगर, गांधीनगर, आदर्श कालोनी, अंकित विहार आदि में मूलभूत सुविधाओं की दिक्कत है। शहरी योजनाओं का लाभ इन क्षेत्रों के लोगों को नहीं मिल पाता है। सीवर तो अभी पूरे शहर में भी नहीं है, इस कारण इन क्षेत्रों में तो इसकी योजना पर चर्चा तक नहीं हुई है। यहां सड़कों की हालत बड़ी खराब है। इन इलाकों में सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी नहीं होने की है। बीच-बीच में कुछ स्थानों पर एमडीए, सांसद निधि, ग्राम पंचायत ने सड़क बनवाई है। ये सड़के वहीं पर बन पाई है, जहां पर एप्रोच वाले लोग रहते हैं। बाकी हिस्सों की हालत दयनीय है। पानी की निकासी नहीं होने से यहां बीमारी का खतरा बना रहता है। बिजली का कनेक्शन लेना यहां किसी जंग से कम नहीं है। जहां खंभा नहीं है वहां तो कुछ ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ती है। जिला प्रशासन, एमडीए का कोई ऐसा प्लान नहीं है जो इन कालोनियों को व्यवस्थित किया जा सके।
सड़कों की समस्या सबसे अधिक
विश्वकर्मा चौक से लेकर रजबहे तक फैली शांतिनगर कालोनी समस्याओं से जूझ रही है। इस कालोनी के किरणपाल एडवोकेट का कहना है कि मुख्य मार्ग ही आज तक नहीं बन पाया है। कालोनी में छोटे-छोटे टुकड़े बने हैं। जनता परेशान है।
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इसी कालोनी के नाहर सिंह सैनी का कहना है कि कालोनी की सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी नहीं होना है। अब से पहले पानी खाली प्लाटों में एकत्र होता था, अब मकान बन रहे हैं तो यह समस्या बढ़ गई है।
कालोनी के विक्की गोयल का कहना है कि योजनाबद्ध तरीके से सड़कें बनाई जाए तो जनता की समस्या कम हो सकती है। इस समय तो केवल सिफारिश के आधार पर ही सड़क बन रही है।
कालोनी के देवेंद्र तोमर का कहना है कि सीवर की बात तो छोड़ों यहां पहले सड़क की बनवा दो। सड़क बनने से यहां पानी की निकासी की समस्या का हल होगा।
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शहर से सटे इलाकों सरवट, शांतिनगर, गांधीनगर, आदर्श कालोनी, अंकित विहार आदि में मूलभूत सुविधाओं की दिक्कत है। शहरी योजनाओं का लाभ इन क्षेत्रों के लोगों को नहीं मिल पाता है। सीवर तो अभी पूरे शहर में भी नहीं है, इस कारण इन क्षेत्रों में तो इसकी योजना पर चर्चा तक नहीं हुई है। यहां सड़कों की हालत बड़ी खराब है। इन इलाकों में सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी नहीं होने की है। बीच-बीच में कुछ स्थानों पर एमडीए, सांसद निधि, ग्राम पंचायत ने सड़क बनवाई है। ये सड़के वहीं पर बन पाई है, जहां पर एप्रोच वाले लोग रहते हैं। बाकी हिस्सों की हालत दयनीय है। पानी की निकासी नहीं होने से यहां बीमारी का खतरा बना रहता है। बिजली का कनेक्शन लेना यहां किसी जंग से कम नहीं है। जहां खंभा नहीं है वहां तो कुछ ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ती है। जिला प्रशासन, एमडीए का कोई ऐसा प्लान नहीं है जो इन कालोनियों को व्यवस्थित किया जा सके।
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सड़कों की समस्या सबसे अधिक
विश्वकर्मा चौक से लेकर रजबहे तक फैली शांतिनगर कालोनी समस्याओं से जूझ रही है। इस कालोनी के किरणपाल एडवोकेट का कहना है कि मुख्य मार्ग ही आज तक नहीं बन पाया है। कालोनी में छोटे-छोटे टुकड़े बने हैं। जनता परेशान है।
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इसी कालोनी के नाहर सिंह सैनी का कहना है कि कालोनी की सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी नहीं होना है। अब से पहले पानी खाली प्लाटों में एकत्र होता था, अब मकान बन रहे हैं तो यह समस्या बढ़ गई है।
कालोनी के विक्की गोयल का कहना है कि योजनाबद्ध तरीके से सड़कें बनाई जाए तो जनता की समस्या कम हो सकती है। इस समय तो केवल सिफारिश के आधार पर ही सड़क बन रही है।
कालोनी के देवेंद्र तोमर का कहना है कि सीवर की बात तो छोड़ों यहां पहले सड़क की बनवा दो। सड़क बनने से यहां पानी की निकासी की समस्या का हल होगा।