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Muzaffarnagar News: सोना लाख रुपये तोला, मध्य वर्ग ने तौबा बोला
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मुजफ्फरनगर। सोने के दाम आसमान छू रहे हैं। आज के दौर में महज एक ग्राम सोना 11 हजार के आसपास पहुंच रहा है। तीज त्योहार और समारोह के दौरान महिलाएं जहां सोने के गहने बनवाना पसंद करती थी वहीं अब अन्य विकल्पों को अपनाना मजूबरी बनता जा रहा है। महंगाई महिलाओं के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।
2025 की शुरुआत से ही सोने के दाम में उछाल शुरू हो गया था। जनवरी में जहां प्रति दस ग्राम सोने की कीमत 78 हजार रुपये थी वहीं अप्रैल में त्योहार और शादी के सीजन के आते ही यह आंकड़ा एक लाख के पार चला गया था। मई में 99 हजार रुपये पर आया तो अगस्त में एक बार फिर से एक लाख के पार पहुंच गया।
म्यूचल फंड को बनाएं विकल्प
इंदू राठी का कहना है कि एक लाख पर पहुंचा सोना अब मिडिल क्लास के लिए सिर्फ ख्वाब रह गया है। अब समय है कि हम अपनी पारंपरिक सीमाओं को थोड़ा बांध दें। शादी तीज त्योहारों में सोने के रूप में दिए जाने वाले तोहफों को कैश या म्यूचुअल फंड में कर दें।
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निवेश के लिए है अच्छा
जैन कन्या इंटर कॉलेज की शिक्षिका राखी का कहना है कि महिलाओं में सोने के गहने बनवाने के पीछे यही सोच रहती है कि भविष्य में कभी जरूरत पड़ने पर वह सोना काम आ सकता है। आज के दौर में सोना ही पहुंच से बाहर जा रहा है। यह निवेश के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता हे।
खानदानी प्रथा को जारी रखना पड़ेगा
गीतांजलि ग्रुप की सदस्य शालिनी जैन का कहना है कि सोना भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सोने की महंगाई को देखते हुए पुरानी खानदानी प्रथा को ही जारी रखना पड़ेगा। जैसे पुराने जमाने में पीढ़ी दर पीढ़ी कोई न कोई आभूषण खानदानी विरासत के नाम पर लड़की या बहू को दिया भी जाता था।
अब सोने के उपहारों में होगी कटौती
साहित्यकार डॉ. पुष्पलता का कहती हैं कि सोना-चांदी से बने गहने स्त्री को दिए जाते हैं, वह स्त्री धन होता है। शादी के समय मायके के साथ ससुराल से भी उपहार में गहने मिलते थे। बच्चों के जन्म के समय नाना-नानी के घर उपहार में गहनों का मिलना परंपरा में शामिल है। आज सोने की कीमतों ने इनमें कटौती की तरफ मोड़ दिया है। सोने की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार तय करता है तो सरकार को भी दोष नहीं दे सकते।
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2025 की शुरुआत से ही सोने के दाम में उछाल शुरू हो गया था। जनवरी में जहां प्रति दस ग्राम सोने की कीमत 78 हजार रुपये थी वहीं अप्रैल में त्योहार और शादी के सीजन के आते ही यह आंकड़ा एक लाख के पार चला गया था। मई में 99 हजार रुपये पर आया तो अगस्त में एक बार फिर से एक लाख के पार पहुंच गया।
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म्यूचल फंड को बनाएं विकल्प
इंदू राठी का कहना है कि एक लाख पर पहुंचा सोना अब मिडिल क्लास के लिए सिर्फ ख्वाब रह गया है। अब समय है कि हम अपनी पारंपरिक सीमाओं को थोड़ा बांध दें। शादी तीज त्योहारों में सोने के रूप में दिए जाने वाले तोहफों को कैश या म्यूचुअल फंड में कर दें।
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निवेश के लिए है अच्छा
जैन कन्या इंटर कॉलेज की शिक्षिका राखी का कहना है कि महिलाओं में सोने के गहने बनवाने के पीछे यही सोच रहती है कि भविष्य में कभी जरूरत पड़ने पर वह सोना काम आ सकता है। आज के दौर में सोना ही पहुंच से बाहर जा रहा है। यह निवेश के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता हे।
खानदानी प्रथा को जारी रखना पड़ेगा
गीतांजलि ग्रुप की सदस्य शालिनी जैन का कहना है कि सोना भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सोने की महंगाई को देखते हुए पुरानी खानदानी प्रथा को ही जारी रखना पड़ेगा। जैसे पुराने जमाने में पीढ़ी दर पीढ़ी कोई न कोई आभूषण खानदानी विरासत के नाम पर लड़की या बहू को दिया भी जाता था।
अब सोने के उपहारों में होगी कटौती
साहित्यकार डॉ. पुष्पलता का कहती हैं कि सोना-चांदी से बने गहने स्त्री को दिए जाते हैं, वह स्त्री धन होता है। शादी के समय मायके के साथ ससुराल से भी उपहार में गहने मिलते थे। बच्चों के जन्म के समय नाना-नानी के घर उपहार में गहनों का मिलना परंपरा में शामिल है। आज सोने की कीमतों ने इनमें कटौती की तरफ मोड़ दिया है। सोने की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार तय करता है तो सरकार को भी दोष नहीं दे सकते।