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75 की उम्र में भी जोश के साथ जगा रहे हैं ज्ञान की अलख
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75 की उम्र में भी जोश के साथ जगा रहे हैं ज्ञान की अलख
मुजफ्फरनगर, भोपा। जब दिल में सेवाभाव की ज्योति का प्रकाश हो तो ऐसे में खुद नेक कार्य की ओर कदम बढ़ते चले जाते हैं। इसी कड़ी में कोरोना काल में भी कई शिक्षक-शिक्षिकाओं ने शिक्षा की अलख जगाई हैं। कई ऐसे अध्यापक और अध्यापिकाएं भी है जिनके द्वारा गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा सामग्री भी उपलब्ध करा रहे हैं। बेलड़ा गांव निवासी 75 वर्षीय सेवानिवृत्त अध्यापक केंद्रपाल सिंह बुढ़ापे को मात देते हुए घर पर ही दर्जनों छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
केंद्रपाल सिंह बताते हैं कि उन्हें सेवानिवृत्त हुए 13 वर्ष हो गए हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उनके मन में भाव पैदा हुए की वह शिक्षण कार्य को जारी रखेंगे। जिसके चलते वह नि:स्वार्थ भाव से गांव व कासमपुरा के विद्यालय में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। इतना ही नहीं वह प्रतिदिन गरीब बच्चों को शिक्षा का ज्ञान बांट रहे हैं।
शिक्षिका विनीता चौधरी जूनियर हाई स्कूल का संचालन करती है। बताती है कि गरीब बच्चों को नि:शुल्क शुल्क दे रहे है। छात्र छात्राओं को शिक्षा सामग्री भी उपलब्ध कराई है। उनके पति डॉ अनुज कुमार भी शिक्षक हैं, जो इस नेक कार्य में उनका सहयोग करते हैं।
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रजिया सुल्तान बेहड़ा सादात निवासी है, उनके पति ओशाख अहमद गांव के ही विद्यालय में अध्यापक हैं। रजिया सुल्तान भी गरीब छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण कराती है।
कोरोना कॉल में बच्चों का किया मार्ग दर्शन
अध्यापिका आरजू राठी, शालू शर्मा, नीलम गर्ग ने कोरोना कॉल में बच्चों का मार्ग दर्शन किया। उन्होंने जहां बच्चों को ऑन लाइन शिक्षा दी। वहीं छात्र-छात्राओं के हमेशा संपर्क में रह कर उनका समस्याओं का निदान किया। तीनों शिक्षिकाओं की मेहनत को देखते हुए उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।
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मुजफ्फरनगर, भोपा। जब दिल में सेवाभाव की ज्योति का प्रकाश हो तो ऐसे में खुद नेक कार्य की ओर कदम बढ़ते चले जाते हैं। इसी कड़ी में कोरोना काल में भी कई शिक्षक-शिक्षिकाओं ने शिक्षा की अलख जगाई हैं। कई ऐसे अध्यापक और अध्यापिकाएं भी है जिनके द्वारा गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा सामग्री भी उपलब्ध करा रहे हैं। बेलड़ा गांव निवासी 75 वर्षीय सेवानिवृत्त अध्यापक केंद्रपाल सिंह बुढ़ापे को मात देते हुए घर पर ही दर्जनों छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
केंद्रपाल सिंह बताते हैं कि उन्हें सेवानिवृत्त हुए 13 वर्ष हो गए हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उनके मन में भाव पैदा हुए की वह शिक्षण कार्य को जारी रखेंगे। जिसके चलते वह नि:स्वार्थ भाव से गांव व कासमपुरा के विद्यालय में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। इतना ही नहीं वह प्रतिदिन गरीब बच्चों को शिक्षा का ज्ञान बांट रहे हैं।
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शिक्षिका विनीता चौधरी जूनियर हाई स्कूल का संचालन करती है। बताती है कि गरीब बच्चों को नि:शुल्क शुल्क दे रहे है। छात्र छात्राओं को शिक्षा सामग्री भी उपलब्ध कराई है। उनके पति डॉ अनुज कुमार भी शिक्षक हैं, जो इस नेक कार्य में उनका सहयोग करते हैं।
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रजिया सुल्तान बेहड़ा सादात निवासी है, उनके पति ओशाख अहमद गांव के ही विद्यालय में अध्यापक हैं। रजिया सुल्तान भी गरीब छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण कराती है।
कोरोना कॉल में बच्चों का किया मार्ग दर्शन
अध्यापिका आरजू राठी, शालू शर्मा, नीलम गर्ग ने कोरोना कॉल में बच्चों का मार्ग दर्शन किया। उन्होंने जहां बच्चों को ऑन लाइन शिक्षा दी। वहीं छात्र-छात्राओं के हमेशा संपर्क में रह कर उनका समस्याओं का निदान किया। तीनों शिक्षिकाओं की मेहनत को देखते हुए उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।