{"_id":"5fbd577b8ebc3e9baa35cbf2","slug":"garbage-being-dumped-along-the-gangahar-track-muzaffarnagar-news-mrt51254052","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगनहर पटरी मार्ग किनारे डाला जा रहा कूडा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगनहर पटरी मार्ग किनारे डाला जा रहा कूडा
विज्ञापन
चतौली में गंगनहर के किनारे नगरपालिका द्वारा डाला जा रहा कूडा।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
गंगनहर पटरी मार्ग के किनारे डाला जा रहा कूड़ा
मुजफ्फरनगर, खतौली। गंदगी से कराह रही नगर पालिका के पास कूड़ा डालने के लिए कोई डंपिंग ग्राउंड नहीं है। डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए दो गांव में भूमि तलाशी गई, लेकिन घनी आबादी होने के कारण ग्रामीणों के विरोध के चलते यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। वहीं, ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल की चेतावनी के बाद भी समस्या का निराकरण नहीं हो सका। कूड़ा गंगनहर पटरी के समीप ही डाला जा रहा है।
खतौली नगर पालिका क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल कूड़ा निकलता है, जिसे नगरपालिका के सफाईकर्मचारी कुछ चुनिंदा स्थानों जैसे रोडवेज डिपो के बाहर, बुढ़ाना रोड पर, डाकघर के समीप, बिद्दीवाडा आदि स्थानों पर डाल देते हैं। बाद में इस कूडे़ को उठाकर गंगनहर की पटरी के करीब डाल दिया जाता है, जिससे बुढ़ाना रोड सहित गंगनहर पटरी पर दुर्गंध का वातावरण बना रहता है। वहां के आसपास के मोहल्लेवासियों का रहना भी मुश्किल है। इससे निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने गांव पिपलेहड़ा सहित गांव ताजपुर में ग्राम पंचायत की भूमि को चिह्नित किया था। घनी आबादी के पास होने के कारण दोनों स्थानों पर इसका ग्रामीणों द्वारा पुरजोर विरोध किया गया। नतीजतन डंपिंग ग्राउंड की योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अभी भी कूड़े को गंगनहर पटरी के समीप डाला जा रहा है। ईपीसीए के चेयरमैन डॉ भूरेलाल ने खतौली का निरीक्षण किया था, जिसके बाद उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कूड़े का निस्तारण सही से कराने के निर्देश दिए पालिका प्रशासन को दिए थे। कूड़े का निस्तारण सही से न किए जाने पर जुर्माना लगाए जाने की भी चेतावनी दी गई थी।
गांव ताजपुर के प्रधान के पति निवेश राणा का कहना है कि पहले गांव पिपलेहड़ा में डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन तलाशी गई थी, लेकिन विरोध के बाद ताजपुर में ग्राम समाज चिह्नित किया गया। यहां भी घनी आबादी के कारण ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था।
विज्ञापन
पालिका को अपनी जमीन खरीदनी होगी
एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी का कहना है कि दो स्थानों पर डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए जमीन तलाशी गई। लेकिन दोनों स्थान घनी आबादी के समीप होने के कारण प्रस्ताव पास नहीं हो सका। सरकारी ऐसी कोई भी भूमि नहीं मिल रही है, जो आबादी से दूर हो, उसे पालिका को पट्टे पर दिया जा सके। इसलिए पालिका को डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए भूमि खरीदनी पड़ेगी।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर, खतौली। गंदगी से कराह रही नगर पालिका के पास कूड़ा डालने के लिए कोई डंपिंग ग्राउंड नहीं है। डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए दो गांव में भूमि तलाशी गई, लेकिन घनी आबादी होने के कारण ग्रामीणों के विरोध के चलते यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। वहीं, ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल की चेतावनी के बाद भी समस्या का निराकरण नहीं हो सका। कूड़ा गंगनहर पटरी के समीप ही डाला जा रहा है।
खतौली नगर पालिका क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल कूड़ा निकलता है, जिसे नगरपालिका के सफाईकर्मचारी कुछ चुनिंदा स्थानों जैसे रोडवेज डिपो के बाहर, बुढ़ाना रोड पर, डाकघर के समीप, बिद्दीवाडा आदि स्थानों पर डाल देते हैं। बाद में इस कूडे़ को उठाकर गंगनहर की पटरी के करीब डाल दिया जाता है, जिससे बुढ़ाना रोड सहित गंगनहर पटरी पर दुर्गंध का वातावरण बना रहता है। वहां के आसपास के मोहल्लेवासियों का रहना भी मुश्किल है। इससे निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने गांव पिपलेहड़ा सहित गांव ताजपुर में ग्राम पंचायत की भूमि को चिह्नित किया था। घनी आबादी के पास होने के कारण दोनों स्थानों पर इसका ग्रामीणों द्वारा पुरजोर विरोध किया गया। नतीजतन डंपिंग ग्राउंड की योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अभी भी कूड़े को गंगनहर पटरी के समीप डाला जा रहा है। ईपीसीए के चेयरमैन डॉ भूरेलाल ने खतौली का निरीक्षण किया था, जिसके बाद उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कूड़े का निस्तारण सही से कराने के निर्देश दिए पालिका प्रशासन को दिए थे। कूड़े का निस्तारण सही से न किए जाने पर जुर्माना लगाए जाने की भी चेतावनी दी गई थी।
विज्ञापन
गांव ताजपुर के प्रधान के पति निवेश राणा का कहना है कि पहले गांव पिपलेहड़ा में डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन तलाशी गई थी, लेकिन विरोध के बाद ताजपुर में ग्राम समाज चिह्नित किया गया। यहां भी घनी आबादी के कारण ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था।
विज्ञापन
पालिका को अपनी जमीन खरीदनी होगी
एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी का कहना है कि दो स्थानों पर डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए जमीन तलाशी गई। लेकिन दोनों स्थान घनी आबादी के समीप होने के कारण प्रस्ताव पास नहीं हो सका। सरकारी ऐसी कोई भी भूमि नहीं मिल रही है, जो आबादी से दूर हो, उसे पालिका को पट्टे पर दिया जा सके। इसलिए पालिका को डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए भूमि खरीदनी पड़ेगी।