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वेदमंत्रों से गूंजा भागीरथी का तट
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 24 Nov 2015 12:35 AM IST
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पौराणिक तीर्थ शुक्रताल में गंगा स्नान पर्व और मेले का शुभारंभ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने वेद मंत्रोच्चार के साथ गंगा पूजन से किया। स्वामी ने कहा कि शुकतीर्थ भगवत प्राप्ति के साधनों का उद्गम स्थल है।
शुक्रताल में पतित पावनी गंगा के घाट सोमवार की सायं पुरोहितों और आचार्यों के मंत्रपाठ से भक्तिमय हो गए। मंगल तिलक, आचमन और संकल्प के बाद घंटे-घड़ियाल बजने लगे। कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित गंगा स्नान पर्व एवं मेले का शुभारंभ विधि विधान से स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया।
इससे पूर्व भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम की यज्ञशाला में विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए आहुतियां अर्पित की गईं। यजमान अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत अरुण कुमार सिंह रहे। इस मौके पर स्वामी ओमानंद ने कहा कि यह तीर्थ भागवत और भागीरथी गंगा का संगम है।
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महर्षि शुकदेव ने श्रीमद्भागवत कथा का उपदेश देकर मानव मात्र को ज्ञान, भक्ति और वैराग्य द्वारा ईश्वर प्राप्ति का सुलभ मार्ग है। गुुरुदेव स्वामी कल्याण देव महाराज के प्रताप से तीर्थ में गंगा स्नान मेले की संस्कृति ज्योर्तिमय हुई थी। गंगा भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
गंगा स्नान के पुण्य से सद्कर्म में वृद्धि होती है। पापों से मुक्ति मिलती है। जीवन पुण्य की राह पर अग्रसर होता है। स्वामी ने युवाओं से नशे से बचने और सत्संग से शिक्षा लेने का आह्वान किया। श्री गंगा सेवा समिति के महामंत्री प्रेमशंकर मिश्रा, आचार्य गिरीश चंद्र उप्रेती, चेयरमैन विनोद शर्मा, प्रधान नीरज रायल शास्त्री, अभियंता ब्रिजेश मावी, प्रभारी चिकित्साधिकारी आरडी गौड़, खंड शिक्षा अधिकारी आनंद पाल सिंह आदि मौजूद रहे। मुख्य स्नान 25 नवंबर को होगा।
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शुक्रताल में पतित पावनी गंगा के घाट सोमवार की सायं पुरोहितों और आचार्यों के मंत्रपाठ से भक्तिमय हो गए। मंगल तिलक, आचमन और संकल्प के बाद घंटे-घड़ियाल बजने लगे। कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित गंगा स्नान पर्व एवं मेले का शुभारंभ विधि विधान से स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया।
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इससे पूर्व भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम की यज्ञशाला में विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए आहुतियां अर्पित की गईं। यजमान अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत अरुण कुमार सिंह रहे। इस मौके पर स्वामी ओमानंद ने कहा कि यह तीर्थ भागवत और भागीरथी गंगा का संगम है।
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महर्षि शुकदेव ने श्रीमद्भागवत कथा का उपदेश देकर मानव मात्र को ज्ञान, भक्ति और वैराग्य द्वारा ईश्वर प्राप्ति का सुलभ मार्ग है। गुुरुदेव स्वामी कल्याण देव महाराज के प्रताप से तीर्थ में गंगा स्नान मेले की संस्कृति ज्योर्तिमय हुई थी। गंगा भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
गंगा स्नान के पुण्य से सद्कर्म में वृद्धि होती है। पापों से मुक्ति मिलती है। जीवन पुण्य की राह पर अग्रसर होता है। स्वामी ने युवाओं से नशे से बचने और सत्संग से शिक्षा लेने का आह्वान किया। श्री गंगा सेवा समिति के महामंत्री प्रेमशंकर मिश्रा, आचार्य गिरीश चंद्र उप्रेती, चेयरमैन विनोद शर्मा, प्रधान नीरज रायल शास्त्री, अभियंता ब्रिजेश मावी, प्रभारी चिकित्साधिकारी आरडी गौड़, खंड शिक्षा अधिकारी आनंद पाल सिंह आदि मौजूद रहे। मुख्य स्नान 25 नवंबर को होगा।