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जंजीरों में जकड़े बालक को मुक्त कराया, शरारत करने पर मां खुद ही छोड़ गई थी मदरसे में
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 29 Oct 2017 12:33 AM IST
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जंजीर में जकड़ा बालक।
- फोटो : अमर उजाला
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चरथावल के निरधना के एक मदरसे में एक बालक को जंजीर से बांधकर रखने का मामला सामने आया है। बालक शनिवार को किसी तरह से मदरसे से बाहर भाग आया और वहां से बाइक से गुजर रहे जिला पंचायत सदस्य राकेश वशिष्ठ को रोककर बताया कि उसे जबरन मदरसे में रखा जा रहा है। जिला पंचायत सदस्य उसे लेकर थाने पहुंचे। पुलिस गांव निरधाना निवासी बालक के रिश्तेदार को पकड़कर थाने ले आई।
उससे पूछताछ और पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि बालक की मां ही उसकी शरारतों और हरकतों से तंग आकर उसे जंजीर से बांधकर मदरसे में छोड़ गई थी। बालक सहारनपुर के गांव मोहन अंबेहटा का रहने वाला है। गांव निरधाना में उसकी मौसी रहती है। बाद में बालक के थाने पहुंच जाने और उसके एक रिश्तेदार के पुलिस की हिरासत में होने की जानकारी होने पर अन्य परिजन, मदरसे के मौलवी जाबिर, ग्राम प्रधान पति जमशेद, हैबतपुर प्रधान फुरकान कस्बे के पूर्व चेयरमैन पति इस्लामुद्दीन समेत दर्जनों लोग थाने पहुंच गए और पुलिस को हकीकत बताई।
इसके बाद पुलिस ने जिला पंचायत सदस्य राकेश वशिष्ठ की सुपुर्दगी में बालक को उसके गांव छुड़वा दिया। उधर, थाना प्रभारी गिरीश चंद शर्मा ने बताया कि परिवारीजनों ने खुद ही जंजीर डाली थी, लेकिन मदरसे के संचालकों को इस तरह के अमानवीय कृत्य से बचना चाहिए था। दोनों पक्षों को चेतावनी देकर मामले में सुलहनामा करा दिया।
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मैं मां हूं, क्या करूं, गलत संगत से आई गई हूं तंग
बच्चे की हरकतों से तंग आई बेबस मां ने बालक को जंजीर में जकड़ कर तालीम हासिल करने के लिए मदरसे में छोड़ दिया। यह पूरा मामला पुलिस के पास पहुंचा, यह बालक के साथ अपराध का मामला था, कानून इसकी इजाजत नहीं देता, लेकिन एक मां की पीड़ा और बेटे को सुधारने की उसकी मंशा का सवाल भी उठा।
कलेजे पर पत्थर रखकर ये कदम उठाने वाली मां की आंखों में आंसू थे। गांव और क्षेत्र के संभ्रांत लोगों के आग्रह पर पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और बालक को उसके घर छुड़वा दिया। साथ ही दोनों पक्षों को फिर से ऐसा नहीं करने की हिदायत भी दी।
शनिवार को गांव पहुंची साहिल की मां ने बेटे की तमाम हरकतों को बयां किया। आंखों में आंसू लिए कहती है, मैं मां हूू, लेकिन बेटे की गलत संगत से तंग आ चुकी हूं। साहिल 12 साल का है, लेकिन उसे धुम्रपान की लत गई। उसकी इन्हीं हरकतों के कारण बेबस हुई मां ने उसे जंजीरों में बांधकर मदरसे में छोड़ा था।
सहारनपुर के गांव मोहन अंबेहटा की रहने वाली महिला ने बच्चे शरारत को छुड़ाने के लिए वो कर दिया, जो एक मां के लिए गंवारा नहीं है। बेटे की हरकतों से तंग आकर बेबस मां ने उसे जंजीरों में जकड़ दिया, ताकि वह सुधर जाए और तालीम में मन लगा ले। दरअसल, वह तीन दिन पहले अपने बेटे को जंजीरों से बांधकर निरधना गांव के एक मदरसे में छोड़ गई। मदरसे में साहिल तालीम हासिल करने के बजाए शनिवार को चकमा देकर बाहर आ गया।
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उससे पूछताछ और पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि बालक की मां ही उसकी शरारतों और हरकतों से तंग आकर उसे जंजीर से बांधकर मदरसे में छोड़ गई थी। बालक सहारनपुर के गांव मोहन अंबेहटा का रहने वाला है। गांव निरधाना में उसकी मौसी रहती है। बाद में बालक के थाने पहुंच जाने और उसके एक रिश्तेदार के पुलिस की हिरासत में होने की जानकारी होने पर अन्य परिजन, मदरसे के मौलवी जाबिर, ग्राम प्रधान पति जमशेद, हैबतपुर प्रधान फुरकान कस्बे के पूर्व चेयरमैन पति इस्लामुद्दीन समेत दर्जनों लोग थाने पहुंच गए और पुलिस को हकीकत बताई।
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इसके बाद पुलिस ने जिला पंचायत सदस्य राकेश वशिष्ठ की सुपुर्दगी में बालक को उसके गांव छुड़वा दिया। उधर, थाना प्रभारी गिरीश चंद शर्मा ने बताया कि परिवारीजनों ने खुद ही जंजीर डाली थी, लेकिन मदरसे के संचालकों को इस तरह के अमानवीय कृत्य से बचना चाहिए था। दोनों पक्षों को चेतावनी देकर मामले में सुलहनामा करा दिया।
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मैं मां हूं, क्या करूं, गलत संगत से आई गई हूं तंग
बच्चे की हरकतों से तंग आई बेबस मां ने बालक को जंजीर में जकड़ कर तालीम हासिल करने के लिए मदरसे में छोड़ दिया। यह पूरा मामला पुलिस के पास पहुंचा, यह बालक के साथ अपराध का मामला था, कानून इसकी इजाजत नहीं देता, लेकिन एक मां की पीड़ा और बेटे को सुधारने की उसकी मंशा का सवाल भी उठा।
कलेजे पर पत्थर रखकर ये कदम उठाने वाली मां की आंखों में आंसू थे। गांव और क्षेत्र के संभ्रांत लोगों के आग्रह पर पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और बालक को उसके घर छुड़वा दिया। साथ ही दोनों पक्षों को फिर से ऐसा नहीं करने की हिदायत भी दी।
शनिवार को गांव पहुंची साहिल की मां ने बेटे की तमाम हरकतों को बयां किया। आंखों में आंसू लिए कहती है, मैं मां हूू, लेकिन बेटे की गलत संगत से तंग आ चुकी हूं। साहिल 12 साल का है, लेकिन उसे धुम्रपान की लत गई। उसकी इन्हीं हरकतों के कारण बेबस हुई मां ने उसे जंजीरों में बांधकर मदरसे में छोड़ा था।
सहारनपुर के गांव मोहन अंबेहटा की रहने वाली महिला ने बच्चे शरारत को छुड़ाने के लिए वो कर दिया, जो एक मां के लिए गंवारा नहीं है। बेटे की हरकतों से तंग आकर बेबस मां ने उसे जंजीरों में जकड़ दिया, ताकि वह सुधर जाए और तालीम में मन लगा ले। दरअसल, वह तीन दिन पहले अपने बेटे को जंजीरों से बांधकर निरधना गांव के एक मदरसे में छोड़ गई। मदरसे में साहिल तालीम हासिल करने के बजाए शनिवार को चकमा देकर बाहर आ गया।