मीठे के शौकीन हैं तो चले आइए मुजफ्फरनगर, सऊदी अरब से अमेरिका तक प्रसिद्ध है यहां का खास पेड़ा
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भोपा से लगभग 12 किलोमीटर की दूर मुख्य मार्ग से दूर बसा सीकरी गांव पेड़े की वजह से जाना जाता है। वैसे तो सीकरी में पेड़ा विक्रेता की कई दुकानें हैं, लेकिन लगभग 80 - 90 वर्ष पहले इस कार्य को शुरू करने वाले एक परिवार की तीसरी पीढ़ी इस कार्य में लगी हुई है।
दिलशाद ने बताया कि 30 साल पहले उनके पिता गुलाम नबी का इंतकाल हो गया था। उसके बाद से हम इस कारोबार को संभाल रहे हैं। दिलशाद के दो और भाई शफात नबी व जब्बार भी गांव में ही पेड़े बनाने और बेचने का कार्य करते हैं। साथ ही अन्य कुछ लोगों के साथ ही गांव में लगभग आधा दर्जन पेड़ा की दुकान खुली हुई है।
विशेषता:- पेड़ा तैयार करने से पहले बर्तनों को ठीक प्रकार से साफ कर लिया जाता है। गांव दर गांव से दूध खरीद कर उसे धीमी आंच में कढ़ाई में काफी समय तक इतना पका दिया जाता है कि वह काफी कम मात्रा में रह जाता है, साथ ही उसका रंग ब्राउन हो जाता है। इसके बाद उसमें मीठा करने के लिए बूरा मिलाया जाता है। उसे इस प्रकार से तैयार किया जाता है कि पेड़ा मीठा होने के साथ-साथ उससे हल्का खट्टापन का स्वाद भी मिलता है।
शुगर वालों के लिए अलग से तैयार किया जाता है पेड़ा
पेड़ा विक्रेता दिलशाद, सफात नबी जब्बार मुन्ना ने बताया कि शुगर की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए पेड़े अलग से तैयार किया जाता है। इसमें दूध में मीठे का प्रयोग कम मात्रा में किया जाता है।
मेहमानों की खातिरदारी
सीकरी गांव में किसी भी वर्ग के लोगों में जब कोई मेहमान आता है तो उसके खातिरदारी के लिए सबसे पहले उसके सामने पेड़ा परोसा जाता है, इसके बाद ही अन्य कोई चीज खाने के लिए पेश की जाती है।
उर्स मेले में बढ़ जाती है पेड़ों की मांग
सीकरी प्रधान के पति इरफान उर्फ अप्पी प्रधान ने बताया कि सीकरी में उर्स मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं। उस समय यहां पेड़े की मांग कहीं अधिक बढ़ जाती है और दूरदराज से आने वाला हर श्रद्धालु सीकरी का पेड़ा लेकर जाता है।