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जांच में पांच बंदी मिले एचआईवी पॉजिटिव, एड्स नियंत्रण सोसायटी कर रही उपचार
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 11 Mar 2018 10:40 PM IST
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फाइल फोटो
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एचआईवी के डंक से जिला कारागार के बंदी भी नहीं बच पाए हैं। स्वास्थ्य परीक्षण की जांच में पांच बंदियों को एड्स की पुष्टि हो गई है। सूबे की जेलों में एचआईवी पॉजिटिव बंदियों की बढ़ती संख्या पर मानवाधिकार आयोग की गंभीरता के बाद जेल प्रशासन हरकत में आया है। प्रमुख सचिव कारागार अरविंद कुमार ने एड्स पीड़ित बंदियों की रिपोर्ट तलब की है।
प्रदेश की जेलों में एड्स संक्रमित बंदियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मुजफ्फरनगर जेल में निरुद्ध पांच बंदियों में एचआईवी पॉजिटिव मिला है। बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान हाल ही में जांच रिपोर्ट के आधार पर जेल प्रशासन ने पांच बंदी को एड्स पीड़ित होने की पुष्टि की है। उक्त बंदियों में कोई महिला नहीं है और न ही कोई सजायाफ्ता है।
सभी विचाराधीन बंदी है। उन्होंने कहा कि जिन पांच बंदियों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है, उनका इलाज जिला एड्स नियंत्रण सोसायटी की देखरेख में चल रहा है। मानवाधिकार आयोग ने यूपी की जेलों में एड्स ग्रसित बंदियों और कैदियों की संख्या बढ़ने पर चिंता जताई थी। शासन के निर्देश पर नए सिरे से एचआईवी पॉजिटिव की जांच चल रही है।
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जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि जेल में पांच एड्स पीड़ित बंदी है, जिनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। जिला एड्स नियंत्रण सोसायटी के प्रभारी एवं पूर्व सीएमओ डॉ वीके जौहरी ने कहा कि एचआईवी पॉजिटिव बंदियों को सुरक्षा और उपचार की काउंसलिंग की जाती है, क्योंकि बचाव ही संक्रमण फैलने से रोकता है।
प्रति माह जेल से बंदियों को जिला चिकित्सालय में बुलवा कर उपचार किया जाता है। साथ ही जेल के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ को एड्स पीड़ित बंदियों के उपचार का प्रशिक्षण दिया गया है। पीड़ित बंदियों के साथ संवेदनशील बनने का कार्यक्रम चलाया गया है। रिहाई के बाद भी इनके इलाज की व्यवस्था रहती है।
अभी तक मिले 356 पीड़ित
मुजफ्फरनगर। सूबे की जेलों में 31 जनवरी 2018 तक की रिपोर्ट में 356 विचाराधीन एवं सजायाफ्ता पुरुष और महिला बंदियों में एचआईवी पॉजिटिव पाया जा चुका है। अभी यह संख्या और बढ़ सकती है। प्रमुख सचिव कारागार ने मानवाधिकार आयोग की गंभीरता पर जेल अधीक्षकों को समय-समय पर कैदियों और बंदियों की जांच के निर्देश दिए है।
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प्रदेश की जेलों में एड्स संक्रमित बंदियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मुजफ्फरनगर जेल में निरुद्ध पांच बंदियों में एचआईवी पॉजिटिव मिला है। बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान हाल ही में जांच रिपोर्ट के आधार पर जेल प्रशासन ने पांच बंदी को एड्स पीड़ित होने की पुष्टि की है। उक्त बंदियों में कोई महिला नहीं है और न ही कोई सजायाफ्ता है।
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सभी विचाराधीन बंदी है। उन्होंने कहा कि जिन पांच बंदियों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है, उनका इलाज जिला एड्स नियंत्रण सोसायटी की देखरेख में चल रहा है। मानवाधिकार आयोग ने यूपी की जेलों में एड्स ग्रसित बंदियों और कैदियों की संख्या बढ़ने पर चिंता जताई थी। शासन के निर्देश पर नए सिरे से एचआईवी पॉजिटिव की जांच चल रही है।
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जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि जेल में पांच एड्स पीड़ित बंदी है, जिनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। जिला एड्स नियंत्रण सोसायटी के प्रभारी एवं पूर्व सीएमओ डॉ वीके जौहरी ने कहा कि एचआईवी पॉजिटिव बंदियों को सुरक्षा और उपचार की काउंसलिंग की जाती है, क्योंकि बचाव ही संक्रमण फैलने से रोकता है।
प्रति माह जेल से बंदियों को जिला चिकित्सालय में बुलवा कर उपचार किया जाता है। साथ ही जेल के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ को एड्स पीड़ित बंदियों के उपचार का प्रशिक्षण दिया गया है। पीड़ित बंदियों के साथ संवेदनशील बनने का कार्यक्रम चलाया गया है। रिहाई के बाद भी इनके इलाज की व्यवस्था रहती है।
अभी तक मिले 356 पीड़ित
मुजफ्फरनगर। सूबे की जेलों में 31 जनवरी 2018 तक की रिपोर्ट में 356 विचाराधीन एवं सजायाफ्ता पुरुष और महिला बंदियों में एचआईवी पॉजिटिव पाया जा चुका है। अभी यह संख्या और बढ़ सकती है। प्रमुख सचिव कारागार ने मानवाधिकार आयोग की गंभीरता पर जेल अधीक्षकों को समय-समय पर कैदियों और बंदियों की जांच के निर्देश दिए है।