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फतवा: कीमत या सदका देने वाले कि नहीं होगी कुर्बानी
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फतवा: कीमत या सदका देने वाले की नहीं होगी कुर्बानी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम ने ईद-उल-अजहा को लेकर जारी किए फतवे में कहा कि जैसे नमाज पढ़ने से रोजा और रोजा रखने से नमाज का फर्ज अदा नहीं होता। उसी तरह अगर कोई शख्स क़ुर्बानी करने के बजाए यह चाहे की वह जानवर या उसकी कीमत सदक़ा कर दें तो उसकी कुर्बानी अदा नहीं होगी और इबादत छोड़ने का गुनाहगार होगा।
रविवार को दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने दारुल इफ्ता विभाग में मुफ़्तियों से लिखित में सवाल किए थे। जिसके जवाब में मुफ़्तियों की खंडपीठ ने कहा कि जिन मुसलमानों पर क़ुर्बानी वाजिब है, उनके लिए क़ुर्बानी करना जरूरी है। हदीस का हवाला देते हुए मुफ़्तियों ने कहा कि जो शख्स क़ुर्बानी की हैसियत रखता है और क़ुर्बानी न करे वे ईदगाह में न आए। क़ुर्बानी का गोश्त (मांस) तीन हिस्सों में कर लिया जाए। एक हिस्सा अपने लिए, दूसरा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा असहाय व ग़रीबों में बांट दिया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम ने ईद-उल-अजहा को लेकर जारी किए फतवे में कहा कि जैसे नमाज पढ़ने से रोजा और रोजा रखने से नमाज का फर्ज अदा नहीं होता। उसी तरह अगर कोई शख्स क़ुर्बानी करने के बजाए यह चाहे की वह जानवर या उसकी कीमत सदक़ा कर दें तो उसकी कुर्बानी अदा नहीं होगी और इबादत छोड़ने का गुनाहगार होगा।
रविवार को दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने दारुल इफ्ता विभाग में मुफ़्तियों से लिखित में सवाल किए थे। जिसके जवाब में मुफ़्तियों की खंडपीठ ने कहा कि जिन मुसलमानों पर क़ुर्बानी वाजिब है, उनके लिए क़ुर्बानी करना जरूरी है। हदीस का हवाला देते हुए मुफ़्तियों ने कहा कि जो शख्स क़ुर्बानी की हैसियत रखता है और क़ुर्बानी न करे वे ईदगाह में न आए। क़ुर्बानी का गोश्त (मांस) तीन हिस्सों में कर लिया जाए। एक हिस्सा अपने लिए, दूसरा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा असहाय व ग़रीबों में बांट दिया जाए।
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