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...दो बेटों का बाप भी अब तो तन्हा है

Wed, 25 Nov 2020 11:29 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Nov 2020 11:29 PM IST
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... father of two sons is still lonely
बज्मे अदब व ह्यूमिनीटी फाउंडेशन ने कराया महफिले शेरो सुखन व सम्मान समारोह
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। साहित्यिक संस्था बज्मे अदब एवं सामाजिक संगठन ह्यूमिनीटी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में महफिले शेरो सुखन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

बुधवार को मोहल्ला अबुलमाली में कार्यक्रम का उद्घाटन समाजसेवी मुमताज अहमद ने फीता काटकर किया, जबकि शमां रोशन चिकित्सक डॉ. एस.ए. अजीज ने की। डॉ. शमीम देवबंदी ने पढ़ा-दो बेटों का बाप भी अब तो तन्हा है, कोई मनाली कोई जालंधर रहता है। शमीम किरतपुरी ने कुछ यूं फरमाया-आप को लेना है क्या कैसा भी है, वो मेरा भाई तो है जैसा भी है। नर देवबंदी ने पढ़ा-जमाना बड़ा पुरखतर हो गया है, हर इक ऐब तो हुनर हो गया है। चांद देवबंदी का कलाम यूं रहा-जहर तो इससे ज्यादा दिल में है इंसान के, सोचकर बदनाम खुद को छिपकली रोने लगी। डॉ. सादिक देवबंदी ने कहा-जिंदगी क्या है उससे पूछा तो, एक मुफ्लिस ने बेबसी लिखा। इस अवसर पर साहित्य, समाज, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान करने वाली विभूतियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इनमें मास्टर मुमताज अहमद, शमीम किरतपुरी, चांद देवबंदी, फैसल नूर और जफर हुसैन शामिल रहे। इस मौके पर डॉ. फैसल अहमद, अनवार हसीन, सलीम अंसारी, हाजी आशिक अली, सिराज अंसारी व चौधरी नौशाद आदि रहे।
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