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सब्जी की खेती करने वाले किसान आर्थिक तंगी से परेशान

Thu, 16 Apr 2020 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2020 11:21 PM IST
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Farmers worry about being indebted
गांव खादर में खेत से सब्जी तोड़ते किसान। - फोटो : KHATAULI
किसानों को सताने लगी कर्जदार होने की चिंता
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मोरना। सब्जी की खेती करने वाले किसान और मजदूर लॉकडाउन के चलते आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ठेके पर जमीन लेकर गंगा खादर शुकतीर्थ में मोरना क्षेत्र के ग्रामीणों ने लाखों रुपये की लागत से लौकी, काशीफल, खीरा, तरबूज, टमाटर, ककड़ी और बैगन, भिंडी आदि की फसलों की बुवाई कर रखी है। लागत ज्यादा मुनाफा कम होने की वजह से किसान व मजदूर कर्जदार होता जा रहा है। इन सबका कारण जिले से बाहर सब्जी की फसल न पहुंच पाना मुख्य वजह बना हुआ है।

गंगा खादर के हजारों हेक्टेयर में वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी से मोरना क्षेत्र के आसपास के गांवों के काफी संख्या में किसान और मजदूर परिवार दिसंबर व जनवरी माह से गंगा खादर की रेतीली जमीन में सब्जी की फसलों की बुवाई करते चले आ रहे हैं। सब्जी की फसलों को जंगली जानवर से बचाने के लिए खेतों की मेढ़ पर टांट-फूस दीवार बनाकर उसको तीन फुट तक मिट्टी से दबाया जाता है। रात दिन खेत मालिक मचान बनाकर फसल की रखवाली करने का जोखिम भी उठाने से गुरेज नहीं करता। अमर उजाला टीम को शुकतीर्थ गंगा खादर में सतपाल सैनी पत्नी शिमला, पुत्र रामकुमार, बिटटू, आदि के साथ खेतों से लौकी, काशीफल को एकत्र करते हुए मिले। इन लोगों ने बताया कि पहले खेतों की सब्जी दिल्ली देहरादून, साहिबाबाद, ऋषिकेश, ज्वालापुर हरिद्वार आदि की सब्जी मंडियों में भेजकर अच्छे दाम मिल जाते थे। हालांकि लॉकडाउन के चलते अबकी बार किसान व मजदूर मुजफ्फरनगर सब्जी मंडी तक सीमित रह गए हैं। सचिन, संदीप सैनी ने बताया कि छह बीघा सब्जी के खेतों से दो क्विंटल लौकी इकट्ठा हो रही है। फिलहाल सब्जी की बिक्री से लागत भी नहीं मिल पा रही है। मोरना निवासी किसान हासिम पुत्र नत्थू अंसारी पत्नी रफीकन, पुत्र हसीन, राशिद ने बताया कि 7 साल से वे 25 बीघा ठेके पर जमीन लेकर सब्जी की खेती कर रहे हैं, जिसमें चार लाख रुपये की लागत लग चुकी है। सब्जी बाहर नहीं जा पा रही है। पूर्व प्रधान मदनपाल उनके परिवार के प्रदीप, सचिन, रेखा, सीमा ने बताया कि पूर्वा हवा चलने से सब्जी की फूलों में रोग आने से सूख रहे हैं। पछवा हवा चलने से सब्जियों की फसलों में लगा रोग स्वत: ही समाप्त हो जाता है। अबकी बार बारिश ने 20 प्रतिशत फसलों को खराब कर दिया। किसानों को सब्जी की फसल उगाने के लिए साहूकारों से लिए गए कर्ज की चिंता भी सताने लगी है।

गांव  खादर में सब्जी एकत्र करते किसान।

गांव खादर में सब्जी एकत्र करते किसान।- फोटो : KHATAULI

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