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पिछले साल के इन दिनों को किसान कभी नहीं भूलेंगे : राकेश टिकैत
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पिछले साल के इन दिनों को किसान कभी नहीं भूलेंगे : राकेश टिकैत
मुजफ्फरनगर। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि पिछले साल के इन दिनों को किसान कभी नहीं भूल सकेंगे। आंदोलन में किसानों ने सात सौ से अधिक अपनों को खोया है। एमएसपी पर गारंटी कानून की लड़ाई जारी है और जारी रहेगी। किसानों को उनका अधिक दिलाए जाने तक संघर्ष करेंगे।
शनिवार को गृहमंत्री अमित शाह जिले में पहुंचे थे। इसी दौरान ट्वीट कर टिकैत ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सात सौ अपनों को खोया है। पिछले साल के यह दिन कैसे भुलाए जा सकते हैं। एमएसपी किसानों की रीढ़ और किसान चाहते हैं कि खेती का भविष्य बचाने के लिए एमएसपी गारंटी कानून बनना चाहिए। हिटलरशाही के दम पर आंदोलन खत्म करने का जो हर संभव षडयंत्र रचते हो, वे देश के नौजवानों, किसानों, मजदूरों और आदिवासियों के हित की बात कैसे कर सकते हैं। देश के किसान मजदूरों को वो 28 जनवरी भी याद है और वह रात जब अन्नदाता के विश्वास पर गहरा विश्वासघात किया गया था।
केंद्र सरकार एक तरफ जैविक खेती को प्रोत्साहन दे रही है और दूसरी तरफ विदेशों से जीएम खाद्यान्न के आयात को हरी झंडी दे रही है। नीतियों में असमानता को लेकर संशय है।
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मुजफ्फरनगर। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि पिछले साल के इन दिनों को किसान कभी नहीं भूल सकेंगे। आंदोलन में किसानों ने सात सौ से अधिक अपनों को खोया है। एमएसपी पर गारंटी कानून की लड़ाई जारी है और जारी रहेगी। किसानों को उनका अधिक दिलाए जाने तक संघर्ष करेंगे।
शनिवार को गृहमंत्री अमित शाह जिले में पहुंचे थे। इसी दौरान ट्वीट कर टिकैत ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सात सौ अपनों को खोया है। पिछले साल के यह दिन कैसे भुलाए जा सकते हैं। एमएसपी किसानों की रीढ़ और किसान चाहते हैं कि खेती का भविष्य बचाने के लिए एमएसपी गारंटी कानून बनना चाहिए। हिटलरशाही के दम पर आंदोलन खत्म करने का जो हर संभव षडयंत्र रचते हो, वे देश के नौजवानों, किसानों, मजदूरों और आदिवासियों के हित की बात कैसे कर सकते हैं। देश के किसान मजदूरों को वो 28 जनवरी भी याद है और वह रात जब अन्नदाता के विश्वास पर गहरा विश्वासघात किया गया था।
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केंद्र सरकार एक तरफ जैविक खेती को प्रोत्साहन दे रही है और दूसरी तरफ विदेशों से जीएम खाद्यान्न के आयात को हरी झंडी दे रही है। नीतियों में असमानता को लेकर संशय है।
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