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गठवाला खाप के गांव फुगाना में हुक्का चौपाल में बजट चर्चा करते चौधरी

Mon, 03 Feb 2020 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Feb 2020 12:27 AM IST
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Farmers' fascination with farming started to break
किसानों का खेती से मोह होने लगा भंग
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। गठवाला खाप के गांव फुुगाना में हुक्का चौपाल में बजट पर चर्चा करते हुए चौधरियों ने कहा कि बजट ने किसानों और गरीबों की कमर तोड़ दी है। बजट से शिक्षित बेरोजगार युवकों को नौकरी मिलना मुश्किल हो जाएगा। बढ़ती उत्पादन लागत के बाद भी फसल का सही मूल्य न मिलने से किसानों का खेती से मोह भंग होने लगा है। किसान कर्ज में डूबता जा रहा है। बैंक में खाते एनपीए होने लगे हैं। गठवाला खाप के चौधरियों का कहना है कि भाजपा सरकार किसानों की कब्र खोदने पर तुली है।

गन्ना मूल्य में वृद्धि नहीं होने से किसान स्वयं को असहाय महसूस कर रहा था। किसानों की निगाहें फिर बजट पर लग गई थी। खेती हर किसान को बजट से बहुत सारी उम्मीदें थी। दोगुनी आय का सपना दिखाने वाली सरकार शायद बजट में किसानों को कुछ राहत देगी। किसानों की यह सोच धरी की धरी रह गई। गठवाला खाप के गांव फुगाना में चौधरी मुकेश मलिक के घेर में हुक्का गुड़गुड़ाते चौधरी निराश दिखाई दिए। बजट पर चिंता व्यक्त करते हुए चौधरी मुकेश मलिक ने कहा कि भाजपा की सरकार में पिछले दो वर्षों से गन्ने का रेट न बढ़ने से किसान स्वयं का ठगा महसूस कर रहा है। भाजपा को वोट देने का किसान को पछतावा है। किसान की उम्मीदें बजट पर टिकी हुई थी । बजट ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पूर्व प्रधान चौधरी थाम सिंह ने कहा कि सपा की सरकार में किसानों पर खूब जुल्म हुआ, सितंबर 2013 के दंगे में उनके बेटों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज हुए। किसानों ने खुलकर भाजपा का साथ दिया। भाजपा सरकार ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी। घरेलू व ट्यूबवेल की बिजली की दरें आसमान पर चली गई। रसायनिक खाद, बीज व दवाईयों के दाम बढ़ गए। किसानों के गन्ने का भुगतान भी सरकार समय पर दिलवाने में असमर्थ साबित हुई। चौधरी निरंजन सिंह ने कहा कि देश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। विकास की दर निरंतर गिरती जा रही है। सरकार को कोई चिंता नही है। बजट में भी शिक्षित बेरोजगारों के लिए नौकरी देने की कोई बात नहीं कहीं गई। सभी विभागों में कर्मचारियों का टोटा है। सरकार नई नियुक्तियां नहीं कर पा रही है। देश का नवयुवक व किसान बर्बादी के कगार पर खड़ा है। संजय मलिक ने कहा कि सरकार पहले से ही कारपोरेट घरानों की चिंता करती आई है। उनके कर्जे माफ कर एनपीए कम करने का प्रयास किया जा रहा है। फसलों का उचित दाम, गन्ना मूल्य समय पर न मिलने व उत्पादन लागत में निरंतर वृद्धि होने के कारण देश का किसान कर्ज में डूबता जा रहा है। इस मौके पर चौ. कुलदीप मलिक, धर्मवीर सिंह, राकेश, बोबीलाल, ओम सिंह, रामकिशन, राजन और कपिल आदि मौजूद रहे।
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