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अपनों को खो चुके परिवार केवल पर्व की रस्म निभाएंगे
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अपनों को खो चुके परिवार केवल पर्व की रस्म निभाएंगे
मुजफ्फरनगर। कोविड महामारी ने कई परिवारों को जिंदगीभर नहीं भरे जाने वाला जख्म दे गया है। ऐसे में इन परिवार के लोग केवल त्योहार की रस्म अदायगी करेंगे।
कोरोना की मार झेलते हुए आठ महीने से ज्यादा बीत गए। बीमारी के शिकार काफी लोगों के घरों की रौनक गायब हो गई। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया। शहर के हनुमान पुरी निवासी नरेंद्र अग्रवाल सरकारी ठेकेदार हैं। उनका नगर पालिका में पेमेंट लॉकडाउन से पहले फंसा है। परिवार में भाई और मोहल्ले में तीन लोगों के आकस्मिक निधन से दिवाली की खुशियां बदरंग हो गई। इस परिवार के लोग सिर्फ त्योहार की रस्म निभाएंगे।
भोपा रोड निवासी सुभाष मखीजा बताते हैं कि परिवार में भांजे सोनू की मृत्यु और कामकाज में आर्थिक मंदी ने हर खुशियों में ग्रहण लगा दिया। प्रकाश चौक निवासी अधिवक्ता अजय शर्मा का मंतव्य है कि कचहरी में कोरोना काल में अधिकांश कार्यों पर ब्रेक लगा हुआ है। अधिवक्ताओं के सामने आजीविका चलाना मुश्किल है। ऐसे में दीपावली फीकी रहना स्वाभाविक है। चरथावल के महाब्रह्मणान निवासी रेखा गोयल के पति राकेश की लीवर के इलाज के दौरान एम्स में कोरोना के लक्षण आ गए और असमय उनकी मृत्यु हो गई। परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। रेखा के पति ने बड़े शौक से मकान बनवाया था। उसमें इस बार पहली दिवाली उत्साहपूर्वक मनानी थी, लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी खुशियों पर ग्रहण लग गया।
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मुजफ्फरनगर। कोविड महामारी ने कई परिवारों को जिंदगीभर नहीं भरे जाने वाला जख्म दे गया है। ऐसे में इन परिवार के लोग केवल त्योहार की रस्म अदायगी करेंगे।
कोरोना की मार झेलते हुए आठ महीने से ज्यादा बीत गए। बीमारी के शिकार काफी लोगों के घरों की रौनक गायब हो गई। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया। शहर के हनुमान पुरी निवासी नरेंद्र अग्रवाल सरकारी ठेकेदार हैं। उनका नगर पालिका में पेमेंट लॉकडाउन से पहले फंसा है। परिवार में भाई और मोहल्ले में तीन लोगों के आकस्मिक निधन से दिवाली की खुशियां बदरंग हो गई। इस परिवार के लोग सिर्फ त्योहार की रस्म निभाएंगे।
भोपा रोड निवासी सुभाष मखीजा बताते हैं कि परिवार में भांजे सोनू की मृत्यु और कामकाज में आर्थिक मंदी ने हर खुशियों में ग्रहण लगा दिया। प्रकाश चौक निवासी अधिवक्ता अजय शर्मा का मंतव्य है कि कचहरी में कोरोना काल में अधिकांश कार्यों पर ब्रेक लगा हुआ है। अधिवक्ताओं के सामने आजीविका चलाना मुश्किल है। ऐसे में दीपावली फीकी रहना स्वाभाविक है। चरथावल के महाब्रह्मणान निवासी रेखा गोयल के पति राकेश की लीवर के इलाज के दौरान एम्स में कोरोना के लक्षण आ गए और असमय उनकी मृत्यु हो गई। परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। रेखा के पति ने बड़े शौक से मकान बनवाया था। उसमें इस बार पहली दिवाली उत्साहपूर्वक मनानी थी, लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी खुशियों पर ग्रहण लग गया।
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