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कब्जों से खत्म हो रहा तालाबों का अस्तित्व

Thu, 07 Apr 2022 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Apr 2022 11:39 PM IST
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Existence of ponds ending due to constipation
भोपा में तालाब - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। तालाबों को बचाने की मुहिम परवान चढ़ती नजर नहीं आ रही है। कहीं तालाब गंदगी से अटे पड़े हैं तो कहीं जमीन को कब्जा लिया गया है। सबसे बड़ा नुकसान यह है कि तालाब खत्म होने से जलस्तर भी प्रभावित हो रहा है। तालाबों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में पानी घरों तक पहुंच जाता है।
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52 बीघे का तालाब रह गया आठ बीघा
जानसठ कसबे में कभी तालाब का रकबा 52 बीघे था, लेकिन कब्जों के कारण वर्तमान में मौके पर सिर्फ आठ बीघा रह गया है। आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया है। समय पर सफाई नहीं होने के कारण भी मुश्किलें खड़ी हो रही है।
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अस्तित्व खो रहा दूबी वाला जौहड़
भोपा कस्बे का दूबी वाला तालाब कभी बहुत बड़ा था। लेकिन अवैध कब्जे के कारण यह तालाब का रकबा कम हो रहा है। तालाब पूरी तरह कबाड़ से अटा हुआ है। तालाब से पानी की निकासी भी कहीं नहीं है। बरसात के मौसम में तालाब का पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। एक दशक से भी अधिक समय से लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं।
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तालाब पर बन गई दुकानें
छपार में हाईवे के किनारे तालाब का रकबा कभी एक सौ बीघे का था, लेकिन वर्तमान में जमीन सिर्फ 50 बीघा ही रह गई है। कुछ लोगों ने हाईवे के किनारे पर कब्जा कर दुकानें बना ली है।
वर्जन :
तालाबों का चिन्हीकरण किया जा रहा है। मनरेगा के अंतर्गत सफाई कराई जाएगा। आदर्श तालाब के लिए चिन्हीकरण की प्रक्रिया चल रही है। - आलोक कुमार यादव, सीडीओ
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