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प्रवासी मजदूरों के सामने रोजगार का संकट

Sun, 07 Jun 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2020 11:39 PM IST
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Employment crisis in front of workers in Muzaffarnagar
शाहपुर में प्रवासी श्रमिक, जिन्हें प्रशासन की ओर से कोई रोजगार नहीं मिला। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
प्रवासी मजदूरों के सामने रोजगार का संकट
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मुजफ्फरनगर। जिले में प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। जनपद में अब तक दस हजार 809 प्रवासी श्रमिक आ चुके हैं। इनमें से केवल दो हजार को ही मनरेगा में काम मिल सका है। जनपद में आए प्रवासी श्रमिकों में से 70 प्रतिशत शहरी क्षेत्र के हैं, जिन्हें मनरेगा का लाभ भी नहीं मिल सकता है।
कोरोना महामारी के चलते बड़ी संख्या में श्रमिकों का आदान-प्रदान हुआ है। अन्य प्रदेशों में काम करने वाले जिले के दस हजार 809 श्रमिक जिले में आए हैं, जबकि जनपद से अब तक 8603 श्रमिक गए भी हैं। जनपद में बाहर से जो श्रमिक आए हैं उनमें सत्तर प्रतिशत शहरी क्षेत्र के हैं। केवल तीस प्रतिशत ही ग्रामीण क्षेत्र के हैं। परियोजना निदेशक जयसिंह यादव ने बताया कि अब तक मनरेगा में दो हजार प्रवासी श्रमिकों को रोजगार दिया जा चुका है। शहरी क्षेत्रों के श्रमिकों के सामने रोजगार की बड़ी समस्या है। जो श्रमिक बाहर से आए हैं उन्हें केवल सस्ते गल्ले की दुकान से राशन ही मिल पाया है। अन्य कोई सुविधा सरकार से नहीं मिली है। परिवारों का गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है।
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शाहपुर। क्षेत्र में अन्य प्रदेशों में मजदूरी कर अपना व अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले कस्बे के युवाओं का कहना है कि वह कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन के बाद से खाली है, उन्हें परिवार को चलाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे के मोहल्ला गोकुलपुर निवासी दीन मोहम्मद , रिजवान , योगेंद्र , सुनील , यूनुस , शौकीन , साजिद , राशिद , आसिफ , रियाज आदि अन्य प्रदेशों कर्नाटक , तमिलनाडु , मध्यप्रदेश , महाराष्ट्र आदि में फेरी लगाकर कपड़ा , मिक्सी व गैस चूल्हे आदि बेचकर मजदूरी करने का कार्य करते थे। कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन होने के बाद ये सभी कस्बे में लौट आए। कुछ मजदूरों ने बताया कि परिवार चलाने को लेकर उन्होंने उधार लिया है, जिससे उनके ऊपर कर्जा हो गया है। शासन-प्रशासन भी उनकी और ध्यान नहीं दे रहा है। सरकार द्वारा राशन का गेहूं व चावल ही मात्र इनको मिला है।
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