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Muzaffarnagar News: कोचिंग सेंटरों की फायर एनओसी पर शिक्षा विभाग ने मांगी स्पष्टता
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- 50 से कम क्षमता वाले कोचिंग सेंटर की फायर एनओसी पर उठे प्रश्न
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिले में कोचिंग सेंटरों के सत्यापन के दौरान फायर एनओसी को लेकर असमंजस की स्थिति सामने आई है। विशेषकर ग्राउंड फ्लोर पर संचालित 50 से कम क्षमता वाले कोचिंग सेंटरों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है या नहीं, इसे लेकर शिक्षा विभाग ने अग्निशमन विभाग से परामर्श मांगा है। अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के बाद जांच प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
लखनऊ अग्निकांड के बाद जिले में अवैध रूप से चल रहे 10 से अधिक कोचिंग सेंटर सील किए गए। नगर क्षेत्र और देहात में पंजीकृत और अपंजीकृत कोचिंग सेंटर की जांच के लिए डीआईओएस ने चार तहसील स्तरीय समिति गठित की। समिति को जांच रिपोर्ट के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है लेकिन निरीक्षण के दौरान फायर एनओसी को लेकर 50 से कम क्षमता वाले कोचिंग सेंटर की जांच किसी नतीजे पर पहुंच नहीं पा रही है।
-- ग्राउंड फ्लोर पर एनओसी को लेकर असमंजस
सदर तहसील समिति के निरीक्षण के दौरान ग्राउंड फ्लोर पर बने कोचिंग सेंटर संचालकों ने बताया कि फायर विभाग से भी वार्ता के बाद पता चला कि अगर सेंटर ग्राउंड तल पर है और बच्चों की संख्या 50 या उससे भी कम है तो सिलिंडर और रेत की बाल्टी पर्याप्त होती है। कोचिंग संस्थानों के इस तर्क को लेकर असमंजस बना हुआ। - आशीष द्विवेदी, सदर तहसील समिति सदस्य
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-- अग्निशमन विभाग से परामर्श के बाद ही होगी कार्रवाई
समिति की जांच में सबसे ज्यादा समस्या कम संख्या वाले कोचिंग सेंटर को लेकर आ रही है। अग्निशमन विभाग से परामर्श के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - हरिकेश यादव, डीआईओएस
-- - एनओसी सुरक्षा मानकों के आधार पर ही दी जाती है। ग्राउंड फ्लोर पर होने पर भी अन्य मानक जैसे निकास मार्ग, अग्निशमन यंत्र, संस्थान का क्षेत्रफल, ऊर्जा संयंत्रों का रखरखाव और अन्य मानकों का पालन भी होना जरूरी है। फायर एनओसी को लेकर आ रही समस्याओं के लिए समिति का सहयोग किया जाएगा। - अनुराग कुमार अग्निशमन अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिले में कोचिंग सेंटरों के सत्यापन के दौरान फायर एनओसी को लेकर असमंजस की स्थिति सामने आई है। विशेषकर ग्राउंड फ्लोर पर संचालित 50 से कम क्षमता वाले कोचिंग सेंटरों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है या नहीं, इसे लेकर शिक्षा विभाग ने अग्निशमन विभाग से परामर्श मांगा है। अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के बाद जांच प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
लखनऊ अग्निकांड के बाद जिले में अवैध रूप से चल रहे 10 से अधिक कोचिंग सेंटर सील किए गए। नगर क्षेत्र और देहात में पंजीकृत और अपंजीकृत कोचिंग सेंटर की जांच के लिए डीआईओएस ने चार तहसील स्तरीय समिति गठित की। समिति को जांच रिपोर्ट के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है लेकिन निरीक्षण के दौरान फायर एनओसी को लेकर 50 से कम क्षमता वाले कोचिंग सेंटर की जांच किसी नतीजे पर पहुंच नहीं पा रही है।
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सदर तहसील समिति के निरीक्षण के दौरान ग्राउंड फ्लोर पर बने कोचिंग सेंटर संचालकों ने बताया कि फायर विभाग से भी वार्ता के बाद पता चला कि अगर सेंटर ग्राउंड तल पर है और बच्चों की संख्या 50 या उससे भी कम है तो सिलिंडर और रेत की बाल्टी पर्याप्त होती है। कोचिंग संस्थानों के इस तर्क को लेकर असमंजस बना हुआ। - आशीष द्विवेदी, सदर तहसील समिति सदस्य
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समिति की जांच में सबसे ज्यादा समस्या कम संख्या वाले कोचिंग सेंटर को लेकर आ रही है। अग्निशमन विभाग से परामर्श के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - हरिकेश यादव, डीआईओएस