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बुखार से तपते तेजलहेड़ा में पहुंचे डॉक्टर, 163 लोगों की जांच
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गांव तेजलहेड़ा में चिकित्सा शिविर में मरीजों को जांच के बाद देते स्वास्थ्य कर्मी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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छपार । क्षेत्र के तेजलहेड़ा गांव में आखिरकार स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। स्वास्थ्य कैंप में 163 रोगियों की जांच की गई। वायरल, टाइफाइड के मरीज मिलें। एक व्यक्ति की हालत गंभीर है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है गांव में मलेरिया का प्रकोप नहीं है।
पिछले एक माह से गांव के लोग बुखार की चपेट में है। वर्तमान में यहां के करीब 65 मरीज बाहर अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज करा रहे हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा शिविर का आयोजन कर 163 लोगों की जांच की गई।
डॉक्टर सुमित कुमार ने बताया कि अधिकांश लोग सामान्य बुखार, वायरल व टाइफाइड से पीड़ित हैं। मलेरिया की भी जांच हुई किसी को मलेरिया नहीं है। सिर्फ दो मरीज गंभीर मिले हैं, उनके रक्त की जांच के लिए सेंपल लिया गया है। रिपोर्ट आने पर ही पता चल सकेगा कि कौन-से बुखार से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य कैंप में गोविंद, सोनू व प्रशांत कर्मी भी मौजूद रहे।
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छह मौत हुई तो पहुंचे डॉक्टर
क्षेत्र के गांव तेजलहेडा में बुखार से महिला व बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो चुकी है। गांव फिलहाल बुखार की चपेट में हैं। अधिकतर घरों में बुखार के मरीज हैं, जिससे ग्रामीण दहशत में है। मरीजों ने डॉक्टरों को बताया कि उन्हें सर्दी लगती है। कंपकंपी छूटती है। इसके बाद बुखार चढ़ जाता है। गांव में इलाज नहीं मिलने के बाद निजी डॉक्टरों के यहां उपचार कराने की मजबूरी है।
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पिछले एक माह से गांव के लोग बुखार की चपेट में है। वर्तमान में यहां के करीब 65 मरीज बाहर अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज करा रहे हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा शिविर का आयोजन कर 163 लोगों की जांच की गई।
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डॉक्टर सुमित कुमार ने बताया कि अधिकांश लोग सामान्य बुखार, वायरल व टाइफाइड से पीड़ित हैं। मलेरिया की भी जांच हुई किसी को मलेरिया नहीं है। सिर्फ दो मरीज गंभीर मिले हैं, उनके रक्त की जांच के लिए सेंपल लिया गया है। रिपोर्ट आने पर ही पता चल सकेगा कि कौन-से बुखार से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य कैंप में गोविंद, सोनू व प्रशांत कर्मी भी मौजूद रहे।
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छह मौत हुई तो पहुंचे डॉक्टर
क्षेत्र के गांव तेजलहेडा में बुखार से महिला व बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो चुकी है। गांव फिलहाल बुखार की चपेट में हैं। अधिकतर घरों में बुखार के मरीज हैं, जिससे ग्रामीण दहशत में है। मरीजों ने डॉक्टरों को बताया कि उन्हें सर्दी लगती है। कंपकंपी छूटती है। इसके बाद बुखार चढ़ जाता है। गांव में इलाज नहीं मिलने के बाद निजी डॉक्टरों के यहां उपचार कराने की मजबूरी है।