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अंग्रेजों की यातनाओं से भी कदम नहीं डगमगाए
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मां तुझे प्रमाण की खबर के फोटो। सोरम गांव निवासी चौधरी सुभाष बालियान।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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शाहपुर। स्वतंत्रता आंदोलन में सोरम गांव के नौजवानों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। अंग्रेजों द्वारा दी गई घोर यातनाओं के बाद भी उनके कदम नहीं डगमगाए और अधिक जोश के साथ उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत का विरोध किया।
सोरम गांव के 90 वर्षीय चौधरी हरनारायण सिंह बताते है कि उनके पारिवारिक बाबा बाबू राम सिंह ने सर्व खाप मंत्री चौधरी कबूल सिंह, चौधरी बलवंत सिंह छोटा, चौधरी बलवंत सिंह मोटा आदि के साथ मिलकर देश को आजाद कराने के लिए भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान अंग्रेजों ने उन्हें जेल भेजने के साथ यातनाएं भी दीं लेकिन उसकी परवाह न करते हुए उनके अंदर देश को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए और अधिक जुनून पैदा होता था। इसके अलावा 1857 में स्वतंत्रता आंदोलन में गांव के ही चौधरी शोसिंह, लक्ष्मण सिंह, शोभाराम, हेमचंद, सूरजमल, घासीराम, देवी सिंह शामिल हुए। 1939 में हैदराबाद सत्याग्रह व 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भी गांव के नौजवानों ने भाग लिया था।
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चौधरी कबूल सिंह को किया था जिला बदर
शाहपुर सर्व खाप मंत्री चौधरी सुभाष बालियान बताते हैं कि उनके बाबा सर्वखाप मंत्री स्व. चौधरी कबूल सिंह ने देश की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया, जिसके चलते उन्हें 1935 में उस समय के कलेक्टर ने छह माह के लिए जिला बदर कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने 1939 के हैदराबाद सत्याग्रह व 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। वह कई बार जेल भी गए। देश आजाद होने के बाद उन्होंने गांव सोरम में 1950 में सर्व खाप पंचायत आयोजित की। उन्होंने बताया कि उनके बाबा स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले नवयुवकों के साथ बैठकें आयोजित करते थे और विचार-विमर्श कर रणनीति बनाते थे।
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चौधरी बलवंत सिंह को मिला था ताम्रपत्र
शाहपुर। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले चौधरी बलवंत सिंह मोटा के प्रपौत्र चौधरी सुरेंद्र सिंह ने का कहना है कि उनके परिवार के लोगों ने देश को आजाद कराने की लड़ाई लड़ी, जिससे वह स्वयं को गौरवांवित महसूस करते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को देखते हुए आजादी के 25वें वर्ष 15 अगस्त 1972 को प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने उन्हें तामपत्र देकर सम्मानित किया था ।
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बैलगाड़ी में बांधकर यातनाएं दी
शाहपुर। आजादी की लड़ाई में भाग लेने वाले चौधरी बलवंत सिंह छोटा के पौत्र 87 वर्षीय महेंद्र सिंह ने बताया कि उनके बाबा ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि एक बार तो अंग्रेजों ने उनके बाबा को घोर यातना दी थी। अंग्रेजों ने उन्हें बैलगाड़ी से बांध दिया था और उन्हें शामली तक ले गए थे। वह जमीन पर गिर गए, बावजूद इसके अंग्रेज उन्हें घसीटते हुए ले गए जिससे उन्हें काफी चोटें आई थी। उनकी देशभक्ति देख अंग्रेज अफसर बौखला गए थे।
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अंग्रेजों के विरुद्ध रणनीति बनाते थे शोसिंह
शाहपुर। अमित कुमार का कहना है कि उनके पूर्वज चौ. शोसिंह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। उनके बाबा चौधरी अतर सिंह सरपंच बताते थे कि उनके परिवार के चौधरी शोसिंह ने देश को आजाद कराने में क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई। वह गुप्त बैठक कर अंग्रेजों के विरुद्ध रणनीति तैयार करते थे, जिसे अन्य नवयुवक उनके साथ मिल अंजाम देते थे। वह कई मर्तबा जेल गए और यातना सही। उनके द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में किए गए कार्यों को देखते हुए गांव की एक पट्टी का नामकरण उनके नाम पर किया गया, जिसे आज भी शोसिंह पट्टी के नाम से जाना जाता है।
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सोरम गांव के 90 वर्षीय चौधरी हरनारायण सिंह बताते है कि उनके पारिवारिक बाबा बाबू राम सिंह ने सर्व खाप मंत्री चौधरी कबूल सिंह, चौधरी बलवंत सिंह छोटा, चौधरी बलवंत सिंह मोटा आदि के साथ मिलकर देश को आजाद कराने के लिए भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान अंग्रेजों ने उन्हें जेल भेजने के साथ यातनाएं भी दीं लेकिन उसकी परवाह न करते हुए उनके अंदर देश को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए और अधिक जुनून पैदा होता था। इसके अलावा 1857 में स्वतंत्रता आंदोलन में गांव के ही चौधरी शोसिंह, लक्ष्मण सिंह, शोभाराम, हेमचंद, सूरजमल, घासीराम, देवी सिंह शामिल हुए। 1939 में हैदराबाद सत्याग्रह व 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भी गांव के नौजवानों ने भाग लिया था।
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चौधरी कबूल सिंह को किया था जिला बदर
शाहपुर सर्व खाप मंत्री चौधरी सुभाष बालियान बताते हैं कि उनके बाबा सर्वखाप मंत्री स्व. चौधरी कबूल सिंह ने देश की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया, जिसके चलते उन्हें 1935 में उस समय के कलेक्टर ने छह माह के लिए जिला बदर कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने 1939 के हैदराबाद सत्याग्रह व 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। वह कई बार जेल भी गए। देश आजाद होने के बाद उन्होंने गांव सोरम में 1950 में सर्व खाप पंचायत आयोजित की। उन्होंने बताया कि उनके बाबा स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले नवयुवकों के साथ बैठकें आयोजित करते थे और विचार-विमर्श कर रणनीति बनाते थे।
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चौधरी बलवंत सिंह को मिला था ताम्रपत्र
शाहपुर। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले चौधरी बलवंत सिंह मोटा के प्रपौत्र चौधरी सुरेंद्र सिंह ने का कहना है कि उनके परिवार के लोगों ने देश को आजाद कराने की लड़ाई लड़ी, जिससे वह स्वयं को गौरवांवित महसूस करते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को देखते हुए आजादी के 25वें वर्ष 15 अगस्त 1972 को प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने उन्हें तामपत्र देकर सम्मानित किया था ।
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बैलगाड़ी में बांधकर यातनाएं दी
शाहपुर। आजादी की लड़ाई में भाग लेने वाले चौधरी बलवंत सिंह छोटा के पौत्र 87 वर्षीय महेंद्र सिंह ने बताया कि उनके बाबा ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि एक बार तो अंग्रेजों ने उनके बाबा को घोर यातना दी थी। अंग्रेजों ने उन्हें बैलगाड़ी से बांध दिया था और उन्हें शामली तक ले गए थे। वह जमीन पर गिर गए, बावजूद इसके अंग्रेज उन्हें घसीटते हुए ले गए जिससे उन्हें काफी चोटें आई थी। उनकी देशभक्ति देख अंग्रेज अफसर बौखला गए थे।
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अंग्रेजों के विरुद्ध रणनीति बनाते थे शोसिंह
शाहपुर। अमित कुमार का कहना है कि उनके पूर्वज चौ. शोसिंह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। उनके बाबा चौधरी अतर सिंह सरपंच बताते थे कि उनके परिवार के चौधरी शोसिंह ने देश को आजाद कराने में क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई। वह गुप्त बैठक कर अंग्रेजों के विरुद्ध रणनीति तैयार करते थे, जिसे अन्य नवयुवक उनके साथ मिल अंजाम देते थे। वह कई मर्तबा जेल गए और यातना सही। उनके द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में किए गए कार्यों को देखते हुए गांव की एक पट्टी का नामकरण उनके नाम पर किया गया, जिसे आज भी शोसिंह पट्टी के नाम से जाना जाता है।

सोरम निवासी अमित कुमार।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

सोरम निवासी ग्रामीण सुरेंद्र सिंह।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

सोरम गांव के ग्रामीण अपने परिजनों को मिला ताम्रपत्र दिखाते हुए।- फोटो : MUZAFFARNAGAR