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Muzaffarnagar News: डीएम और डीएफओ पहुंचे हैदरपुर, शासन को लिखी जाएगी चिट्ठी
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बोले- वेटलैंड से पानी निकासी का समय बढ़ाए जाने की कर रहे तैयारी
22 जनवरी के अंक में अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। हैदपुर वेटलैंड से पानी निकाले जाने के मामले में डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी और डीएफओ कन्हैया पटेल ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। शासन को चिट्ठी लिखकर भविष्य में यहां से पानी फरवरी के अंत में निकाले जाने का सुझाव रखा जाएगा।
रामसर स्थल हैदरपुर वेटलैंड से पानी निकालकर गंगा में भेजा जा चुका है। पानी निकालने के कारण यहां से विदेशी पक्षी समय से पहले ही उड़ान भर गए हैं। ऐसे में पर्यटकों के हाथ मायूसी लग रही है। अब यहां पर इक्का-दुक्का जगह ही पक्षी दिखाई दे रहे हैं, जबकि जलीय जीवों के सामने जीवन का संकट खड़ा हो गया। अधिकतर मछलियां भी मर गई हैं। 22 जनवरी के अंक में अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसका संज्ञान लेकर रविवार को डीएम और डीएफओ हैदपुर वेटलैंड पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली। डीएफओ ने बताया कि शासन को पत्र लिखकर भविष्य में पानी निकाले जाने का समय बढ़ाने की बात की जाएगी।
2022 में मिली थी रामसर स्थल की मान्यता
हैदरपुर वेटलैंड को रामसर स्थल के रूप में पिछले साल मान्यता मिल गई थी। गंगा और सोलानी नदी के बीच छह हजार हेक्टेयर में फैले हैदरपुर वेटलैंड जैव विविधता का केंद्र बना हुआ है।
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ये है रामसर साइट
ईरान के शहर रामसर में दो फरवरी सन 1971 को एक सम्मेलन हुआ। इसमें शामिल राष्ट्रों ने वेटलैंड के संरक्षण से संबंधित एक समझौता हुआ और यह 21 दिसंबर 1975 से प्रभाव में आ गया। रामसर स्थल की परिभाषा के अनुसार वेटलैंड ऐसा स्थान है, जहां वर्ष में कम से कम आठ माह पानी भरा रहता हो और 200 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी रहती हो।
पानी निकालने की खूब हुई आलोचना
पक्षी विशेषज्ञ आशीष लोया का कहना है कि गलत समय पर पानी निकाला गया है। समय से पहले ही विदेशी परिंदे चले गए गए हैं। देशभर में पक्षी और पर्यावरण प्रेमी मामले की आलोचना और ट्वीट कर रहे हैं। पर्यावरण बचाने के लिए हम सबको मिलकर आगे बढ़ना होगा।
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22 जनवरी के अंक में अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। हैदपुर वेटलैंड से पानी निकाले जाने के मामले में डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी और डीएफओ कन्हैया पटेल ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। शासन को चिट्ठी लिखकर भविष्य में यहां से पानी फरवरी के अंत में निकाले जाने का सुझाव रखा जाएगा।
रामसर स्थल हैदरपुर वेटलैंड से पानी निकालकर गंगा में भेजा जा चुका है। पानी निकालने के कारण यहां से विदेशी पक्षी समय से पहले ही उड़ान भर गए हैं। ऐसे में पर्यटकों के हाथ मायूसी लग रही है। अब यहां पर इक्का-दुक्का जगह ही पक्षी दिखाई दे रहे हैं, जबकि जलीय जीवों के सामने जीवन का संकट खड़ा हो गया। अधिकतर मछलियां भी मर गई हैं। 22 जनवरी के अंक में अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसका संज्ञान लेकर रविवार को डीएम और डीएफओ हैदपुर वेटलैंड पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली। डीएफओ ने बताया कि शासन को पत्र लिखकर भविष्य में पानी निकाले जाने का समय बढ़ाने की बात की जाएगी।
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2022 में मिली थी रामसर स्थल की मान्यता
हैदरपुर वेटलैंड को रामसर स्थल के रूप में पिछले साल मान्यता मिल गई थी। गंगा और सोलानी नदी के बीच छह हजार हेक्टेयर में फैले हैदरपुर वेटलैंड जैव विविधता का केंद्र बना हुआ है।
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ये है रामसर साइट
ईरान के शहर रामसर में दो फरवरी सन 1971 को एक सम्मेलन हुआ। इसमें शामिल राष्ट्रों ने वेटलैंड के संरक्षण से संबंधित एक समझौता हुआ और यह 21 दिसंबर 1975 से प्रभाव में आ गया। रामसर स्थल की परिभाषा के अनुसार वेटलैंड ऐसा स्थान है, जहां वर्ष में कम से कम आठ माह पानी भरा रहता हो और 200 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी रहती हो।
पानी निकालने की खूब हुई आलोचना
पक्षी विशेषज्ञ आशीष लोया का कहना है कि गलत समय पर पानी निकाला गया है। समय से पहले ही विदेशी परिंदे चले गए गए हैं। देशभर में पक्षी और पर्यावरण प्रेमी मामले की आलोचना और ट्वीट कर रहे हैं। पर्यावरण बचाने के लिए हम सबको मिलकर आगे बढ़ना होगा।