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दिव्या काकरान को विश्व कुश्ती रैंकिंग में दूसरा स्थान
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दिव्या काकरान को विश्व कुश्ती रैंकिंग में दूसरा स्थान
मंसूरपुर (मुजफ्फरनगर)। विश्व कुश्ती संघ की ओर से जारी विश्व महिला कुश्ती रैंकिंग में 72 किलोग्राम भार वर्ग में दिव्या काकरान को दूसरा स्थान मिला है। अर्जुन अवार्डी दिव्या की इस उपलब्धि पर उससे गांव पुरबालियान तथा क्षेत्र में खुशी की लहर है।
दिव्या के पिता सूरजवीर पहलवान ने बताया कि 13 अप्रैल से 18 अप्रैल तक कजाकिस्तान में हुई सीनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में दिव्या ने 72 किलोग्राम भार वर्ग में कोरिया के पहलवान को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। इसी के आधार पर विश्व कुश्ती संघ द्वारा 72 किलोग्राम भार वर्ग में महिला रैंकिंग में दिव्या को दूसरा स्थान मिला है। प्रथम स्थान यूक्रेन की महिला पहलवान को दिया गया है। उन्होंने बताया कि दिव्या अब तक एशियन कुश्ती चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 75 से अधिक मेडल जीत चुकी है। दिव्या मूल रूप से मंसूरपुर क्षेत्र के गांव पुरबालियान की रहने वाली हैं। इस समय वह भारतीय रेलवे में सीनियर टिकट कलेक्टर के पद पर शाहदरा स्टेशन पर नियुक्त हैं। दिव्या बचपन से ही कुश्ती की शौकीन रही हैं। उसके दादा राजेंद्र सिंह तथा पिता सूरज वीर भी पहलवान रहे हैं। हालांकि दिव्या टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में मामूली अंतर से चूक गईं थी। दिव्या के पिता सूरजवीर तथा जनपद के कुश्ती कोच जितेंद्र कुमार का कहना है कि दिव्या के विश्व स्तर पर कुश्ती में परफॉर्मेंस को देखते हुए ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए भेजना चाहिए। उन्हें पूरी आशा है कि दिव्या ओलंपिक खेलों में भारत के लिए मेडल जीतेगी। दिव्या की एक ही इच्छा है कि वह ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीत कर देश का नाम रौशन करें।
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मंसूरपुर (मुजफ्फरनगर)। विश्व कुश्ती संघ की ओर से जारी विश्व महिला कुश्ती रैंकिंग में 72 किलोग्राम भार वर्ग में दिव्या काकरान को दूसरा स्थान मिला है। अर्जुन अवार्डी दिव्या की इस उपलब्धि पर उससे गांव पुरबालियान तथा क्षेत्र में खुशी की लहर है।
दिव्या के पिता सूरजवीर पहलवान ने बताया कि 13 अप्रैल से 18 अप्रैल तक कजाकिस्तान में हुई सीनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में दिव्या ने 72 किलोग्राम भार वर्ग में कोरिया के पहलवान को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। इसी के आधार पर विश्व कुश्ती संघ द्वारा 72 किलोग्राम भार वर्ग में महिला रैंकिंग में दिव्या को दूसरा स्थान मिला है। प्रथम स्थान यूक्रेन की महिला पहलवान को दिया गया है। उन्होंने बताया कि दिव्या अब तक एशियन कुश्ती चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 75 से अधिक मेडल जीत चुकी है। दिव्या मूल रूप से मंसूरपुर क्षेत्र के गांव पुरबालियान की रहने वाली हैं। इस समय वह भारतीय रेलवे में सीनियर टिकट कलेक्टर के पद पर शाहदरा स्टेशन पर नियुक्त हैं। दिव्या बचपन से ही कुश्ती की शौकीन रही हैं। उसके दादा राजेंद्र सिंह तथा पिता सूरज वीर भी पहलवान रहे हैं। हालांकि दिव्या टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में मामूली अंतर से चूक गईं थी। दिव्या के पिता सूरजवीर तथा जनपद के कुश्ती कोच जितेंद्र कुमार का कहना है कि दिव्या के विश्व स्तर पर कुश्ती में परफॉर्मेंस को देखते हुए ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए भेजना चाहिए। उन्हें पूरी आशा है कि दिव्या ओलंपिक खेलों में भारत के लिए मेडल जीतेगी। दिव्या की एक ही इच्छा है कि वह ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीत कर देश का नाम रौशन करें।
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