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डीआईओएस का स्टेनो रिश्वत लेते धरा, स्कूल की मान्यता कराने के नाम पर ले रहा था दो लाख रुपये

Fri, 04 Jan 2019 12:10 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Published by: Deepak Kausik Updated Fri, 04 Jan 2019 12:10 AM IST
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District school inspector steno arrested, taking bribe
एंटी करप्शन टीम की गिरफ्त में आया डीआईओएस का स्टेनो सुनील कुमार शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर में स्कूल की मान्यता कराने के नाम पर संचालक से दो लाख रुपये की रिश्वत वसूल कर रहे डीआईओएस के स्टेनो को मेरठ से आई एंटी करप्शन विभाग की टीम ने राजकीय इंटर कॉलेज के कक्ष से रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। स्टेनो के ऑफिस से मान्यता संबंधी फाइलें व अन्य कागजात भी कब्जे में ले लिए गए हैं। टीम ने डीआईओएस से भी पूछताछ करते हुए उनसे आख्या तलब की है। देर रात तक टीम लिखापढ़ी में जुटी हुई थी।
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छपार क्षेत्र के गांव खामपुर निवासी शाहबाज ने करीब तीन साल पूर्व यूनिक हाईस्कूल के नाम से कक्षा-छह से हाईस्कूल तक की मान्यता लेने हेतु डीआईओएस कार्यालय में आवेदन किया था। पीड़ित शाहबाज के अनुसार सात जनवरी को लखनऊ में मान्यता समिति की बैठक होनी है, जिसके लिए पिछले तीन दिन से डीआईओएस प्रवीण मिश्र का स्टेनो सुनील कुमार शर्मा लगातार उससे फाइल आगे बढ़ाने के लिए ढाई लाख रुपये की मांग कर रहा था।
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पीड़ित ने इस संबंध में बुधवार सुबह डीएम राजीव शर्मा से शिकायत की, जिस पर उन्होंने डीआईओएस से नाराजगी भी जताई, लेकिन इसके बावजूद स्टेनो द्वारा रुपयों की मांग की जाती रही। आखिरकार बुधवार शाम शाहबाज ने मेरठ में एंटी करप्शन विभाग की टीम से संपर्क किया। टीम के निर्देश पर बुधवार रात शाहबाज ने स्टेनो से बात कर दो लाख रुपये देने की हामी भर दी। इसके बाद दो-दो हजार के सौ नोटों के सीरिज नंबर नोट करने के साथ ही उन पर केमिकल लगाकर एंटी करप्शन टीम ने शाहबाज को दिए।
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बृहस्पतिवार शाम करीब 5.30 बजे स्टेनो ने शाहबाज को रुपयों के साथ राजकीय इंटर कॉलेज में बुलाया, जहां रुपये लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। स्टेनो के पास से केमिकल लगे दो-दो हजार के नोट भी बरामद कर लिए गए। इसके बाद टीम ने आरोपी स्टेनो के ऑफिस में पहुंचकर वहां से मान्यता संबंधी फाइलों को भी कब्जे में ले लिया। डीआईओएस प्रवीण मिश्र के भी बयान दर्ज किए गए हैं। देर रात तक सिविल लाइंस थाने में एंटी करप्शन विभाग की टीम मामले को लेकर लिखापढ़ी में जुटी हुई थी।

स्कूल की मान्यता दिलाने के नाम पर स्कूल संचालक शाहबाज से ढाई लाख रुपये की मांग डीआईओएस के स्टेनो सुनील शर्मा द्वारा की जा रही थी, जिसे शिकायत पर रंगेहाथ पकड़ा गया है। आरोपी के कार्यालय से संबंधित फाइलें भी कब्जे में ले ली गईं है, जिनकी जांच की जा रही है। अरविंद कुमार, निरीक्षक, एंटी करप्शन टीम, मेरठ।

गांव खामपुर में कक्षा-छह से हाईस्कूल तक स्कूल संचालन के लिए करीब तीन साल पूर्व मान्यता के लिए आवेदन किया था। लगातार फर्जी शिकायतों के आधार पर उनकी फाइल को लटकाते हुए रुपयों की मांग की जा रही थी। पिछले चार दिन से उनसे ढाई लाख रुपयों की मांग स्टेनो द्वारा की जा रही थी, जिसके चलते एंटी करप्शन विभाग की टीम की शरण लेनी पड़ी। शाहबाज, डायरेक्टर, यूनिक हाईस्कूल, खामपुर-छपार।

धरी रह गई रुपये वसूलने के लिए बरती सतर्कता      
मुजफ्फरनगर। डीआईओएस प्रवीण मिश्र के स्टेनो सुनील कुमार शर्मा द्वारा स्कूल संचालक शाहबाज से अवैध वसूली के दो लाख रुपये वसूलने के लिए पूरी सतर्कता बरती गई, लेकिन एंटी करप्शन विभाग की टीम के आगे सब कुछ धरा रह गया। छपार के गांव खामपुर निवासी स्कूल संचालक शाहबाज से डीआईओएस के स्टेनो सुनील कुमार शर्मा द्वारा लगातार ढाई लाख रुपये की मांग की जा रही थी। रुपये देने की हामी भरने के बाद स्टेनो द्वारा रुपये वसूलने के लिए पूरी सतर्कता बरती गई।

इसके तहत, बुधवार रात पूरी बात तय होने के बाद स्टेनो ने शाहबाज को रुपये लेने के लिए राजकीय इंटर कॉलेज में सुबह 10.30 बजे बुलाया। इसके बाद समय बदलते हुए शाम 5.30 बजे बुलाया गया। निर्धारित समय पर शाहबाज राजकीय इंटर कॉलेज में पहुंच गया, जिसके बाद शुरूआती दस मिनट स्टेनो द्वारा उसे स्कूल गार्डन में ही इधर से उधर यह देखने के लिए घुमाया गया कि उसके साथ कोई ओर तो नहीं है।

पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद स्टेनो ने उसे कॉल कर स्कूल के अंदर बुलाया, जहां करीब डेढ़ सौ मीटर अंदर जाने के बाद एक कक्षा में बुलाकर शाहबाज से दो लाख रुपये लिए गए। हालांकि स्टेनो की पूरी सतर्कता तब धरी रह गई, जब एंटी करप्शन टीम ने शाहबाज से रुपये वसूलते ही उसे रंगेहाथ धर दबोचा।

तीन साल से पेंडिंग में डाली गई थी मान्यता फाइल
मुजफ्फरनगर। यूनिक हाईस्कूल की मान्यता की फाइल करीब तीन साल से अवैध वसूली के लिए पेंडिंग में डाली गई थी। यह हालत तब थी, जबकि पहले तत्कालीन डीआईओएस वीपी सिंह, उनके बाद डीआईओएस मुनेश कुमार के साथ ही जेडी सहारनपुर अनिल भूषण त्रिपाठी ने जांच के बाद मान्यता की फाइल को क्लीनचिट दे दी थी। फाइल लटकाने के लिए छद्म नाम से स्कूल की शिकायत की जाती थी, जो हर बार जांच में गलत पाई जाती थी।

तीन अफसरों की टीम जांच में फाइल करती है ओके
मुजफ्फरनगर। किसी भी स्कूल की मान्यता के लिए जनपद स्तर पर तीन अफसरों की टीम मान्यता की फाइल ओके करती है। इनमें डीआईओएस, एसडीएम और राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शामिल होते हैं।


स्टेनो को लगातार बेकसूर बताते रहे डीआईओएस
मुजफ्फरनगर। स्कूल संचालक से मान्यता फाइल आगे बढ़ाने के लिए दो लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेेहाथ पकड़े गए स्टेनो सुनील कुमार शर्मा को डीआईओएस प्रवीण मिश्र एंटी करप्शन टीम के समक्ष लगातार बेकसूर बताते रहे। पूछताछ के दौरान डीआईओएस ने अपने स्टेनो को साजिशन फंसाने का भी आरोप लगाया। इस दौरान डीआईओएस ने मान्यता फाइल को तीन बार मंजूरी के लिए एसडीएम के समक्ष भेजने का भी दावा किया। हालांकि वे एंटी करप्शन टीम के इस सवाल का जवाब देने में उलझ गए, कि जांच में ओके होने के बावजूद आखिर क्यों स्कूल की मान्यता की फाइल को पेंडिंग में डाला गया था ?
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