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सोशल मीडिया पर नहीं हुई टिप्पणी, सामान्य रहा जनजीवन
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सोशल मीडिया से बनाए रखी दूरी
दंगे का दंश झेल चुकी जनता हर तरह के विवाद से रही दूर
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिले की आम जनता ने समझदारी और भाईचारे का परिचय दिया। जिले के किसी भी व्यक्ति ने किसी के भी प्रति ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की। न्यायालय के निर्णय का पूरी तरह सम्मान किया गया। दंगे का दंश झेल चुकी जनता जानती है कि झगड़े से कितना बड़ा नुकसान होता है। यही कारण रहा कि सोशल मीडिया पर टिप्पणी से भी लोग दूर ही रहे।
अयोध्या पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय को प्रशासन में लगातार बेचैनी थी, लेकिन आम जनता खुद ही यह तय कर चुकी थी कि वह किसी भी तरह के विवाद से दूर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जनता ने यह सिद्ध भी कर दिया। आम जनता में निर्णय को लेकर उत्सुकता तो थी, लेकिन विवादों से बचते हुए। सुबह से लोग अपने घरों में थे। आम जनता में किसी जाति और धर्म के व्यक्ति में निर्णय को लेकर तल्खी जैसी कोई चीज नजर नहीं आई। हर आदमी के दिमाग में एक ही बात थी कि आपसी भाईचारा बना रहना चाहिए। जिले की जनता यहां छह साल पहले हुए दंगे का दंश झेल चुकी है। दंगे के बाद जो सामाजिक और आर्थिक समस्याएं लोगों के सामने आई, उसे कोई भूला नहीं पाया है। हिंदू हो या मुस्लिम दोनों ही वर्गों के लोगों ने समझदारी और भाईचारे की एक मिसाल पेश की। विवादों से दूर रहने के लिए किसी ने भी सोशल मीडिया पर कोई विवादित टिप्पणी नहीं की। ऐसा कोई कार्य किसी ने नहीं किया जो दूसरे वर्ग के लोगों को ठेस पहुंचे।
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दंगे का दंश झेल चुकी जनता हर तरह के विवाद से रही दूर
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिले की आम जनता ने समझदारी और भाईचारे का परिचय दिया। जिले के किसी भी व्यक्ति ने किसी के भी प्रति ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की। न्यायालय के निर्णय का पूरी तरह सम्मान किया गया। दंगे का दंश झेल चुकी जनता जानती है कि झगड़े से कितना बड़ा नुकसान होता है। यही कारण रहा कि सोशल मीडिया पर टिप्पणी से भी लोग दूर ही रहे।
अयोध्या पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय को प्रशासन में लगातार बेचैनी थी, लेकिन आम जनता खुद ही यह तय कर चुकी थी कि वह किसी भी तरह के विवाद से दूर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जनता ने यह सिद्ध भी कर दिया। आम जनता में निर्णय को लेकर उत्सुकता तो थी, लेकिन विवादों से बचते हुए। सुबह से लोग अपने घरों में थे। आम जनता में किसी जाति और धर्म के व्यक्ति में निर्णय को लेकर तल्खी जैसी कोई चीज नजर नहीं आई। हर आदमी के दिमाग में एक ही बात थी कि आपसी भाईचारा बना रहना चाहिए। जिले की जनता यहां छह साल पहले हुए दंगे का दंश झेल चुकी है। दंगे के बाद जो सामाजिक और आर्थिक समस्याएं लोगों के सामने आई, उसे कोई भूला नहीं पाया है। हिंदू हो या मुस्लिम दोनों ही वर्गों के लोगों ने समझदारी और भाईचारे की एक मिसाल पेश की। विवादों से दूर रहने के लिए किसी ने भी सोशल मीडिया पर कोई विवादित टिप्पणी नहीं की। ऐसा कोई कार्य किसी ने नहीं किया जो दूसरे वर्ग के लोगों को ठेस पहुंचे।
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