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अपने गुरु की परंपराओं को आगे बढ़ाएं शिष्य : राजराजेश्वराश्रम
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मुजफ्फरनगर : शुक्रतीर्थ दण्डी आश्रम में विष्णु आश्रम महाराज की जयंती पर बोलते शारदा पीठाधीश्वर ?
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। शारदा पीठाधीश्वर हरिद्वार जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि स्वामी विष्णु आश्रम महाराज जैसे संत वर्तमान में कम दिखाई पड़ते हैं। दायित्वों के प्रति उन जैसी कठोरता का जीवन दुर्लभ संत ही जीते है। शिष्यों को अपने गुरु की परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य करना चाहिए।
तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी विष्णु आश्रम महाराज की 18वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। भक्तों ने मंत्रों उच्चारण के बीच विधि-विधान से चरण पादुका पूजन किया। शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि आज के शिष्य गुरु को तो मानते है लेकिन गुरु की बात नहीं मानते। जबकि शिष्य को गुरु की परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य करना चाहिए। सच्चा संत वहीं है जिसने स्त्री और धन का त्याग किया हो।
बहदरा राजस्थान से पधारे तम्बकेश्वर आश्रम महाराज ने कहा कि विष्णु आश्रम महाराज की छाया मात्र से लोग धन्य हो गए। हनुमत धाम शुक्रतीर्थ के महा मंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि भजन हमेशा करते रहे। परमपिता का स्मरण बड़ा कर्म है।
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कैलाश आश्रम ऋषिकेश से पधारे स्वामी दिव्यानंद महाराज ने कहा कि भक्ति को प्राप्त करना है तो संसार के मोह को छोड़ना होगा। वैराग्य ही सन्यास है। महापुरुषों के शरण में आए बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। मुख्य यजमान जगदीश वशिष्ठ, राजकुमार राज व पूनम राज रहे।
जालंधर से स्वामी शिवबोध आश्रम, जनार्दन स्वरूप ब्रह्मचारी, बुलंदशहर से स्वामी प्रबोधाश्रम महाराज, मेरठ के कृष्ण स्वरूप ब्रह्मचारी, कथा व्यास आचार्य राममूर्ति मिश्र, गिरीश आश्रम, आचार्य उमाकांत द्विवेदी, बनवारी लाल, दिनेश चंद पांडेय, केडी शर्मा, मनोहर लाल शर्मा, विनोद शर्मा आदि सैकड़ों श्रद्धालु मौजूूद रहे।
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तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी विष्णु आश्रम महाराज की 18वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। भक्तों ने मंत्रों उच्चारण के बीच विधि-विधान से चरण पादुका पूजन किया। शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि आज के शिष्य गुरु को तो मानते है लेकिन गुरु की बात नहीं मानते। जबकि शिष्य को गुरु की परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य करना चाहिए। सच्चा संत वहीं है जिसने स्त्री और धन का त्याग किया हो।
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बहदरा राजस्थान से पधारे तम्बकेश्वर आश्रम महाराज ने कहा कि विष्णु आश्रम महाराज की छाया मात्र से लोग धन्य हो गए। हनुमत धाम शुक्रतीर्थ के महा मंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि भजन हमेशा करते रहे। परमपिता का स्मरण बड़ा कर्म है।
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कैलाश आश्रम ऋषिकेश से पधारे स्वामी दिव्यानंद महाराज ने कहा कि भक्ति को प्राप्त करना है तो संसार के मोह को छोड़ना होगा। वैराग्य ही सन्यास है। महापुरुषों के शरण में आए बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। मुख्य यजमान जगदीश वशिष्ठ, राजकुमार राज व पूनम राज रहे।
जालंधर से स्वामी शिवबोध आश्रम, जनार्दन स्वरूप ब्रह्मचारी, बुलंदशहर से स्वामी प्रबोधाश्रम महाराज, मेरठ के कृष्ण स्वरूप ब्रह्मचारी, कथा व्यास आचार्य राममूर्ति मिश्र, गिरीश आश्रम, आचार्य उमाकांत द्विवेदी, बनवारी लाल, दिनेश चंद पांडेय, केडी शर्मा, मनोहर लाल शर्मा, विनोद शर्मा आदि सैकड़ों श्रद्धालु मौजूूद रहे।