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पवित्र आस्था के केंद्र देवी मंदिर में उमड़ता है भक्तों का सैलाब

Fri, 08 Apr 2022 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2022 12:09 AM IST
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Devotees flock to Devi temple, the center of holy faith
दूधली देवी मंदिर में पूजा अर्चना कराते मंदिर कमेटी के अजित सिंह। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
चरथावल। ऐतिहासिक गांव दूधली में प्राचीन देवी मंदिर की महिमा निराली है। साल के चैत्र एवं आश्विन मास के शारदीय नवरात्रों में आदिशक्ति मां दुर्गा के मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है। देवी के सुबह शाम भजनों से पूरा गांव के वातावरण भक्तिमय रहता है। मान्यता है मंदिर में सच्चे मन से मांगी मन्नत पूरी होती है। चैत्र नवरात्रों में श्रद्धालुओं का तांता लगता है।
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स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से विख्यात दूधली गांव का अतीत सुनहरा और संस्मरणों से भरा है। गांव के बस स्टैंड पर मंदिर की भव्यता आगंतुकों को अभिभूत करती है। सुबह और रात को संगीतमयी भजनों से माहौल मां की भक्ति में नजर आता है। ग्रामीण बताते है सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद ग्रामीणों के सहयोग से इंद्र सिंह फौजी ने मंदिर का निर्माण कराया था। करीब तीन दशक पहले मंदिर का सुंदरीकरण कराया गया था। कोलकाता, हरिद्वार और मां शाकंभरी से पावन ज्योति लाकर भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई थी।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष संजय राणा बताते है कमेटी की तरफ से कोरोना काल में गांव में घर-घर जाकर सामाजिक कार्य किए और लोगों को बचाव के लिए जागरूक किया। जरूरतमंदों को सहयोग किया। नवरात्रों में आकर्षक सजावट से सांझ ढलने पर मंदिर दूधिया रोशनी में नहाता हुआ नजर आता है। मंदिर में मॉ के दरबार में सच्चे मन से मांगी मुराद पूरी होती है और कष्ट दूर होते है।
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नियमित मंदिर में पूजा अर्चना करते है
पब्लिक स्कूल में लेखाकार और कमेटी के कोषाध्यक्ष अजित सिंह मंदिर की आस्था जुड़ी है। दो साल से वह नियमित रूप से सुबह शाम मंदिर की साफ सफाई और पूजा अर्चना और आरती कराते है। मंदिर परिसर में महापुरूषों के चित्र लगाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया है। मान्यता है प्राण प्रतिष्ठा के बाद गांव में भूत प्रेत का साया नहीं आया। इससे पहले खेतों में सांपों के झुंड निकलने से ग्रामीण परेशान रहते थे।

घर-घर घुमाते है रोग निवारक धूनी
ठाकुर उदस पुंडीर बताते है मंदिर कमेटी ने युवाओं की टीम बनाई है। उनका कार्य गांव में सामाजिक कार्यों में सहभागिता निभाना है। दीपावली के अलावा नवरात्रों के अलावा दीपावली पर्व पर देशी घी, गुग्गल और लोबान और सामग्री से मिश्रित ज्योत घर-घर घुमाई जाने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। जो समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।
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