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Muzaffarnagar News: श्रीमद्भागवत कथा में किया भगवान बामन अवतार का वर्णन
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श्री श्यामा श्याम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। शहर के गांधीनगर स्थित श्री श्यामा श्याम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पंडित गोविंद ब्रजवासी ने भगवान बामन अवतार का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु की आराधना के बाद जब वह प्रकट हुए तो उन्होंने कहा कि देवी चिंता मत करों। मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को उसका खोया राज्य दिलाऊंगा। समय आने पर उन्होंने अदिति के गर्भ से वामन के रूप में अवतार लिया। उनके ब्रह्मचारी रूप को देखकर सभी देवता और ऋषि-मुनि आनंदित हो उठे।
कथा व्यास ने बताया कि एक दिन उन्हें पता चला कि राजा बलि स्वर्ग पर स्थायी अधिकार जमाने के लिए अश्वमेध यज्ञ करा रहा है। यह जानकर वामन वहां पहुंचे। उनके तेज से यज्ञशाला प्रकाशित हो उठी। बलि ने उन्हें एक उत्तम आसन पर बैठाकर उनका सत्कार किया और अंत में उनसे दान मांगने के लिए कहा। इस पर वामन ने दान मांगते हुए ही बलि का घमंड चूर-चूर कर दिया। जिसके बाद वामन ने बलि को पाताल का अधिपति बना दिया और देवताओं को उनके भय से मुक्ति दिलाई। कथा व्यास ने बताया कि इंसान को कभी भी संपत्ति का घमंड नहीं करना चाहिए।
कथा में मुख्य यजमान के रूप में राकेश शर्मा, कुलदीप शर्मा, अशोक शर्मा, ईश्वर शर्मा, विश्म्बर सैन और विशाल मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। शहर के गांधीनगर स्थित श्री श्यामा श्याम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पंडित गोविंद ब्रजवासी ने भगवान बामन अवतार का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु की आराधना के बाद जब वह प्रकट हुए तो उन्होंने कहा कि देवी चिंता मत करों। मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को उसका खोया राज्य दिलाऊंगा। समय आने पर उन्होंने अदिति के गर्भ से वामन के रूप में अवतार लिया। उनके ब्रह्मचारी रूप को देखकर सभी देवता और ऋषि-मुनि आनंदित हो उठे।
कथा व्यास ने बताया कि एक दिन उन्हें पता चला कि राजा बलि स्वर्ग पर स्थायी अधिकार जमाने के लिए अश्वमेध यज्ञ करा रहा है। यह जानकर वामन वहां पहुंचे। उनके तेज से यज्ञशाला प्रकाशित हो उठी। बलि ने उन्हें एक उत्तम आसन पर बैठाकर उनका सत्कार किया और अंत में उनसे दान मांगने के लिए कहा। इस पर वामन ने दान मांगते हुए ही बलि का घमंड चूर-चूर कर दिया। जिसके बाद वामन ने बलि को पाताल का अधिपति बना दिया और देवताओं को उनके भय से मुक्ति दिलाई। कथा व्यास ने बताया कि इंसान को कभी भी संपत्ति का घमंड नहीं करना चाहिए।
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कथा में मुख्य यजमान के रूप में राकेश शर्मा, कुलदीप शर्मा, अशोक शर्मा, ईश्वर शर्मा, विश्म्बर सैन और विशाल मौजूद रहे।