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शीतलहर से कांपे लोगों के हाड़, सुबह के समय घने कोहरे से जनजीवन थमा

Tue, 26 Dec 2017 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 26 Dec 2017 11:57 PM IST
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Dense fog at morning
सुबह के समय अहिल्याबाई चौक पर छाया घना कोहरा। - फोटो : अमर उजाला
शीतलहर और कोहरे का प्रकोप लगातार बना हुआ है। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। सुबह के समय घना कोहरा होने के कारण जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। ठंडी हवाओं के कारण दिन में भी लोग ठंड में ठिठुरते नजर आए। सूरज निकला, लेकिन ठंड के सामने बेअसर ही रहा।
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मंगलवार को भी ठंड चरम पर रही। शीतलहर के चलते आम आदमी ठिठुरता दिखाई दिया। ठंड इतनी अधिक थी कि आम जनमानस पूरी तरह प्रभावित हो गया। ठंड के साथ सुबह के समय छाए घने कोहरे ने जिंदगी थाम सी दी। सड़कों पर हालात ये थे कि सामने के वाहनों की लाइट भी दिखाई नहीं दी।
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जिन लोगों को सुबह के समय अपने काम से जाना था, उनके सामने समस्या पैदा हुई। सड़कों पर सुबह का आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा। वाहन चलाना तो अलग बात सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल रहा। दिन में सूरज तो निकला, लेकिन ठंड के सामने बेअसर रहा। मौसम में ठंड इतनी अधिक थी कि शाम को तीन बजे के बाद ही लोग ठंड में कांपते नजर आए। न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मौसम में आर्द्रता 94 प्रतिशत रही।
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प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में भारी कोहरे की चेतावनी जारी
लखनऊ। बर्फीली इंड से कंपा रही पछुआ हवाओं के बीच मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले 48 घंटों के दौरान कुछेक स्थानों पर घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। घने कोहरे की चेतावनी मंगलवार को जारी की गई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक पूर्वी उप्र समेत पश्चिमी उप्र के कुछेक इलाकों में सुबह के अलावा शाम के समय घना कोहरा पड़ने की चेतावनी जारी की है।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्त ने मंगलवार को बताया कि पहाड़ों से टकराती हवाओं के चलते रात का पारा धीरे धीरे सरकना शुरू हो जायेगा। कुछेक स्थानों पर ये सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस नीचे तक जा सकता है। मंगलवार को प्रदेश में 3.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम पारे केसाथ मुजफ्फरनगर सबसे ठंडा स्थान रहा।

जबकि कानपुर शहर, नजीबाबाद, खीरी, आगरा आईएएफ, हरदोई, शाहजहांपुर इलाकों में दिन का न्यूनतम पारा 5 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हुआ। न्यूनतम पारे में सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। दिन में धूप की गुनगुनाहट के बाद शाम होते ही प्रदेश में गलन भरी ठंड ने तेवर दिखाये।


तापमान लुढ़कने पर भी भिनभिना रहे मच्छर 
हाड़कंपा देने वाली ठंड में भी मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो सका है। सुबह और शाम में मच्छर कानों पर भिन-भिना रहे हैं। हालांकि इन मच्छरों से बड़ा खतरा तो नहीं है, लेकिन काटने पर इंफेक्शन जरूर पैदा हो सकता है। इसको लेकर सर्दी में एहतियात बरतने की जरूरत है। 

दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। सर्दी में भी मच्छरों का असर कम नहीं हो रहा है। सुबह और शाम को मच्छरों के चलते हाल बुरा है। दिन ढलते ही मच्छर हावी रहते हैं। शहर के हालात छोड़िए, गांवों में समस्या अधिक बुरी है। लोगों में डेंगू और मलेरिया का खौफ बढ़ रहा है।

मच्छरों के नहीं मरने के पीछे दिन और रात का तापमान कारण बना है। रात का तापमान लगातार नीचे गिर रहा है, जबकि दिन में चटकीली धूप खिलने से लार्वा को मजबूती मिलती है। ऐसे में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, लेकिन यह संख्या में कम है। 

विभाग के आंकड़ों में 36 लोगों में मिला डेंगू 
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में डेंगू के लक्षण 36 लोगों में पाए गए हैं, जिनमें मृत्यु एक भी नहीं है। हालांकि प्राइवेट स्तर पर डेंगू के रोगियों की संख्या 100 के पार रही थी, जबकि मलेरिया का भी जिले में बीते वर्ष से कम ही लोगों में असर देखने को मिला है। इस वर्ष 887 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। इन्हें जिला अस्पताल पर उपचार दिया गया है। 

तीन तरह के मच्छर अधिक घातक 
एडीज: साफ पानी में पनपने वाला मच्छर होता है। इसके काटने से फाइलेरिया, चिकनगुनिया, पीत ज्वर होता है। 
एनोफिलीज: इस मच्छर की करीब 40 प्रजातियां हैं, जो मलेरिया रोग का कारक होती है। 
क्यूलेक्स: यह मच्छर भी सामान्य रूप से पानी में पनपता है, जो घरों में पाया जाता है। फाइलेरिया, मलेरिया के साथ बुखार फैलाने का खतरा बढ़ाता है। 

क्या बोले अधिकारी... 
सर्दी में मच्छरों से कोई खास खतरा नहीं है। हालांकि कई तरह के मच्छर होते हैं, जो वर्तमान में भी मौजूद रहे। डेंगू या मलेरिया फैलाने वाले मच्छर नहीं है, लेकिन अन्य बीमारी बढ़ा सकते हैं। अपने आसपास कीटनाशक का इस्तेमाल करे - अलका सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी, मुजफ्फरनगर। 


डेंगू या मलेरिया का पिछले डेढ़ माह से कोई केस सामने नहीं आया है। मच्छर हैं तो जरूर, लेकिन संख्या में कम है। अभी पर्याप्त रूप से ठंड नहीं पड़ी है, जिससे मच्छरों का खात्मा हो सके। जनवरी में मच्छरों की संख्या कम होगी -डॉ वीके सिंह, स्वामी कल्याण देव जिला अस्पताल, मुजफ्फरनगर। 
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