{"_id":"5dc4392f8ebc3e5b0a167a6a","slug":"death-of-teacher-devband-news-mrt452399386","type":"story","status":"publish","title_hn":"दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना गुलाम नबी कश्मीरी का इंतकाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना गुलाम नबी कश्मीरी का इंतकाल
विज्ञापन
दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना गुलाम नबी कश्मीरी का इंतकाल
देवबंद (सहारनपुर)। दीनी तालीम के दूसरे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना गुलाम नबी कश्मीरी का लंबी बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को इंतकाल हो गया। वह 62 वर्ष के थे। उनके इंतकाल से धार्मिक नगरी समेत इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
मूल रुप से कश्मीर के पूंछ जिले के रहने वाले मौलाना गुलाम नबी कश्मीरी पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से दारुल उलूम वक्फ में बतौर उस्ताद अपनी सेवाएं दे रहे थे। वह परिवार के साथ नगर के मोहल्ला खानकाह में रह रहे थे। पिछले लंबे समय से वह गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। दिल्ली, मुंबई समेत कई महानगरों के बड़े अस्पतालों में उनका इलाज चला, लेकिन अधिक फायदा नहीं हुआ। कुछ दिन पहले ही उन्हें दिल्ली के पंत हास्पिटल में भर्ती कराया। वहां बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक हल्कों में शोक की लहर दौड़ गई और देखते ही देखते नगरवासी और भारी संख्या में मदरसा छात्रों की भीड़ उनके आवास पर जमा हो गई।
देर शाम दारुल उलूम की आहत-ए-मोलसरी में नमाज-ए-जनाजे के उपरांत उन्हें मजार-ए-कासमी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया। मौलाना कश्मीरी के निधन को उलमा ने इस्लामिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति बताया। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मौलाना डॉ. शकेब कासमी, मौलाना इस्लाम कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मुफ्ती असद कासमी, मौलाना इब्राहीम कासमी, कारी इस्हाक गोरा, मुफ्ती अरशद फारुकी आदि उलमा ने गहरे दुख का इजहार किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। दीनी तालीम के दूसरे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना गुलाम नबी कश्मीरी का लंबी बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को इंतकाल हो गया। वह 62 वर्ष के थे। उनके इंतकाल से धार्मिक नगरी समेत इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
मूल रुप से कश्मीर के पूंछ जिले के रहने वाले मौलाना गुलाम नबी कश्मीरी पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से दारुल उलूम वक्फ में बतौर उस्ताद अपनी सेवाएं दे रहे थे। वह परिवार के साथ नगर के मोहल्ला खानकाह में रह रहे थे। पिछले लंबे समय से वह गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। दिल्ली, मुंबई समेत कई महानगरों के बड़े अस्पतालों में उनका इलाज चला, लेकिन अधिक फायदा नहीं हुआ। कुछ दिन पहले ही उन्हें दिल्ली के पंत हास्पिटल में भर्ती कराया। वहां बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक हल्कों में शोक की लहर दौड़ गई और देखते ही देखते नगरवासी और भारी संख्या में मदरसा छात्रों की भीड़ उनके आवास पर जमा हो गई।
विज्ञापन
देर शाम दारुल उलूम की आहत-ए-मोलसरी में नमाज-ए-जनाजे के उपरांत उन्हें मजार-ए-कासमी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया। मौलाना कश्मीरी के निधन को उलमा ने इस्लामिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति बताया। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मौलाना डॉ. शकेब कासमी, मौलाना इस्लाम कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मुफ्ती असद कासमी, मौलाना इब्राहीम कासमी, कारी इस्हाक गोरा, मुफ्ती अरशद फारुकी आदि उलमा ने गहरे दुख का इजहार किया है।
विज्ञापन