मुजफ्फरनगर में दो बेटों सहित पिता की मौत, मचा कोहराम
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मरने वाले प्रिंस उर्फ गुड्डू (22), उसका भाई डाक्टर प्रवीण (26) और पिता सुखवीर (55) मूलरूप से गांव लुहारी खुर्द थाना चरथावल के रहने वाले थे। दलित परिवार के प्रिंस की शादी डेढ़ वर्ष पूर्व गांव जौहरा निवासी राजकुमार की पुत्री सुषमा से हुई थी। करीब छह महीने से प्रिंस अपनी ससुराल में ही रह रहा था और यहां लुहारी खुर्द निवासी संजय सैनी की इलेक्ट्रिक की दुकान पर काम करता था। उसका बड़ा भाई प्रवीण (26) पत्नी, बच्चों और पिता सुखबीर (55) के साथ मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड पर अपने किसी रिश्तेदार के मकान में रहता था। शुक्रवार रात प्रिंस गांव लुहारी खुर्द निवासी मैजिक चालक सुनील कश्यप के साथ डीजे लेकर थाना मंसूरपुर के गांव दूधाहेड़ी निवासी उदयवीर के पौत्र के जन्मदिन पार्टी में गया था।
रात करीब दस बजे डीजे पर नाचते हुए वक्त की जा रही हर्ष फायरिंग में एक गोली प्रिंस की गर्दन में जा लगी। ग्रामीण और चालक उसे लेकर जिला अस्पताल जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। देर रात प्रिंस का बड़ा भाई डॉ प्रवीण पिता को लेकर बाइक से पोस्टमार्टम हाउस जाने के लिए निकला था। कोतवाली क्षेत्र में शिवचौक पर इनकी बाइक एक डीसीएम की चपेट में आ गई। प्रवीण ने मौके पर ही, पिता सुखबीर ने मेरठ में उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने प्रिंस के साले सोनू की तहरीर पर हर्ष फायरिंग के आरोपी गोला और दीपक के विरुद्ध हत्या और एससी-एसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
दोनों भाइयों की एक साथ जली चिताएं
चरथावल। हर्ष फायरिंग में मारे गए छोटे भाई प्रिंस को देखने जा रहे बड़े भाई प्रवीण और पिता सुखबीर की सड़क दुर्घटना में मौत से लुहारी खुर्द में मातम पसर गया। हादसे में पिता-पुत्रों की मौत से गांव में हर कोई स्तब्ध है। शाम को घर के आंगन से दो भाइयों की एकसाथ अर्थी उठी तो हर किसी का आंखें नम हो गईं। दोनों भाइयों की पत्नियों का रो-रोकर बुरा हाल है। मेरठ से पिता का शव आने का ग्रामीणों को इंतजार है। घर के कमाने वाले तीनों शख्स की मौत से घर के बच्चों की परवरिश की चिंता हर किसी को सता रही है।
लुहारी खुर्द गांव में बाहरी छोर पर रिक्शा चलाने वाले सुक्खा उर्फ सुखबीर का परिवार रहता है। उसके दो बेटे प्रवीण और प्रिंस उर्फ गुड्डू थे। प्रवीण की शादी करीब आठ साल पूर्व नईमंडी थाना क्षेत्र के गांव बिहारी में रॉकी के साथ हुई थी। यश और गोल्डी बेटा-बेटी हैं, जबकि प्रिंस की शादी जोहरा गांव में सुषमा से करीब डेढ़ साल पूर्व हुई थी। उसकी पत्नी के एक मासूम बेटा है। प्रवीण एक महीने से पिता के साथ मुजफ्फरनगर में रह रहा था। वह बिरालसी गांव में डॉक्टरी करता था। दरअसल, उस पर बिहारी गांव में ससुराल की देखभाल का भी जिम्मा था। पिता सुक्खा अरसे से मुजफ्फरनगर शहर में रिक्शा चलाकर परिवार की देखरेख में हाथ बंटाता था, जबकि उसकी पत्नी की पहले ही मृत्यु हो गई थी।
शनिवार दोपहर से ही तीनों की मौत की खबर से मृतकों के घर पर परिचितों और रिश्तेदारों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। घर पर महिलाओं के एक दूसरे से लिपटकर चीख सन्नाटे को चीर रही थी। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार शाम दोनों भाइयों के शव पहुंचे। दोनों भाइयों की चिताएं जली तो हर किसी की ऑखें नम हो गईं। पिता की मेरठ में उपचार के दौरान मौत के बाद पोस्टमार्टम देर से होने के कारण देर शाम तक उसका शव गांव नहीं पहुंच पाया। इस कारण ग्रामीण उसके शव के इंतजार में बैठे थे। पीड़ित परिवार के घर पर प्रधान के पति तमरेज एडवोकेट, जिला पंचायत सदस्य अजित सिंह, संजय सैनी और आशीष सैनी समेत दर्जनों लोग दिनभर पीड़ित परिवार के घर पर बैठे रहे।
काश हेलमेट होता तो बच जाती जान
मुजफ्फरनगर। भाई की मौत की खबर से परेशान बड़े भाई ने जल्दबाजी में हेलमेट भी नहीं पहना था। प्रवीण अगर हेलमेट पहने होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। पुलिस को घटनास्थल से हेलमेट नहीं मिला, जिसके चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि मृतक ने हेलमेट नहीं पहना हुआ था।